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Kamika Ekadashi: कब मनाई जाएगी कामिका एकादशी, जानें तिथि, पूजन विधि, धार्मिक महत्व और व्रत की संपूर्ण जानकारी

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Kamika Ekadashi: कामिका एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और साधक को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस व्रत से पापों के क्षय, मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है। 

Kamika Ekadashi Vrat Vidhi
Kamika Ekadashi Vrat Vidhi: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, लेकिन इसी पावन मास में आने वाली कामिका एकादशी भी सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है और मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है। भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कामिका एकादशी का उल्लेख पद्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। 

सावन का महीना स्वयं भगवान शिव का प्रिय माना जाता है, लेकिन इसी महीने आने वाली कामिका एकादशी का संबंध भगवान विष्णु की आराधना से है,  इसलिए इस दिन शिव और विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। यदि आप भी इस बार कामिका एकादशी का व्रत रखने जा रहे हैं तो जान लीजिए कामिका एकादशी व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, संपूर्ण पूजन विधि और व्रत के नियम...

कामिका एकादशी 2026 कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर कामिका एकादशी मनाई जाती है। कामिका एकादशी तिथि की शुरुआत 08 अगस्त को रात 01 बजकर 59 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 09 अगस्त को सुबह 11 बजकर 04 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, 09 अगस्त को कामिका एकादशी व्रत किया जाएगा।

 

Kamika Ekadashi Vrat Vidhi

कामिका एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त

एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त से लेकर प्रातःकाल तक पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

पूजा के लिए शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 36 मिनट से 05 बजकर 20 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 40 मिनट से 03 बजकर 31 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 07 बजकर 58 मिनट से 07 बजकर 206 मिनट तक
अमृत काल- रात 08 बजकर 12 मिनट 09 बजकर 39 मिनट तक

कामिका एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से व्यक्ति के अनेक जन्मों के पाप नष्ट होने की मान्यता है। कहा जाता है कि इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने से अश्वमेध यज्ञ और अनेक तीर्थों के दर्शन के समान पुण्य प्राप्त होता है।

सावन मास में आने के कारण इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ तुलसी माता की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। धार्मिक ग्रंथों में यह भी वर्णित है कि कामिका एकादशी का व्रत करने वाला व्यक्ति जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त करता है तथा भगवान विष्णु की कृपा से उसे आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग मिलता है।

 

Kamika Ekadashi Vrat Vidhi

कामिका एकादशी व्रत की संपूर्ण पूजन विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर की साफ-सफाई करें और पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। यदि पहले से स्थापित हैं तो उन्हें गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।

पूजा स्थान पर घी का दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें। भगवान विष्णु को चंदन, अक्षत, पीले पुष्प, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें। ध्यान रखें कि भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल के बिना अधूरी मानी जाती है। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा मंगल की कामना करें।

पूजा के दौरान "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें। इसके साथ ही विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा या श्रीमद्भगवद्गीता के किसी अध्याय का पाठ भी कर सकते हैं। भगवान विष्णु की आरती करें और नैवेद्य अर्पित करें। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में वितरित करें।

व्रत के दिन अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या निर्जल व्रत रखें। दिनभर सात्विक आचरण रखें, भगवान विष्णु का स्मरण करें तथा भजन-कीर्तन करें।
एकादशी की रात्रि में यथासंभव भगवान विष्णु के नाम का जप और जागरण करना भी शुभ माना जाता है।

अगले दिन द्वादशी तिथि में हरिवासर समाप्त होने के बाद शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की पूजा करके ब्राह्मण, गौ या जरूरतमंद व्यक्ति को दान-दक्षिणा दें और फिर विधिपूर्वक व्रत का पारण करें।

व्रत में क्या खाएं?

जो लोग निर्जला व्रत नहीं रख सकते, वे फलाहार कर सकते हैं। फल, दूध, दही, मखाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा, साबूदाना, सूखे मेवे, नारियल पानी और सेंधा नमक का उपयोग किया जा सकता है।

 

Kamika Ekadashi Vrat Vidhi

कामिका एकादशी पर क्या करें?

  • प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र, विष्णु सहस्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ करें।
  • अपनी श्रद्धा और स्वास्थ्य के अनुसार निर्जल, फलाहार या सात्विक आहार के साथ व्रत रखें।
  • दिनभर भगवान विष्णु का स्मरण, भजन-कीर्तन और सत्संग करें।
  • जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दें।
  • क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर शांत और सात्विक व्यवहार रखें।
  • अगले दिन द्वादशी तिथि में शुभ समय पर विधिपूर्वक व्रत का पारण करें।

कामिका एकादशी पर क्या नहीं करें?

  • इस दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। एकादशी पर चावल खाने का निषेध बताया गया है।
  • मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें।
  • झूठ बोलने, क्रोध करने, विवाद करने और किसी का अपमान करने से बचें।
  • किसी भी जीव को कष्ट न दें और हिंसा से दूर रहें।
  • नकारात्मक सोच, चुगली और अपशब्दों का प्रयोग करने से बचें।
  • व्रत के नियमों का उल्लंघन न करें और बिना कारण बार-बार भोजन न करें।
  • द्वादशी तिथि से पहले व्रत का पारण न करें। हरिवासर समाप्त होने के बाद ही पारण करें।
  • पूजा के समय मन को भटकने न दें और बिना श्रद्धा के केवल औपचारिक पूजा करने से बचें।

 

Kamika Ekadashi Vrat Vidhi

कामिका एकादशी व्रत का पारण कब करें?

वैदिक परंपरा के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। कामिका एकादशी व्रत का पारण करने का समय 10 अगस्त को सुबह 05 बजकर 47 मिनट से 8 बजे तक है। पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा करें और उसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण करें। इस दिन मंदिर या गरीब लोगों में अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान जरूर करना चाहिए। इससे साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। 

कामिका एकादशी व्रत का फल

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और साधक को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस व्रत से पापों के क्षय, मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है। भगवान विष्णु की कृपा से परिवार में सकारात्मकता बनी रहती है और जीवन में आने वाली अनेक बाधाएं दूर होने की मान्यता भी धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है। साथ ही, तुलसी पूजन, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, दान-पुण्य और श्रद्धापूर्वक व्रत का पालन करने वाले भक्तों को विशेष धार्मिक फल प्राप्त होने की मान्यता है, इसलिए सावन मास की यह एकादशी भगवान विष्णु के भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।





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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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