Shiva Purana: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और भक्त पूरी श्रद्धा के साथ शिवलिंग का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पूजन करते हैं। पूजा के बाद अधिकांश लोग शिवलिंग की परिक्रमा भी करते हैं, लेकिन यदि आपने कभी ध्यान दिया हो तो कई श्रद्धालु शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं करते। वे एक निश्चित स्थान तक जाकर वापस लौट आते हैं। ऐसा क्यों किया जाता है? क्या इसके पीछे केवल परंपरा है या कोई धार्मिक कारण भी जुड़ा हुआ है? क्या सभी शिवलिंगों की परिक्रमा अधूरी की जाती है? यदि आपके मन में भी कभी ऐसे प्रश्न आए हैं, तो आइए जानते हैं शिवलिंग की पूरी परिक्रमा न करने के पीछे की धार्मिक मान्यता और इसका कारण।
शिवलिंग की परिक्रमा पूरी क्यों नहीं की जाती?
सनातन धर्म में भगवान शिव के शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि शिवलिंग की परिक्रमा करते समय भक्त पूर्ण चक्कर लगाने के बजाय जल निकासी वाले भाग यानी जलाधारी या सोमसूत्र तक पहुंचकर वहीं से वापस लौट आते हैं। इसे ही आधी या अपूर्ण परिक्रमा कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसा करना भगवान शिव की पूजा की पारंपरिक विधि का हिस्सा माना जाता है, इसलिए अधिकांश शिव मंदिरों में पुजारी भी श्रद्धालुओं को इसी प्रकार परिक्रमा करने की सलाह देते हैं।