Shiva Purana: जब भगवान शिव ने भस्मासुर से वरदान मांगने के लिए कहा, तब उसने अत्यंत विचित्र और विनाशकारी वरदान की इच्छा व्यक्त की। उसने कहा कि उसे ऐसी शक्ति प्रदान की जाए कि वह जिसके भी सिर पर अपना हाथ रख दे, वह तत्काल भस्म हो जाए।
Shiva Purana: भगवान शिव को देवों के देव महादेव और भोलेनाथ कहा जाता है। पौराणिक ग्रंथों में उनका स्वरूप अत्यंत करुणामय और भक्तवत्सल बताया गया है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा, कठोर तप और अटूट भक्ति से भगवान शिव की आराधना करता है, वे उसकी तपस्या से शीघ्र प्रसन्न होकर मनचाहा वरदान प्रदान कर देते हैं। यही कारण है कि शिवजी को आशुतोष भी कहा जाता है। हालांकि कई बार उनके द्वारा दिए गए वरदानों का दुरुपयोग भी हुआ, जिनमें भस्मासुर का प्रसंग सबसे प्रसिद्ध माना जाता है।
शिव पुराण और अन्य पौराणिक कथाओं में वर्णित भस्मासुर की कथा इस बात का विस्तार से वर्णन करती है कि किस प्रकार एक असुर ने कठोर तपस्या के बल पर ऐसा विनाशकारी वरदान प्राप्त कर लिया, जिससे तीनों लोकों में भय का वातावरण बन गया। आइए जानते हैं इस पूरी पौराणिक कथा के बारे में...
कौन था भस्मासुर?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भस्मासुर एक अत्यंत शक्तिशाली असुर था। उसमें अपार महत्वाकांक्षा थी और वह ऐसी शक्ति प्राप्त करना चाहता था, जिसके सामने कोई देवता, दानव या मनुष्य टिक न सके। इसी उद्देश्य से उसने भगवान शिव को प्रसन्न करने का निश्चय किया। भस्मासुर ने एक निर्जन स्थान पर बैठकर कठोर तपस्या आरंभ की। उसने वर्षों तक अन्न-जल का त्याग कर केवल भगवान शिव का ध्यान किया। उसकी तपस्या इतनी कठिन थी कि देवगण भी चिंतित हो उठे। अंततः उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव उसके सामने प्रकट हुए और उससे वर मांगने को कहा।
भस्मासुर ने मांगा कैसा वरदान?
जब भगवान शिव ने भस्मासुर से वरदान मांगने के लिए कहा, तब उसने अत्यंत विचित्र और विनाशकारी वरदान की इच्छा व्यक्त की। उसने कहा कि उसे ऐसी शक्ति प्रदान की जाए कि वह जिसके भी सिर पर अपना हाथ रख दे, वह तत्काल भस्म हो जाए। भगवान शिव अपने स्वभाव के अनुसार भक्त की तपस्या से प्रसन्न थे। उन्होंने बिना किसी भेदभाव के भस्मासुर को यही वरदान प्रदान कर दिया। इसी वरदान के कारण उस असुर का नाम भस्मासुर प्रसिद्ध हुआ।
वरदान मिलते ही बदल गई भस्मासुर की मंशा
कथा के अनुसार वरदान प्राप्त करने के बाद भस्मासुर के मन में अहंकार उत्पन्न हो गया। उसे अपनी शक्ति पर इतना घमंड हो गया कि उसने वरदान की परीक्षा लेने का विचार किया। कुछ कथाओं में वर्णन मिलता है कि उसने सबसे पहले स्वयं भगवान शिव पर ही उस वरदान को आजमाने की इच्छा व्यक्त की। जैसे ही उसने शिवजी के सिर पर हाथ रखने का प्रयास किया, भगवान शिव उसकी मंशा समझ गए। भस्मासुर के पास ऐसा वरदान था कि यदि उसका हाथ किसी के सिर पर पड़ जाता, तो वह तत्काल भस्म हो जाता। इसलिए भगवान शिव वहां से तुरंत चले गए और भस्मासुर उनका पीछा करने लगा।
तीनों लोकों में मच गया हड़कंप
भगवान शिव के आगे-आगे और भस्मासुर के पीछे-पीछे दौड़ने की कथा कई पौराणिक ग्रंथों में मिलती है। कहा जाता है कि भस्मासुर जहां भी जाता, वहां भय का वातावरण बन जाता। देवता, ऋषि और अन्य दिव्य शक्तियां भी चिंतित हो उठीं कि यदि इस असुर को नहीं रोका गया तो वह अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर पूरे सृष्टि लोक में विनाश फैला सकता है। जब स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई, तब भगवान शिव ने भगवान विष्णु का स्मरण किया और उनसे सहायता की प्रार्थना की।
भगवान विष्णु ने लिया मोहिनी का रूप
देवताओं की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए भगवान विष्णु ने एक विशेष योजना बनाई। उन्होंने अत्यंत सुंदर स्त्री का रूप धारण किया, जिसे मोहिनी अवतार कहा जाता है। मोहिनी का अलौकिक सौंदर्य देखकर भस्मासुर मोहित हो गया। वह भगवान शिव का पीछा छोड़कर मोहिनी के पास पहुंच गया। उसने मोहिनी से विवाह करने की इच्छा प्रकट की।
मोहिनी ने रखी एक शर्त
कथा के अनुसार मोहिनी ने भस्मासुर से कहा कि वह केवल उसी व्यक्ति से विवाह करेगी, जो उसके समान नृत्य कर सके। भस्मासुर ने बिना किसी संदेह के यह शर्त स्वीकार कर ली। इसके बाद मोहिनी ने नृत्य आरंभ किया। भस्मासुर भी उनके हर भाव और हर मुद्रा की नकल करने लगा। धीरे-धीरे मोहिनी ने ऐसी मुद्राएं बनानी शुरू कीं, जिनमें हाथ सिर के ऊपर ले जाना पड़ता था। भस्मासुर बिना सोचे-समझे हर क्रिया को दोहराता रहा।
कैसे हुआ भस्मासुर का अंत?
नृत्य के अंतिम चरण में मोहिनी ने अपना दाहिना हाथ अपने सिर पर रख लिया। भस्मासुर भी उसी प्रकार उनकी नकल करते हुए अपना हाथ अपने सिर पर रख बैठा। जैसे ही उसका हाथ उसके सिर पर पहुंचा, भगवान शिव से प्राप्त वरदान उसी पर प्रभावी हो गया। वरदान के प्रभाव से वह उसी क्षण अग्नि के समान जलकर भस्म हो गया। इसी कारण उसका अंत उसी शक्ति से हुआ, जिसे उसने अपनी सबसे बड़ी विजय समझा था। इस प्रकार भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार ने बिना युद्ध किए भस्मासुर का अंत कर दिया और तीनों लोकों पर मंडरा रहा संकट समाप्त हो गया।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)