Yoga Tips: आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में कमर दर्द एक आम समस्या बन चुकी है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत मुद्रा में बैठना, भारी वजन उठाना, शारीरिक गतिविधि की कमी और तनाव जैसी वजहों से कमर के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत तेजी से बढ़ रही है। कई लोग दवाइयों का सहारा लेते हैं, लेकिन नियमित रूप से कुछ योगासन करने से कमर की मांसपेशियों को मजबूती मिल सकती है और दर्द में राहत महसूस हो सकती है। योग शरीर को लचीला बनाने के साथ-साथ रीढ़ की हड्डी पर पड़ने वाले दबाव को भी कम करने में मदद करता है। कमर दर्द की स्थिति में ऐसे आसनों का चयन करना चाहिए जो रीढ़ को धीरे-धीरे स्ट्रेच करें और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाएं। आइए जानते हैं ऐसे योगासन, जो कमर दर्द से परेशान लोगों के लिए लाभकारी माने जाते हैं।
भुजंगासन
- पेट के बल सीधा लेट जाएं।
- दोनों हथेलियों को कंधों के पास जमीन पर रखें।
- सांस लेते हुए धीरे-धीरे सिर, गर्दन और छाती को ऊपर उठाएं।
- नाभि तक का हिस्सा जमीन से लगा रहने दें।
- 15–20 सेकंड तक रुकें और सामान्य सांस लें।
- धीरे-धीरे वापस शुरुआती स्थिति में आ जाएं।
फायदे
- रीढ़ की हड्डी को लचीलापन मिलता है।
- कमर और पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
- लोअर बैक में जकड़न कम हो सकती है।
शलभासन
- पेट के बल लेट जाएं।
- दोनों हाथों को शरीर के पास रखें।
- सांस लेते हुए एक या दोनों पैरों को ऊपर उठाएं।
- घुटनों को सीधा रखें।
- 10–15 सेकंड तक रुकें और धीरे से नीचे लाएं।
फायदे
- कमर के निचले हिस्से की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।
- रीढ़ के आसपास के हिस्से में रक्त संचार बेहतर होता है।
- पीठ की थकान कम हो सकती है।
मकरासन
- पेट के बल लेट जाएं।
- दोनों कोहनियों को आगे टिकाएं।
- हथेलियों पर ठुड्डी या गाल रखें।
- आंखें बंद करके शरीर को ढीला छोड़ दें।
- 1-2 मिनट तक इसी स्थिति में रहें।
फायदे
- कमर और पीठ को आराम मिलता है।
- रीढ़ पर पड़ने वाला तनाव कम होता है।
- दर्द और थकान में राहत मिल सकती है।
मार्जारी-व्याघ्रासन
घुटनों और हथेलियों के बल आ जाएं।
सांस लेते हुए पीठ को नीचे की ओर झुकाएं और सिर ऊपर उठाएं।
सांस छोड़ते हुए पीठ को ऊपर की ओर गोल करें और ठुड्डी को छाती से लगाएं।
इस प्रक्रिया को 8–10 बार दोहराएं।
फायदे
- रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ता है।
- कमर की जकड़न कम हो सकती है।
- पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव और आराम दोनों मिलता है।
सेतु बंधासन
- पीठ के बल लेट जाएं।
- घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर रखें।
- सांस लेते हुए कमर और कूल्हों को ऊपर उठाएं।
- हाथों को जमीन पर दबाकर रखें।
- 15–20 सेकंड तक रुकें और धीरे से नीचे आएं।
फायदे
- कमर और कूल्हों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
- रीढ़ को सहारा मिलता है।
- पीठ के निचले हिस्से में राहत मिल सकती है।
बालासन
- वज्रासन में बैठ जाएं।
- सांस छोड़ते हुए शरीर को आगे झुकाएं।
- माथा जमीन पर टिकाएं।
- हाथों को आगे की ओर फैलाएं।
- 30 सेकंड से 1 मिनट तक इसी स्थिति में रहें।
फायदे
- कमर और पीठ को गहरा आराम मिलता है।
- रीढ़ की मांसपेशियों का तनाव कम होता है।
- लंबे समय तक बैठने से होने वाली जकड़न में राहत मिल सकती है।
योग करते समय ध्यान रखने वाली बातें
- किसी भी आसन को झटके से न करें।
- दर्द बढ़ने पर तुरंत रुक जाएं।
- खाली पेट या हल्का भोजन करने के बाद ही योग करें।
- सांस को सामान्य बनाए रखें और रोकने की कोशिश न करें।
- यदि कमर दर्द पुराना है या स्लिप डिस्क जैसी समस्या है तो विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही योग शुरू करें।
कितनी देर करें अभ्यास
कमर दर्द से राहत के लिए शुरुआती लोग प्रतिदिन 15–20 मिनट तक इन योगासनों का अभ्यास कर सकते हैं। धीरे-धीरे समय बढ़ाकर 30 मिनट तक किया जा सकता है। नियमित अभ्यास से पीठ की मांसपेशियों में मजबूती आती है और शरीर की मुद्रा में सुधार होने लगता है।
किन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए
गर्भवती महिलाओं, हाल ही में ऑपरेशन कराने वाले लोगों, गंभीर रीढ़ संबंधी समस्या से पीड़ित मरीजों और तेज दर्द या सूजन की स्थिति वाले लोगों को योग विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेकर ही अभ्यास करना चाहिए। गलत तरीके से किया गया योग लाभ की बजाय परेशानी बढ़ा सकता है।
कमर दर्द की समस्या में नियमित और सही तरीके से किया गया योगासन रीढ़ की हड्डी को सहारा देने वाली मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है। भुजंगासन, शलभासन, मकरासन, मार्जारी-व्याघ्रासन, सेतु बंधासन और बालासन जैसे आसनों का संयमित अभ्यास कमर की जकड़न कम करने और शरीर को अधिक लचीला बनाने में सहायक माना जाता है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।