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Meditation Tips: रोज ध्यान करने से कैसे कम होती है घबराहट? जानिए यह कैसे करता है मन को शांत

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Meditation Tips: घबराहट के समय अक्सर सांस लेने का तरीका भी बदल जाता है। सांस तेज हो सकती है और शरीर में बेचैनी महसूस होने लगती है। ऐसे समय में धीमी और सहज सांस पर ध्यान देना मन को वर्तमान स्थिति पर वापस लाने में मदद कर सकता है।

Meditation
Meditation Tips: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई बार बिना किसी बड़ी वजह के भी मन बेचैन रहने लगता है। छोटी-सी बात बार-बार दिमाग में घूमती रहती है, आने वाले समय को लेकर चिंता होने लगती है और दिल-दिमाग को आराम नहीं मिल पाता। ऐसे में ध्यान यानी मेडिटेशन मन को शांत करने का एक आसान तरीका माना जाता है। रोज कुछ समय शांत बैठकर ध्यान करने से व्यक्ति अपने विचारों पर ध्यान देना और उन्हें संभालना सीख सकता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ध्यान करने से घबराहट और बेचैनी कैसे कम महसूस हो सकती है? क्या कुछ मिनट का ध्यान वास्तव में मन को शांत करने में मदद कर सकता है? आइए जानते हैं...

ध्यान से मन को मिलता है विराम

जब मन लगातार किसी चिंता, काम या समस्या के बारे में सोचता रहता है तो दिमाग को आराम का मौका नहीं मिल पाता। ध्यान के दौरान व्यक्ति कुछ समय के लिए बाहरी चीजों से ध्यान हटाकर अपनी सांस और वर्तमान पल पर ध्यान केंद्रित करता है। इस दौरान बार-बार आने वाले विचारों से उलझने के बजाय उन्हें आने-जाने दिया जाता है। इससे मन को लगातार सोचते रहने के चक्र से थोड़ी राहत मिल सकती है। नियमित अभ्यास के साथ व्यक्ति को अपने विचारों को समझने और उन पर तुरंत प्रतिक्रिया न देने की आदत विकसित होने लगती है।

सांस पर ध्यान देना है आसान तरीका

घबराहट के समय अक्सर सांस लेने का तरीका भी बदल जाता है। सांस तेज हो सकती है और शरीर में बेचैनी महसूस होने लगती है। ऐसे समय में धीमी और सहज सांस पर ध्यान देना मन को वर्तमान स्थिति पर वापस लाने में मदद कर सकता है। ध्यान करते समय आराम से बैठकर अपनी सांस के आने-जाने पर ध्यान दिया जा सकता है। सांस अंदर लेते समय उसका एहसास महसूस करें और फिर धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें। इस दौरान ध्यान भटके तो परेशान होने के बजाय दोबारा सांस पर ध्यान ले आएं।

रोज करने से बनती है आदत

ध्यान का फायदा केवल उसी समय तक सीमित नहीं माना जाता जब आप ध्यान कर रहे हों। नियमित अभ्यास से व्यक्ति अपने मन की स्थिति को पहचानना बेहतर तरीके से सीख सकता है। यही वजह है कि रोज कुछ मिनट ध्यान करने की आदत को ज्यादा उपयोगी माना जाता है। शुरुआत में 5 से 10 मिनट का समय रखा जा सकता है। अभ्यास बढ़ने के साथ इसे अपनी सुविधा के अनुसार बढ़ाया जा सकता है। ध्यान के लिए सुबह का शांत समय या रात को सोने से पहले का समय चुना जा सकता है।

विचारों को रोकना जरूरी नहीं

ध्यान को लेकर अक्सर लोगों को लगता है कि इसमें दिमाग को बिल्कुल खाली रखना होता है। ऐसा जरूरी नहीं है। ध्यान के दौरान विचार आना सामान्य बात है। समस्या तब होती है जब व्यक्ति हर विचार के साथ उलझ जाता है। ध्यान में कोशिश यह रहती है कि विचारों को बिना उनसे लड़ाई किए देखा जाए और फिर ध्यान को वापस सांस या चुने हुए ध्यान के केंद्र पर ले आया जाए। धीरे-धीरे मन को एक जगह टिकाए रखने का अभ्यास बेहतर हो सकता है।

घबराहट के समय क्यों मदद करता है ध्यान

जब किसी बात को लेकर लगातार चिंता होती है तो व्यक्ति का ध्यान बार-बार उसी विषय पर चला जाता है। ध्यान इस लगातार चल रही मानसिक प्रक्रिया से कुछ समय का अंतर बनाने में मदद करता है। जब व्यक्ति अपनी सांस, शरीर या वर्तमान पल पर ध्यान लगाता है तो उसका ध्यान भविष्य की चिंता या पुरानी बातों से हटकर वर्तमान में आ सकता है। इससे बेचैनी कम महसूस होने और मन को कुछ समय के लिए स्थिर करने में मदद मिल सकती है।

शरीर को भी मिलता है आराम

ध्यान के दौरान केवल मन पर ही ध्यान नहीं दिया जाता, बल्कि शरीर की स्थिति पर भी ध्यान दिया जा सकता है। शांत बैठने और सांस पर ध्यान देने से व्यक्ति अपने शरीर में मौजूद तनाव को महसूस कर पाता है। कई लोग ध्यान के दौरान कंधों, चेहरे और शरीर की मांसपेशियों को ढीला छोड़ने का अभ्यास भी करते हैं। इससे शरीर में जमा तनाव को पहचानने और आराम देने में मदद मिल सकती है।

ध्यान करने का सही तरीका

ध्यान के लिए किसी खास जगह या बहुत कठिन विधि की जरूरत नहीं होती। घर में किसी शांत स्थान पर आराम से बैठकर इसकी शुरुआत की जा सकती है। रीढ़ को सहज रूप से सीधा रखें और शरीर को ज्यादा तनाव में न रखें। आंखें बंद करके कुछ देर सामान्य सांस लें। इसके बाद अपना ध्यान सांस के आने और जाने पर लगाएं। मन में विचार आएं तो उन्हें रोकने की कोशिश न करें। बस ध्यान को दोबारा सांस पर ले आएं। शुरुआत में मन बार-बार भटक सकता है। यह सामान्य है। नियमित अभ्यास के साथ कुछ समय तक एकाग्र रहना आसान हो सकता है।

कब करें ध्यान

ध्यान करने का कोई एक निश्चित समय जरूरी नहीं है। सुबह उठने के बाद शांत वातावरण में ध्यान करना कई लोगों को सुविधाजनक लगता है। इसके अलावा रात को सोने से पहले भी कुछ समय ध्यान किया जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि ऐसा समय चुना जाए जब आप बिना जल्दबाजी के कुछ मिनट अपने लिए निकाल सकें। रोज एक ही समय पर ध्यान करने से इसे दिनचर्या का हिस्सा बनाना आसान हो सकता है।

घबराहट लगातार रहे तो ध्यान के साथ मदद लें

ध्यान मन को शांत करने और तनाव से निपटने में मदद कर सकता है, लेकिन अगर घबराहट लगातार बनी रहती है, रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं या इसके साथ बहुत ज्यादा परेशानी महसूस होती है तो केवल ध्यान पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है। ध्यान को रोज की छोटी-सी आदत के रूप में अपनाया जा सकता है। कुछ मिनट शांत बैठना, सांस पर ध्यान देना और विचारों को बिना उलझे देखना धीरे-धीरे मन को अधिक स्थिर रखने का अभ्यास बना सकता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।)

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