Ramayana Mythological Story: रामायण में अंगद और रावण की सभा का प्रसंग अत्यंत प्रसिद्ध माना जाता है। यह घटना उस समय की है जब भगवान श्रीराम माता सीता की खोज करते हुए समुद्र पार लंका पहुंच चुके थे। युद्ध की तैयारी पूरी हो चुकी थी, लेकिन श्रीराम ने धर्म की मर्यादा का पालन करते हुए अंतिम बार संधि का अवसर देने का निर्णय लिया। इसी उद्देश्य से वानरराज बाली के पुत्र अंगद को दूत बनाकर रावण की सभा में भेजा गया। वहाँ अंगद ने जो साहस और धैर्य दिखाया, वह रामायण के सबसे चर्चित प्रसंगों में गिना जाता है। अंगद द्वारा रावण की सभा में पैर जमाने की घटना केवल एक चुनौती नहीं थी, बल्कि श्रीराम की शक्ति और वानर सेना के आत्मविश्वास का भी परिचय थी। यह प्रसंग वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस और अन्य अनेक रामायण परंपराओं में वर्णित मिलता है।
श्रीराम ने अंगद को क्यों भेजा था?
जब समुद्र पर सेतु निर्माण पूरा हो गया और वानर सेना लंका पहुंच गई, तब भगवान श्रीराम ने विचार किया कि युद्ध आरंभ करने से पहले रावण को एक अंतिम अवसर दिया जाए। यदि वह माता सीता को सम्मानपूर्वक लौटा दे तो अनावश्यक रक्तपात टाला जा सकता था। इसके लिए श्रीराम ने अंगद को अपना दूत बनाकर लंका भेजा। अंगद बाली के पुत्र थे और उनकी वीरता पूरे वानर समुदाय में प्रसिद्ध थी। श्रीराम ने उनसे कहा कि वे रावण के सामने स्पष्ट रूप से यह संदेश रखें कि सीता को लौटाने पर युद्ध टल सकता है।
रावण की सभा में अंगद का प्रवेश
अंगद निर्भय होकर लंका की राजसभा में पहुंचे। सभा में रावण अपने मंत्रियों और योद्धाओं के साथ बैठा था। अंगद ने किसी प्रकार का भय प्रकट नहीं किया और सीधे रावण के सामने जाकर श्रीराम का संदेश सुनाया। उन्होंने कहा कि श्रीराम धर्म के पालनकर्ता हैं और वे अब भी संधि चाहते हैं। यदि रावण माता सीता को लौटा दे तो उसे क्षमा मिल सकती है। रावण ने अंगद की बात सुनकर उनका उपहास किया। उसने श्रीराम और वानर सेना को तुच्छ बताने का प्रयास किया तथा अंगद को भी धमकाया।
अंगद ने सभा में अपना पैर क्यों जमाया?
जब रावण ने श्रीराम की शक्ति को कम आंकते हुए अंगद का अपमान करना शुरू किया, तब अंगद ने सभा के बीच अपना एक पैर दृढ़ता से जमा दिया। उन्होंने रावण और उसके योद्धाओं से कहा कि यदि उनमें शक्ति है तो वे इस पैर को हिलाकर दिखाएं। अंगद का उद्देश्य केवल बल प्रदर्शन करना नहीं था। वे रावण को यह दिखाना चाहते थे कि जो दूत इतना अडिग है, उसके स्वामी श्रीराम की शक्ति का अनुमान स्वयं लगाया जा सकता है। यह श्रीराम की सामर्थ्य का प्रतीकात्मक परिचय था।
राक्षसों का प्रयास
रावण ने अपने बलशाली योद्धाओं को आदेश दिया कि वे अंगद का पैर हटाएँ। सभा में उपस्थित अनेक राक्षस आगे बढ़े। किसी ने पैर पकड़कर खींचा, किसी ने बलपूर्वक धक्का दिया, लेकिन अंगद का पैर अपनी जगह से तनिक भी नहीं हिला।
मेघनाद और अन्य योद्धाओं की असफलता
रावण का पुत्र मेघनाद भी अत्यंत पराक्रमी माना जाता था। उसने भी अंगद का पैर हटाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। सभा के अन्य प्रसिद्ध योद्धा भी एक-एक करके आगे आए, किंतु कोई भी अंगद के पैर को डिगा न सका। इस घटना से सभा में उपस्थित राक्षस आश्चर्यचकित हो गए। उन्हें यह अनुभव हुआ कि वानर सेना को साधारण समझना उचित नहीं है।
रावण स्वयं आगे बढ़ा
जब सभी योद्धा विफल हो गए, तब रावण स्वयं उठकर अंगद का पैर हटाने के लिए आगे बढ़ा। उसी समय अंगद ने अपना पैर पीछे खींच लिया और रावण से कहा कि यदि चरण पकड़ने ही हैं तो श्रीराम के चरण पकड़ो, वही तुम्हारा कल्याण करेंगे। यह सुनकर रावण क्रोधित हो उठा, किंतु अंगद बिना भय के सभा में खड़े रहे।
अंगद का अंतिम संदेश
सभा से लौटने से पहले अंगद ने रावण को अंतिम बार चेतावनी दी कि वह माता सीता को लौटा दे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि रावण ऐसा नहीं करेगा तो युद्ध निश्चित है और लंका का विनाश अवश्य होगा। रावण ने अपने अहंकार के कारण यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। तब अंगद वहाँ से लौटकर श्रीराम के पास आ गए और पूरी घटना का वर्णन किया।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)