Yoga Tips: आजकल ऑफिस में घंटों कंप्यूटर या लैपटॉप के सामने बैठकर काम करने के कारण कई लोग गर्दन, कंधों और पीठ के दर्द से परेशान रहते हैं। लगातार एक ही स्थिति में बैठे रहने, गलत तरीके से कुर्सी पर बैठने और बीच-बीच में ब्रेक न लेने से मांसपेशियों में अकड़न और खिंचाव महसूस हो सकता है। कई बार काम खत्म होने के बाद गर्दन घुमाने, कंधे उठाने या पीठ सीधी करने में भी परेशानी होने लगती है। ऐसे में क्या आप जानते हैं कि रोजाना कुछ आसान योगासन करने से शरीर की अकड़न कम करने और लचीलेपन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है? आइए जानते हैं ऑफिस में लंबे समय तक बैठने से होने वाले गर्दन और पीठ के दर्द से राहत पाने के लिए कौन-से 5 योगासन किए जा सकते हैं।
मार्जरी आसन
मार्जरी आसन को कैट पोज भी कहा जाता है। यह योगासन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने और पीठ की मांसपेशियों में होने वाली अकड़न कम करने में मदद कर सकता है। इसे करने के लिए सबसे पहले घुटनों और हथेलियों के बल जमीन पर आ जाएं। दोनों हथेलियों को कंधों के ठीक नीचे और घुटनों को कूल्हों के नीचे रखें। अब सांस छोड़ते हुए पीठ को धीरे-धीरे ऊपर की ओर गोल करें और ठुड्डी को छाती की तरफ लाएं। इसके बाद सांस लेते हुए पीठ को हल्का नीचे करें और सिर को आराम से ऊपर उठाएं। इस प्रक्रिया को 5 से 8 बार धीरे-धीरे दोहराएं। ध्यान रखें कि गर्दन को पीछे की ओर जरूरत से ज्यादा न मोड़ें और हर गतिविधि आराम से करें।
बालासन
बालासन पीठ और कंधों को आराम देने के लिए किया जाने वाला आसान योगासन है। लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने के बाद इसे करने से शरीर को आराम महसूस हो सकता है। इसके लिए सबसे पहले घुटनों के बल बैठ जाएं और धीरे-धीरे अपने धड़ को आगे की ओर झुकाएं। माथे को जमीन पर टिकाएं और दोनों हाथों को सामने की ओर फैलाएं। अगर इस स्थिति में परेशानी हो, तो हाथों को शरीर के पास भी रख सकते हैं। अब सामान्य तरीके से सांस लेते हुए 20 से 30 सेकंड तक इसी स्थिति में रहें। इसके बाद धीरे-धीरे वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं। घुटनों में दर्द होने पर या इस मुद्रा में असुविधा महसूस होने पर इसे जबरदस्ती न करें।
भुजंगासन
भुजंगासन को कोबरा पोज भी कहा जाता है। यह पीठ की मांसपेशियों को सक्रिय करने और रीढ़ की गतिशीलता बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसे करने के लिए पेट के बल लेट जाएं और हथेलियों को छाती के दोनों ओर जमीन पर रखें। अब सांस लेते हुए सिर और छाती को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। कोहनियों को हल्का मोड़कर रखें और कंधों को कानों से दूर रखें। ध्यान दें कि शरीर को ऊपर उठाने के लिए कमर पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें। अपनी सुविधा के अनुसार 10 से 15 सेकंड तक इस स्थिति में रहें और फिर धीरे-धीरे नीचे आ जाएं। इसे 3 से 5 बार दोहरा सकते हैं। अगर इस आसन से कमर में दर्द बढ़ता है, तो इसे तुरंत रोक दें।
ताड़ासन
ताड़ासन शरीर की मुद्रा सुधारने और लंबे समय तक बैठने के कारण होने वाली अकड़न से बचने के लिए उपयोगी हो सकता है। इसे करने के लिए सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें। अब दोनों हाथों को ऊपर उठाते हुए हथेलियों को एक-दूसरे के सामने रखें। शरीर को ऊपर की ओर लंबा खींचें और सामान्य तरीके से सांस लेते रहें। अपनी क्षमता के अनुसार एड़ियां उठाकर पंजों पर खड़े हो सकते हैं, लेकिन संतुलन बनाने में परेशानी हो तो एड़ियां जमीन पर ही रखें। 15 से 20 सेकंड तक इस स्थिति में रहने के बाद हाथ नीचे कर लें। इसे 3 से 5 बार दोहराएं। ऑफिस में काम के बीच कुछ मिनट खड़े होकर इस तरह शरीर को स्ट्रेच करने से लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाली जकड़न कम करने में मदद मिल सकती है।
गर्दन के हल्के स्ट्रेच
गर्दन में अकड़न महसूस होने पर हल्के स्ट्रेच करना फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए कुर्सी पर पीठ सीधी करके बैठ जाएं और कंधों को ढीला छोड़ दें। अब धीरे-धीरे सिर को दाईं ओर घुमाएं और कुछ सेकंड रुकने के बाद वापस बीच में लाएं। इसी तरह बाईं ओर भी गर्दन घुमाएं। इसके बाद सिर को हल्का दाईं ओर झुकाएं, जैसे कान को कंधे के पास ले जाने की कोशिश कर रहे हों। यही प्रक्रिया दूसरी ओर दोहराएं। प्रत्येक गतिविधि को 3 से 5 बार आराम से करें। गर्दन को तेजी से घुमाने, जोर से खींचने या हाथों से दबाव डालने से बचें। अगर गर्दन में तेज दर्द, चक्कर या हाथों में झनझनाहट होती है, तो ये स्ट्रेच न करें और चिकित्सकीय सलाह लें।
ऑफिस में काम करते समय रखें ध्यान
योगासन करने के साथ-साथ ऑफिस में बैठने के तरीके पर ध्यान देना भी जरूरी है। काम करते समय पीठ को सहारा दें, पैरों को जमीन पर टिकाकर रखें और कंप्यूटर की स्क्रीन को आंखों के लगभग बराबर ऊंचाई पर रखें। हर 30 से 60 मिनट में कुछ देर खड़े होकर चलें या हल्की स्ट्रेचिंग करें। लगातार कई घंटों तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से बचें। योगासन करते समय सांस सामान्य रखें और शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें। शुरुआत में कम समय तक अभ्यास करें और धीरे-धीरे इसे बढ़ाएं। अगर गर्दन या पीठ का दर्द लगातार बना रहता है, बढ़ रहा है या उसके साथ हाथ-पैरों में कमजोरी, सुन्नपन अथवा झनझनाहट होती है, तो केवल योग पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।)