Sawam Somvar Vrat: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में लाखों श्रद्धालु शिव कृपा प्राप्त करने के लिए सोमवार का व्रत रखते हैं। खासतौर पर पहला सावन सोमवार अत्यंत शुभ माना जाता है, इसलिए इस दिन व्रत रखने वालों की संख्या भी सबसे अधिक होती है। हालांकि जितना महत्व व्रत रखने और पूजा करने का है, उतना ही महत्व व्रत के पारण का भी बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि व्रत का पारण सही समय और सही विधि से किया जाए तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। वहीं नियमों की अनदेखी करने पर व्रत अधूरा माना जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सावन सोमवार के व्रत का पारण कब और कैसे करना चाहिए? क्या इसके भी कुछ विशेष नियम हैं? आइए जानते हैं पहले सावन सोमवार के व्रत के पारण की सही विधि, आवश्यक नियम और इसका धार्मिक महत्व...
सावन सोमवार के व्रत का पारण क्या होता है?
पारण का अर्थ है विधि-विधान के साथ व्रत को समाप्त करना। पूरे दिन उपवास और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने के बाद अगले दिन या निर्धारित समय पर नियमपूर्वक भोजन ग्रहण कर व्रत का समापन किया जाता है, जिसे पारण कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत तभी पूर्ण माना जाता है जब उसका पारण भी विधिपूर्वक किया जाए। इसलिए केवल उपवास रखना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सही समय पर व्रत समाप्त करना भी आवश्यक माना गया है।
पहले सावन सोमवार के व्रत का पारण कब करें?
सावन सोमवार का व्रत रखने वाले श्रद्धालु सामान्य रूप से अगले दिन यानी मंगलवार को सूर्योदय के बाद स्नान और पूजा करने के पश्चात व्रत का पारण करते हैं। यदि किसी ने निर्जला व्रत रखा है तो वह भी अगले दिन पूजा के बाद जल ग्रहण कर पारण कर सकता है। वहीं फलाहार करने वाले श्रद्धालु भी अगले दिन विधिपूर्वक पूजा के बाद अन्न ग्रहण कर व्रत समाप्त करते हैं। कई स्थानों पर स्थानीय परंपरा और परिवार की मान्यता के अनुसार पारण का समय अलग हो सकता है। ऐसे में अपने कुलाचार या परिवार की परंपरा का पालन करना भी उचित माना जाता है।
पारण से पहले करें यह जरूरी कार्य
व्रत का पारण करने से पहले कुछ धार्मिक नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है। सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करें। यदि घर में शिवलिंग स्थापित है तो जल, दूध या गंगाजल से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल, सफेद चंदन और पुष्प अर्पित करें। इसके बाद "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें और भगवान शिव से व्रत पूर्ण होने की प्रार्थना करें। पूजा पूरी होने के बाद ही व्रत का पारण करना चाहिए।
सावन सोमवार व्रत पारण की सही विधि
पारण की शुरुआत भगवान शिव को नैवेद्य अर्पित करके करें। इसके बाद यदि संभव हो तो गाय को रोटी, हरा चारा या गुड़ खिलाएं। जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी श्रद्धा के अनुसार दान देना भी शुभ माना जाता है। इसके बाद सबसे पहले जल ग्रहण करें। यदि निर्जला व्रत रखा था तो जल पीकर व्रत खोलें। इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण करें। पारण के समय भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिए। भोजन में फल, दूध, दही, खीर, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा, मूंगफली, सेंधा नमक से बने व्यंजन या साधारण सात्विक भोजन लिया जा सकता है।
पारण के समय किन बातों का रखें ध्यान?
व्रत का पारण जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए। पहले पूजा पूरी करें और उसके बाद ही भोजन ग्रहण करें। भोजन शुरू करने से पहले भगवान शिव का स्मरण करना शुभ माना जाता है। पारण के समय तामसिक भोजन से पूरी तरह बचना चाहिए। लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नहीं किया जाता। यदि पूरे सावन के सोमवार का व्रत रखने का संकल्प लिया है तो पहले सोमवार के पारण के बाद भी संयमित और सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है।
पारण में क्या खाएं और क्या नहीं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पारण के समय हल्का और सात्विक भोजन करना सबसे अच्छा माना जाता है। पारण में दूध, दही, फल, खीर, साबूदाना की खिचड़ी, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन, सेंधा नमक वाले आलू, मूंगफली और मौसमी फल शामिल किए जा सकते हैं। यदि अगले दिन सामान्य भोजन करना हो तो पहले भगवान को भोग लगाकर सादा भोजन ग्रहण करें। पारण के समय बहुत अधिक तला-भुना या भारी भोजन करने से बचना चाहिए। इससे शरीर पर भी अनावश्यक भार पड़ सकता है।
क्या बिना पारण के व्रत पूरा माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी व्रत का समापन पारण से ही होता है। यदि व्यक्ति व्रत रखकर सही समय पर पारण नहीं करता तो व्रत की प्रक्रिया अधूरी मानी जाती है। इसलिए पूजा, संकल्प और उपवास के साथ-साथ पारण भी व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।