Yoga: आजकल लंबे समय तक मोबाइल चलाने, लैपटॉप पर काम करने और गलत तरीके से बैठने के कारण गर्दन और कंधों में दर्द की समस्या आम हो गई है। कई बार लगातार एक ही स्थिति में बैठे रहने से मांसपेशियों में अकड़न, भारीपन और खिंचाव महसूस होने लगता है। सुबह उठने पर गर्दन घुमाने में परेशानी होना या कंधों में दर्द रहना भी इसी समस्या के संकेत हो सकते हैं। ऐसे में नियमित योगाभ्यास मांसपेशियों को आराम देने और शरीर का लचीलापन बढ़ाने में मदद कर सकता है। अगर आप भी गर्दन और कंधों के दर्द से परेशान हैं, तो आइए जानते हैं ऐसे पांच आसान योगाभ्यासों के बारे में, जिन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।
गर्दन घुमाने का अभ्यास
गर्दन की अकड़न दूर करने के लिए गर्दन को धीरे-धीरे घुमाने का अभ्यास किया जा सकता है। इसके लिए सुखासन में बैठ जाएं और पीठ को सीधा रखें। अब गर्दन को धीरे-धीरे दाईं ओर घुमाएं और कुछ सेकंड रुकने के बाद सामान्य स्थिति में लौट आएं। इसके बाद बाईं ओर भी यही प्रक्रिया दोहराएं। ध्यान रखें कि गर्दन को झटके से न घुमाएं और न ही दर्द होने पर जबरदस्ती खिंचाव दें। यह हल्का अभ्यास गर्दन की गतिशीलता बनाए रखने में मदद कर सकता है।
मार्जरी आसान
मार्जरी आसन को कैट पोज भी कहा जाता है। यह रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने और पीठ की अकड़न कम करने में सहायक हो सकता है। इसे करने के लिए हाथों और घुटनों के बल आ जाएं। हथेलियों को कंधों के नीचे और घुटनों को कूल्हों के नीचे रखें। सांस छोड़ते हुए पीठ को धीरे-धीरे ऊपर की ओर गोल करें और गर्दन को सहज स्थिति में रखें। फिर सांस लेते हुए पीठ को सामान्य स्थिति में लाएं। इस अभ्यास को अपनी क्षमता के अनुसार कुछ बार दोहराएं। गर्दन को पीछे की ओर जरूरत से ज्यादा न झुकाएं।
बालासन
बालासन शरीर को आराम देने वाला योगासन है। इसे करने के लिए घुटनों के बल बैठ जाएं और धीरे-धीरे आगे की ओर झुकते हुए माथे को जमीन पर टिकाने का प्रयास करें। दोनों हाथों को सामने की ओर फैलाकर रखें या शरीर के पास आराम से रखें। इस दौरान सामान्य रूप से सांस लेते रहें। कुछ समय इसी स्थिति में रहने के बाद धीरे-धीरे वापस बैठ जाएं। इस आसन से पीठ और कंधों के आसपास तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। यदि घुटनों में दर्द है, तो इसे करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।
गरुड़ासन आर्म स्ट्रेच
कंधों के आसपास खिंचाव महसूस होने पर गरुड़ासन की बांहों वाला अभ्यास उपयोगी हो सकता है। इसे करने के लिए सीधे बैठें या खड़े हो जाएं। दोनों हाथों को सामने लाएं और एक हाथ को दूसरे के ऊपर क्रॉस करें। संभव हो तो हथेलियों को आपस में मिलाएं। अब कोहनियों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं और कंधों को सहज रखें। कुछ सेकंड रुकने के बाद हाथों की स्थिति बदलकर दोबारा अभ्यास करें। इससे कंधों और ऊपरी पीठ के आसपास खिंचाव महसूस हो सकता है। दर्द बढ़ने पर हाथों को जबरदस्ती न खींचें।
ताड़ासन
ताड़ासन शरीर की मुद्रा सुधारने और सीधे खड़े होने की आदत विकसित करने में मदद कर सकता है। इसे करने के लिए पैरों को पास रखकर सीधे खड़े हो जाएं। दोनों हाथों को ऊपर उठाएं और चाहें तो एड़ियों को जमीन से ऊपर उठा सकते हैं। शरीर को बिना तनाव दिए कुछ सेकंड इसी स्थिति में रहें। फिर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लौट आएं। इस अभ्यास के दौरान गर्दन सीधी रखें और कंधों को कानों की ओर न चढ़ाएं। नियमित अभ्यास से शरीर के संतुलन और पोस्चर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
योग करते समय इन बातों का रखें ध्यान
गर्दन और कंधों के दर्द में योग करते समय शरीर की क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है। किसी भी आसन को झटके से न करें और दर्द बढ़ने पर तुरंत रुक जाएं। लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करने के बीच छोटे ब्रेक लें, स्क्रीन को आंखों के स्तर पर रखें और बैठते समय पीठ को सहारा दें। यदि दर्द लगातार बना रहता है, हाथों में झनझनाहट या कमजोरी होती है अथवा दर्द चोट के बाद शुरू हुआ है, तो डॉक्टर से सलाह लें। योग मांसपेशियों को आराम देने में मदद कर सकता है, लेकिन लगातार या गंभीर दर्द के इलाज का विकल्प नहीं है।
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।)