Sawan 2nd Somvar: हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला, तब भगवान शिव ने संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए उसे अपने कंठ में धारण किया था।
Sawan 2nd Somvar: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में पड़ने वाले सोमवार का विशेष महत्व होता है, क्योंकि मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने और व्रत रखने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन के हर सोमवार को शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। भक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, बेलपत्र अर्पित कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
साल 2026 में सावन का दूसरा सोमवार विशेष महत्व रखता है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखेंगे और भगवान शिव का अभिषेक करेंगे, लेकिन क्या आपको पता है कि सावन का दूसरा सोमवार कब पड़ रहा है? इस दिन पूजा का शुभ समय क्या है? पूजा किस विधि से करनी चाहिए और इस सोमवार का धार्मिक महत्व क्या माना जाता है? आइए जानते हैं...
सावन का दूसरा सोमवार कब है?
साल 2026 में सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त 2026, सोमवार को पड़ रहा है। इस दिन देशभर के शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा। कांवड़ यात्रा से लौटे शिवभक्त भी इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक कर अपनी यात्रा पूर्ण करते हैं। सावन के दूसरे सोमवार पर शिवलिंग का अभिषेक करने का विशेष फल बताया गया है।
इस दिन सोम प्रदोष व्रत का भी दुर्लभ संयोग बन रहा है। भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त शाम 6:20 से रात 7:50 तक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन के प्रत्येक सोमवार का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन दूसरा सोमवार विशेष रूप से शिव कृपा प्राप्त करने और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के लिए शुभ माना जाता है।
सावन के दूसरे सोमवार का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला, तब भगवान शिव ने संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए उसे अपने कंठ में धारण किया था। इसके बाद देवताओं ने भगवान शिव को शीतलता प्रदान करने के लिए जल अर्पित किया। तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा प्रचलित मानी जाती है। सोमवार का दिन भी भगवान शिव को समर्पित होता है। ऐसे में जब सावन और सोमवार का संयोग बनता है, तो इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन शिव पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और भक्तों को शिव कृपा प्राप्त होती है।
सावन के दूसरे सोमवार की पूजन विधि
सावन के दूसरे सोमवार की पूजा प्रातःकाल स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके शुरू करनी चाहिए। यदि संभव हो तो सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर के मंदिर या शिवालय में भगवान शिव का ध्यान करें।
सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल और गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक किया जा सकता है। अभिषेक के बाद पुनः स्वच्छ जल से शिवलिंग को स्नान कराएं। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल, सफेद चंदन, भस्म, अक्षत, सफेद पुष्प और मौसमी फल अर्पित करें।
भगवान शिव के समक्ष दीपक और धूप जलाएं तथा शिव मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। अंत में आरती कर भगवान से सुख, शांति और कल्याण की प्रार्थना करें। व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूरे दिन सात्विक आहार ग्रहण करते हैं या फलाहार करते हैं और शाम को पूजा के बाद व्रत का पारण करते हैं।
पूजा में किन बातों का रखें ध्यान
शिव पूजा के दौरान बेलपत्र हमेशा साफ और बिना कटे-फटे होने चाहिए। बेलपत्र की चिकनी सतह शिवलिंग की ओर रखकर अर्पित करना शुभ माना जाता है। भगवान शिव को केतकी का फूल अर्पित नहीं किया जाता। वहीं पूजा में तुलसी दल भी नहीं चढ़ाया जाता। शिवलिंग पर हल्दी लगाने की भी परंपरा नहीं है। पूजा करते समय मन को शांत रखना और पूरे श्रद्धाभाव से भगवान शिव का स्मरण करना सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।
सावन के दूसरे सोमवार पर क्या चढ़ाएं?
इस दिन भगवान शिव को शुद्ध जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद पुष्प, चंदन, भस्म और मौसमी फल अर्पित किए जा सकते हैं। इनमें बेलपत्र और जलाभिषेक का विशेष महत्व बताया गया है। अगर किसी कारणवश मंदिर जाना संभव न हो, तो घर में स्थापित शिवलिंग या भगवान शिव के चित्र के सामने भी श्रद्धा के साथ पूजा की जा सकती है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)