facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  vrat  kamika ekadashi par kare is vrat katha ka path bhagwan vishnu ki bani rahegi vishesh kripa

Kamika Ekadashi Vrat Katha: कामिका एकादशी पर करें इस व्रत कथा का पाठ, भगवान विष्णु की बनी रहेगी विशेष कृपा

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Kamika Ekadashi Vrat: सनातन धर्म में कामिका एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पुण्यदायी तिथि माना गया है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु का पूजन, व्रत, कथा श्रवण और तुलसी दल अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

Kamika Ekadashi Vrat Vidhi
Kamika Ekadashi Vrat Katha: सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली कामिका एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, भगवान विष्णु की पूजा करने और कामिका एकादशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक ग्रंथों में इस एकादशी का माहात्म्य विस्तार से बताया गया है। कहा जाता है कि इस व्रत से मनुष्य के अनेक पाप नष्ट होते हैं और उसे शुभ फल की प्राप्ति होती है। यदि आप भी कामिका एकादशी का व्रत कर रहे हैं, तो पूजा के बाद इस व्रत कथा का पाठ अवश्य करें।

 

Kamika Ekadashi Vrat Vidhi

कामिका एकादशी व्रत कथा

कुंतीपुत्र धर्मराज युधिष्ठिर भगवान श्रीकृष्ण से कहते हैं, “हे भगवन! आपने आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी तथा चातुर्मास के माहात्म्य का विस्तार से वर्णन किया। अब कृपा करके मुझे श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी का नाम, उसकी विधि और उसका महत्व बताइए।”

भगवान श्रीकृष्ण ने कहा- “हे युधिष्ठिर! इस एकादशी की महिमा स्वयं ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद को सुनाई थी। वही पवित्र कथा मैं आज तुम्हें सुनाता हूँ।” एक समय देवर्षि नारद ने ब्रह्माजी से विनम्र होकर पूछा, “हे पितामह! मेरी इच्छा श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की है। कृपया बताइए कि इस एकादशी का क्या नाम है, इसकी पूजा-विधि क्या है और इसका धार्मिक महत्व क्या है?”

देवर्षि नारद के इस प्रश्न को सुनकर ब्रह्माजी प्रसन्न हुए और बोले, “हे नारद! तुमने समस्त लोकों के कल्याण के लिए अत्यंत उत्तम प्रश्न किया है। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी का केवल माहात्म्य सुन लेने मात्र से भी मनुष्य को वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

इस दिन शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। श्रीधर, हरि, विष्णु, माधव और मधुसूदन जैसे उनके विभिन्न नामों का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक आराधना करने से मनुष्य को महान पुण्य प्राप्त होता है।” इसके बाद ब्रह्माजी ने इस व्रत के फल का वर्णन करते हुए कहा, “हे नारद! जो फल मनुष्य को गंगा स्नान, काशी, नैमिषारण्य और पुष्कर जैसे महान तीर्थों में स्नान करने से प्राप्त होता है, वही फल भगवान विष्णु के पूजन से भी प्राप्त हो जाता है।

सूर्य और चंद्र ग्रहण के समय कुरुक्षेत्र तथा काशी में स्नान करने, समुद्र सहित संपूर्ण पृथ्वी का दान करने अथवा सिंह राशि में बृहस्पति के समय गोदावरी और गंडकी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से भी जो पुण्य दुर्लभ है, वह भगवान विष्णु की भक्ति और पूजन से सहज ही प्राप्त हो जाता है।”
 
Kamika Ekadashi Vrat Vidhi
ब्रह्माजी ने आगे कहा, “जो मनुष्य श्रावण मास में भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं, उनके द्वारा सभी देवता, गंधर्व और सूर्यदेव की भी पूजा हो जाती है। इसलिए जो लोग पापों से बचना चाहते हैं, उन्हें कामिका एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु का पूजन अवश्य करना चाहिए।

यह संसार पापों के कीचड़ और मोह-माया के समुद्र से भरा हुआ है। ऐसे में जो मनुष्य इस एकादशी का व्रत करता है और भगवान विष्णु की आराधना करता है, उसके लिए यह व्रत महान कल्याणकारी माना गया है। पापों के नाश का इससे श्रेष्ठ उपाय दूसरा नहीं बताया गया है।”

इसके बाद ब्रह्माजी ने भगवान विष्णु के वचनों का उल्लेख करते हुए कहा, “स्वयं भगवान ने कहा है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से कामिका एकादशी का व्रत करता है, उसे कभी भी कुयोनि की प्राप्ति नहीं होती। विशेष रूप से जो भक्त इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करते हैं, वे अपने समस्त पापों से मुक्त हो जाते हैं। भगवान विष्णु रत्न, मोती, मणि और बहुमूल्य आभूषणों से उतने प्रसन्न नहीं होते, जितने श्रद्धा से अर्पित किए गए तुलसी दल से प्रसन्न होते हैं।”

ब्रह्माजी ने तुलसी के महत्व का वर्णन करते हुए कहा, “हे नारद! भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करने का फल चार भार चाँदी और एक भार स्वर्ण के दान के समान माना गया है। मैं स्वयं भगवान की अतिप्रिय तुलसी को बार-बार प्रणाम करता हूँ। जो व्यक्ति तुलसी के पौधे को जल अर्पित करता है, उसके अनेक कष्ट और यातनाएँ दूर हो जाती हैं। तुलसी के दर्शन मात्र से पापों का नाश होता है और उसके स्पर्श से मनुष्य पवित्र हो जाता है।”

इसके बाद ब्रह्माजी ने कामिका एकादशी की रात्रि का महत्व बताते हुए कहा, “इस पवित्र एकादशी की रात्रि में भगवान के समक्ष दीपदान करना और जागरण करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसका महात्म्य इतना महान है कि स्वयं चित्रगुप्त भी इसका पूर्ण वर्णन नहीं कर सकते। जो भक्त इस रात्रि में भगवान विष्णु के मंदिर में दीपक जलाते हैं, उनके पितर स्वर्गलोक में अमृत का पान करते हैं। जो श्रद्धापूर्वक घी अथवा तेल का दीपक जलाते हैं, वे करोड़ों दीपकों के समान प्रकाश प्राप्त कर सूर्यलोक को जाते हैं।”

अंत में ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद से कहा, “हे नारद! यह कामिका एकादशी ब्रह्महत्या, भ्रूण हत्या तथा अन्य अनेक महापापों का नाश करने वाली मानी गई है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करना चाहिए। जो श्रद्धालु इस कामिका एकादशी व्रत की महिमा को श्रद्धापूर्वक सुनता है या इसका पाठ करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर अंत में भगवान विष्णु के परम धाम विष्णुलोक को प्राप्त होता है।”

 

Kamika Ekadashi Vrat Vidhi

कामिका एकादशी का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में कामिका एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पुण्यदायी तिथि माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु का पूजन, व्रत, कथा श्रवण और तुलसी दल अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण में वर्णित इस एकादशी का महिमा बताता है कि इसका व्रत करने से अनेक तीर्थों के स्नान और बड़े-बड़े यज्ञों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु की भक्ति करने से मनुष्य के पापों का क्षय होता है और उसे शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस दिन तुलसी पूजन, दीपदान और रात्रि जागरण का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जो श्रद्धालु इस एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत कथा का पाठ करता है, उस पर भगवान की विशेष कृपा बनी रहती है और उसे आध्यात्मिक कल्याण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।




 
यह भी पढ़ें-

Ramayana: रामायण में आखिर कौन था केवट? भगवान श्रीराम को गंगा पार कराने वाले भक्त की अद्भुत कथा 

Ramayana: श्रीराम को क्यों लेनी पड़ी वानर सेना की सहायता? नारद मुनि से जुड़ा है इसका रहस्य 

Ramayana: नलकुबेर ने क्यों दिया रावण को श्राप? पौराणिक कथा से जानें इसका रहस्य 


(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel