Anant Chaturdashi: अनंत सूत्र भगवान विष्णु की पूजा के बाद धारण किया जाता है। इसलिए इसे बांधने के बाद इसकी पवित्रता और धार्मिक भावना का ध्यान रखने की परंपरा है। धागे को जानबूझकर तोड़ना या अपमानित करना उचित नहीं माना जाता।
Anant Chaturdashi: अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा के बाद 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांधने की परंपरा है। मान्यता है कि यह धागा भगवान विष्णु के प्रति श्रद्धा और रक्षा का प्रतीक होता है। पूजा के बाद इसे बांध तो लिया जाता है, लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर इस धागे को कितने दिनों तक धारण करना चाहिए और इसे कब उतारना उचित माना जाता है। क्या इसे अगले साल तक हाथ में बांधे रखना चाहिए या 14 दिन बाद उतार देना चाहिए? आइए जानते हैं अनंत सूत्र को लेकर क्या धार्मिक नियम बताए गए हैं।
अनंत सूत्र कितने दिनों तक पहनें?
धार्मिक परंपराओं में अनंत सूत्र को लेकर अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं। एक प्रचलित मान्यता के अनुसार अनंत चतुर्दशी के दिन बांधे गए अनंत धागे को कम से कम 14 दिनों तक धारण करना चाहिए। यानी इसे बांधने के तुरंत बाद उतारना उचित नहीं माना जाता। 14 दिन पूरे होने के बाद इसे विधि के अनुसार उतारा जा सकता है। वहीं, कई परिवारों में अनंत सूत्र को पूरे एक वर्ष तक धारण करने की परंपरा है। ऐसी मान्यता में अगले साल अनंत चतुर्दशी के दिन नया अनंत सूत्र बांधने से पहले पुराने सूत्र को उतारा जाता है, इसलिए धागा कब उतारना है, इसमें परिवार और क्षेत्र की परंपरा का भी महत्व रहता है।
14 दिन बाद कैसे उतारें?
अगर आप अनंत सूत्र को 14 दिनों तक धारण करने की परंपरा का पालन कर रहे हैं, तो 14 दिन पूरे होने के बाद इसे श्रद्धापूर्वक उतारना चाहिए। इसे सामान्य धागे की तरह काटकर कूड़े में फेंकना उचित नहीं माना जाता। धागा उतारने से पहले भगवान विष्णु का स्मरण करें और मन में प्रार्थना करें। इसके बाद अनंत सूत्र को साफ स्थान पर रखकर पूजा की जा सकती है। कई धार्मिक परंपराओं में पुराने सूत्र को जल में प्रवाहित करने या किसी पवित्र वृक्ष के नीचे रखने की मान्यता भी मिलती है।
क्या पूरे साल पहन सकते हैं?
हां, कई परिवारों में अनंत सूत्र को पूरे साल धारण करने की परंपरा है। इस परंपरा के अनुसार इसे अगले वर्ष आने वाली अनंत चतुर्दशी तक हाथ में रखा जाता है। अगले साल जब भगवान विष्णु की पूजा के बाद नया अनंत सूत्र बांधा जाता है, तब पुराने सूत्र को उतार दिया जाता है, इसलिए ऐसा कोई एक नियम नहीं है कि हर व्यक्ति को अनंत सूत्र केवल 14 दिन ही पहनना चाहिए। 14 दिन तक धारण करने की मान्यता भी प्रचलित है और अगले साल तक रखने की परंपरा भी कई जगह देखने को मिलती है। अपने घर की परंपरा के अनुसार इसका पालन किया जा सकता है।
धागा अपने आप टूट जाए तो?
अनंत सूत्र कभी-कभी काम करते हुए या पुराना होने के कारण अपने आप टूट सकता है। ऐसी स्थिति में इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। इसे अपशकुन मानना आवश्यक नहीं है। टूटे हुए धागे को सम्मानपूर्वक हटा दें। इसे कूड़े में फेंकने के बजाय किसी पवित्र स्थान पर रखने या जल में प्रवाहित करने की परंपरा अपनाई जा सकती है। अगर परिवार में अनंत सूत्र दोबारा धारण करने की परंपरा है, तो भगवान विष्णु की पूजा करके नया सूत्र बांधा जा सकता है।
अनंत सूत्र में 14 गांठें क्यों होती हैं?
अनंत सूत्र में 14 गांठें होने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन गांठों को 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है। भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा से जुड़े इस सूत्र को इसी वजह से विशेष माना जाता है। अनंत व्रत की कथा में भी 14 गांठों वाले अनंत सूत्र का उल्लेख मिलता है। सुशीला ने अनंत व्रत करते समय 14 गांठों वाला सूत्र धारण किया था। बाद में इसी सूत्र से जुड़ी घटना के कारण कौंडिन्य ऋषि को अनंत व्रत की महिमा का बोध हुआ।
धागा बांधने के बाद क्या ध्यान रखें?
अनंत सूत्र भगवान विष्णु की पूजा के बाद धारण किया जाता है। इसलिए इसे बांधने के बाद इसकी पवित्रता और धार्मिक भावना का ध्यान रखने की परंपरा है। धागे को जानबूझकर तोड़ना या अपमानित करना उचित नहीं माना जाता। सबसे जरूरी बात यह है कि अनंत सूत्र को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में परंपराएं अलग हो सकती हैं, इसलिए अगर आपके घर में इसे अगले साल तक रखने की परंपरा चली आ रही है तो उसी के अनुसार पालन करें। वहीं 14 दिन बाद उतारने की परंपरा है तो 14 दिन पूरे होने पर इसे सम्मानपूर्वक उतारा जा सकता है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)