Parivartini Ekadashi: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा करने और व्रत रखने की परंपरा है। एकादशी का व्रत रखने के बाद अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक पारण करना जरूरी माना जाता है। साल 2026 में परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर को रखा जाएगा और व्रत का पारण 23 सितंबर को किया जाएगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन पारण का समय सुबह 5:38 बजे से 8:04 बजे तक रहेगा। हालांकि, पारण का समय शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। क्या आपको पता है कि एकादशी का व्रत केवल भोजन ग्रहण करने से ही पूरा नहीं होता, बल्कि पारण के भी कुछ विशेष नियम बताए गए हैं? आइए जानते हैं परिवर्तिनी एकादशी के पारण की पूरी विधि और नियम...
कब होगा परिवर्तिनी एकादशी का पारण
साल 2026 में परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर, मंगलवार को रखा जाएगा। इसके अगले दिन यानी 23 सितंबर, बुधवार को द्वादशी तिथि में व्रत का पारण किया जाएगा। पंचांग के अनुसार, पारण के लिए सुबह 5:38 बजे से 8:04 बजे तक का समय रहेगा। द्वादशी तिथि 23 सितंबर की रात करीब 10:50 बजे समाप्त होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में ही करना उचित माना जाता है।
पारण से पहले करें भगवान विष्णु की पूजा
एकादशी व्रत के अगले दिन सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थान की सफाई करके भगवान विष्णु की पूजा करें। भगवान को जल, पीले फूल, चंदन और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर भगवान विष्णु का ध्यान करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार विष्णु मंत्र का जाप करें। पूजा के बाद ही पारण की तैयारी करनी चाहिए।
ऐसे करें व्रत का पारण
परिवर्तिनी एकादशी के पारण के समय सबसे पहले भगवान विष्णु को भोग लगाएं। इसके बाद जल ग्रहण करके व्रत खोल सकते हैं। इसके बाद फल, दूध या हल्का सात्विक भोजन ग्रहण करना उचित माना जाता है। लंबे समय तक व्रत रखने के बाद अचानक भारी या बहुत तला-भुना भोजन करने से बचना चाहिए। पारण के दौरान अपनी क्षमता और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए।
हरि वासर में न करें पारण
एकादशी व्रत के पारण में हरि वासर का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, द्वादशी के शुरुआती समय को हरि वासर कहा जाता है और इस अवधि में पारण नहीं करना चाहिए। हरि वासर समाप्त होने के बाद ही व्रत खोलना उचित माना जाता है। सामान्य तौर पर पारण के लिए द्वादशी तिथि के भीतर का उपयुक्त समय देखा जाता है।
पारण में इन बातों का रखें ध्यान
परिवर्तिनी एकादशी का व्रत खोलते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। पारण के दिन बहुत देर तक व्रत खींचने से बचें, खासकर जब द्वादशी तिथि में पारण का उचित समय मिल रहा हो। व्रत खोलने के लिए पहले भगवान विष्णु को भोग लगाएं और फिर स्वयं भोजन करें। भोजन सात्विक और हल्का रखें। एकादशी के दौरान जिन चीजों का सेवन नहीं किया जाता, पारण के समय भी तुरंत भारी भोजन करने से बचना चाहिए।
पारण के बाद करें दान
एकादशी व्रत में पूजा-पाठ के साथ दान का भी महत्व माना गया है। पारण के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, फल, वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री का दान किया जा सकता है। भगवान विष्णु को प्रिय तुलसी और पीले रंग से जुड़ी वस्तुओं का धार्मिक रूप से विशेष महत्व माना जाता है। दान करते समय दिखावे के बजाय श्रद्धा को महत्व देना चाहिए।
परिवर्तिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
परिवर्तिनी एकादशी को भगवान विष्णु से जुड़ी महत्वपूर्ण एकादशियों में माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान इस एकादशी पर भगवान विष्णु शयन अवस्था में करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इसे पार्श्व या पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा की जाती है।
पारण के बाद क्या करें
पारण के बाद भगवान विष्णु का स्मरण करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा करें। इसके बाद सामान्य सात्विक भोजन ग्रहण किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति ने निर्जला या कठिन व्रत रखा है तो पारण में शरीर की क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है। धार्मिक दृष्टि से भी व्रत का उद्देश्य श्रद्धा और संयम माना गया है, इसलिए पारण शांतिपूर्वक और विधि के अनुसार करना चाहिए।
यह भी पढ़ें-
(
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)