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Shivling Puja: शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है कच्चा दूध? जानिए धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Shivling Puja: सनातन धर्म में भगवान शिव को अभिषेक प्रिय देव माना गया है। शिव पुराण, लिंग पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में शिवलिंग पर विभिन्न पवित्र पदार्थों से अभिषेक करने का उल्लेख मिलता है। 

Shivling Puja
Shivling Puja: भगवान शिव की पूजा में जल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक का फूल और कच्चा दूध चढ़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। खासतौर पर सावन के महीने और सोमवार के दिन शिवलिंग पर कच्चे दूध से अभिषेक करने का विशेष महत्व बताया गया है। देशभर के शिव मंदिरों में भक्त बड़ी श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान शिव को कच्चा दूध ही क्यों चढ़ाया जाता है? इसके पीछे कौन-सी धार्मिक मान्यता और पौराणिक कथा जुड़ी है? आइए जानते हैं इस परंपरा का धार्मिक महत्व...

कब शुरू हुई शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाने की परंपरा?

सनातन धर्म में भगवान शिव को अभिषेक प्रिय देव माना गया है। शिव पुराण, लिंग पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में शिवलिंग पर विभिन्न पवित्र पदार्थों से अभिषेक करने का उल्लेख मिलता है। इनमें जल और कच्चे दूध का विशेष स्थान है। मान्यता है कि शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं सुनते हैं। यही कारण है कि सावन, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत और सोमवार के दिन लाखों श्रद्धालु दूध से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।

 

Shivling Ki Utpatti

समुद्र मंथन की कथा से जुड़ा है दूध चढ़ाने का महत्व

शिवलिंग पर दूध चढ़ाने की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक मान्यता समुद्र मंथन की कथा से जुड़ी मानी जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया तो सबसे पहले कालकूट नाम का अत्यंत विषैला विष निकला। उस विष की ज्वाला से तीनों लोकों में संकट उत्पन्न हो गया, तब सभी देवता भगवान शिव की शरण में पहुंचे।

सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने पूरा विष अपने कंठ में धारण कर लिया। माता पार्वती ने विष को उनके कंठ से नीचे नहीं उतरने दिया, जिससे उनका गला नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। धार्मिक मान्यता है कि विष की तीव्र गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव का जल और दूध से अभिषेक किया। तभी से शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाने की परंपरा प्रारंभ हुई और यह पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई।

कच्चा दूध ही क्यों चढ़ाया जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गाय का कच्चा दूध सात्विक, पवित्र और शुद्ध माना जाता है, इसलिए भगवान शिव के अभिषेक में कच्चे दूध का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि बिना उबला हुआ शुद्ध दूध अपनी प्राकृतिक पवित्रता और सात्विकता बनाए रखता है। इसी कारण शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करने की परंपरा प्रचलित हुई। पूजा में प्रयुक्त दूध ताजा और शुद्ध होना चाहिए।

 

Shivling Puja

शिवलिंग पर दूध चढ़ाने का धार्मिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करना भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि दूध से अभिषेक करने पर भगवान शिव प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं। सावन के महीने में इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि इस पूरे मास को भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे श्रेष्ठ समय माना गया है।

सावन में दूध से अभिषेक का विशेष महत्व

सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिवालयों में प्रतिदिन रुद्राभिषेक और दुग्धाभिषेक किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन में दूध से अभिषेक करने पर भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है, इसलिए भक्त सुबह स्नान करके शिव मंदिर पहुंचते हैं और पहले जल, फिर कच्चा दूध तथा उसके बाद दोबारा जल से अभिषेक करते हैं।

 

Shivling Puja

दूध के साथ किन वस्तुओं का अभिषेक किया जाता है?

शिव पूजा में केवल दूध ही नहीं, बल्कि कई अन्य पवित्र पदार्थों से भी अभिषेक किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से जल, दही, घी, शहद, शक्कर, गंगाजल, गन्ने का रस और पंचामृत शामिल हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार प्रत्येक पदार्थ का अपना अलग महत्व माना गया है, लेकिन दूध का स्थान विशेष बताया गया है। यही कारण है कि अधिकांश शिव भक्त सबसे पहले कच्चे दूध से अभिषेक करते हैं।

अभिषेक के बाद जल चढ़ाने की परंपरा क्यों है?

शिव पूजा की पारंपरिक विधि में दूध अर्पित करने के बाद स्वच्छ जल या गंगाजल चढ़ाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दूध से अभिषेक करने के बाद जल अर्पित करना पूजा की पूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। अधिकांश मंदिरों में भी यही क्रम अपनाया जाता है, जहां पहले जल, फिर दूध और उसके बाद पुनः जल चढ़ाया जाता है।




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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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