facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  vrat  mangala gauri vrat par kaise kare puja janiye sampurn vidhi shubh muhurat aur dharmik mahatva

Mangala Gauri Vrat: मंगला गौरी व्रत पर कैसे करें पूजा? जानें संपूर्ण विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Mangala Gauri Vrat: साल 2026 में सावन मास के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार इस दिन ब्रह्म मुहूर्त से लेकर प्रातःकाल तक स्नान और पूजा की तैयारी करना शुभ माना जाता है।

Mangala Gauri Vrat
Mangala Gauri Vrat: सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इसी पावन मास में पड़ने वाला मंगला गौरी व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहता है। वहीं, अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे वर की प्राप्ति की कामना से यह व्रत रखती हैं।

मंगला गौरी व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पूजा की विधि, शुभ मुहूर्त और माता गौरी को अर्पित किए जाने वाले पूजन सामग्री का भी विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में यदि आप भी इस वर्ष मंगला गौरी व्रत करने जा रहे हैं, तो क्या आपको इसकी सही पूजा विधि पता है? क्या आप जानते हैं कि किस शुभ समय में पूजा करने से इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है? आइए जानते हैं मंगला गौरी व्रत की संपूर्ण पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व।

मंगला गौरी व्रत 2026 शुभ मुहूर्त

साल 2026 में सावन मास के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार इस दिन ब्रह्म मुहूर्त से लेकर प्रातःकाल तक स्नान और पूजा की तैयारी करना शुभ माना जाता है। शाम के समय प्रदोष काल में माता गौरी की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है, इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग का भी ध्यान रखें।

 

Mangala Gauri Vrat

मंगला गौरी व्रत के लिए आवश्यक पूजन सामग्री

पूजा शुरू करने से पहले सभी आवश्यक सामग्री एकत्र कर लें, ताकि पूजा के दौरान किसी प्रकार की बाधा न आए। सामान्यतः इन वस्तुओं का उपयोग किया जाता है- माता गौरी की प्रतिमा या चित्र, भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग, लाल या पीला वस्त्र, चौकी और स्वच्छ आसन, कलश, रोली, हल्दी, कुमकुम और अक्षत, फूल और माला, यदि शिव पूजन भी कर रहे हों तो बेलपत्र, दूर्वा, धूप और दीप, घी का दीपक, नारियल, सुपारी, मौली, फल और मिठाई, पंचामृत, पान, लौंग, इलायची, श्रृंगार सामग्री जैसे चूड़ी, सिंदूर, बिंदी आदि।

मंगला गौरी व्रत की संपूर्ण पूजा विधि

मंगला गौरी व्रत के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें और एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर माता गौरी की प्रतिमा स्थापित करें। यदि संभव हो तो भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग भी साथ में स्थापित करें।

इसके बाद कलश की स्थापना करें और उसमें जल, आम के पत्ते तथा नारियल रखें। सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें और पूजा का संकल्प लें। अब माता गौरी और भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करें तथा रोली, हल्दी, अक्षत, पुष्प और सुहाग की सामग्री अर्पित करें।

माता गौरी को लाल पुष्प, सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, चुनरी और श्रृंगार का सामान अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद धूप और दीप जलाकर विधिपूर्वक आरती करें। पूजा के दौरान मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ या श्रवण अवश्य करें। कथा के बाद माता गौरी से परिवार की सुख-समृद्धि, पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन की खुशहाली की प्रार्थना करें। पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद वितरित करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-दक्षिणा दें।

 

Mangala Gauri Vrat

व्रत के दौरान किन बातों का रखें ध्यान

मंगला गौरी व्रत करते समय मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखने का विशेष महत्व बताया गया है। पूरे दिन यथासंभव सात्विक आचरण रखें और क्रोध, विवाद तथा कटु वचन से बचें। व्रती को केवल सात्विक भोजन करना चाहिए। कई महिलाएं निर्जला या फलाहार व्रत भी रखती हैं, जबकि कुछ एक समय भोजन करती हैं। अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार व्रत का पालन किया जा सकता है। पूजा के समय पूरे मन से माता गौरी का ध्यान करें और पूजा में जल्दबाजी न करें। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया पूजन अधिक फलदायी माना जाता है।

मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार मंगला गौरी व्रत माता पार्वती की आराधना का विशेष अवसर है। कहा जाता है कि माता पार्वती ने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था। इसी कारण यह व्रत अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि से जुड़ा माना जाता है। विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और परिवार के सुख-शांति की कामना से यह व्रत करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए माता गौरी की पूजा करती हैं। धार्मिक ग्रंथों में इस व्रत को सौभाग्य और मंगल का प्रतीक माना गया है।

पूजा के बाद क्या करें

पूजा समाप्त होने के बाद माता गौरी की आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद दें। यदि संभव हो तो सुहागिन महिलाओं को श्रृंगार सामग्री, फल, वस्त्र या दक्षिणा का दान करें। कई स्थानों पर व्रती महिलाएं एक-दूसरे को सुहाग का सामान भेंट करने की भी परंपरा निभाती हैं। अंत में माता गौरी और भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर व्रत का पारण अपनी परंपरा और नियम के अनुसार करें।


यह भी पढ़ें-

Ramayana: रामायण में आखिर कौन था केवट? भगवान श्रीराम को गंगा पार कराने वाले भक्त की अद्भुत कथा 

Ramayana: श्रीराम को क्यों लेनी पड़ी वानर सेना की सहायता? नारद मुनि से जुड़ा है इसका रहस्य 

Ramayana: नलकुबेर ने क्यों दिया रावण को श्राप? पौराणिक कथा से जानें इसका रहस्य 


(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel