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Yoga for Immunity: बारिश के मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं ये योगासन, जानें सही तरीका

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Yoga Tips: बारिश के मौसम में ऐसे योगासन चुनना बेहतर होता है जो शरीर को ऊर्जा दें, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाएं और पाचन क्रिया को संतुलित रखें।

Yoga
Yoga Tips: बरसात का मौसम अपने साथ ठंडक और राहत तो लेकर आता है, लेकिन इसी दौरान सर्दी, जुकाम, वायरल संक्रमण और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। मौसम में अचानक बदलाव होने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे समय में संतुलित आहार और पर्याप्त नींद के साथ योग को भी दिनचर्या में शामिल करना फायदेमंद माना जाता है। कुछ योगासन शरीर में रक्त संचार बेहतर करने, तनाव कम करने और श्वसन तंत्र को सक्रिय रखने में मदद कर सकते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम को समर्थन मिलता है।
 
बारिश के मौसम में ऐसे योगासन चुनना बेहतर होता है जो शरीर को ऊर्जा दें, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाएं और पाचन क्रिया को संतुलित रखें। आइए जानते हैं ऐसे प्रमुख योगासनों के बारे में जो मानसून के दौरान रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं।

ताड़ासन से करें दिन की शुरुआत

ताड़ासन देखने में आसान लगता है, लेकिन यह पूरे शरीर को सक्रिय करने वाला मूलभूत योगासन है। इससे शरीर का पोस्चर सुधरता है और रक्त संचार बेहतर होता है।
 
कैसे करें
  • सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों को मिलाएं।
  • हाथों को ऊपर ले जाकर हथेलियों को जोड़ लें।
  • एड़ियों को हल्का ऊपर उठाएं और पूरे शरीर को खिंचाव दें।
  • 10–15 सेकंड तक सामान्य सांस लेते हुए स्थिति बनाए रखें।
संभावित लाभ
  • शरीर में ऊर्जा का संचार
  • मांसपेशियों में खिंचाव
  • रक्त प्रवाह में सुधार

भुजंगासन फेफड़ों को सक्रिय रखने में सहायक

बारिश के मौसम में श्वसन संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। भुजंगासन छाती को फैलाने और फेफड़ों को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है।
 
कैसे करें
  • पेट के बल लेट जाएं।
  • हथेलियों को कंधों के पास रखें।
  • सांस लेते हुए धीरे-धीरे सिर और छाती ऊपर उठाएं।
  • नाभि तक का भाग जमीन पर रहने दें।
  • 15–20 सेकंड तक रुकें और फिर सामान्य स्थिति में आ जाएं।
संभावित लाभ
  • छाती का विस्तार
  • श्वसन क्षमता में सुधार
  • पीठ की मांसपेशियों को मजबूती

सेतु बंधासन से रक्त संचार बेहतर

यह योगासन शरीर के ऊपरी हिस्से में रक्त प्रवाह बढ़ाने में मदद करता है और थकान कम करने में सहायक माना जाता है।
 
कैसे करें
  • पीठ के बल लेट जाएं।
  • घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर रखें।
  • सांस लेते हुए कमर को ऊपर उठाएं।
  • हाथों को जमीन पर दबाए रखें।
  • 20 सेकंड तक स्थिति बनाए रखें।

संभावित लाभ

  • रक्त संचार में सुधार
  • छाती और गर्दन में खिंचाव
  • तनाव कम करने में सहायता

वज्रासन और पाचन का संबंध

मानसून में पाचन संबंधी दिक्कतें आम हो जाती हैं। वज्रासन भोजन के बाद किया जाने वाला प्रमुख योगासन माना जाता है।
 
कैसे करें
  • घुटनों के बल बैठें।
  • एड़ियों पर शरीर का भार रखें।
  • रीढ़ सीधी रखें और हाथ घुटनों पर रखें।
  • 5–10 मिनट तक सामान्य सांस लेते रहें।
संभावित लाभ
  • पाचन क्रिया को समर्थन
  • पेट में भारीपन कम करने में मदद
  • मानसिक शांति

अधोमुख श्वानासन से पूरे शरीर को सक्रियता

यह योगासन शरीर के कई हिस्सों को एक साथ सक्रिय करता है और रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
 
कैसे करें
  • हाथों और घुटनों के बल आएं।
  • कूल्हों को ऊपर उठाते हुए शरीर को उल्टे “V” आकार में लाएं।
  • एड़ियों को जमीन की ओर दबाने का प्रयास करें।
  • 15–20 सेकंड तक रुकें।
संभावित लाभ
  • पूरे शरीर में रक्त प्रवाह बेहतर
  • कंधों और पैरों की मजबूती
  • शरीर में स्फूर्ति

प्राणायाम भी हो सकता है फायदेमंद

योगासनों के साथ कुछ प्राणायाम तकनीकों को भी उपयोगी माना जाता है। विशेष रूप से अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम श्वसन तंत्र को सक्रिय रखने में मदद कर सकते हैं।

अनुलोम-विलोम

एक नासिका से सांस लें और दूसरी से छोड़ें। 5–10 मिनट तक करें।

भ्रामरी प्राणायाम

गहरी सांस लेकर छोड़ते समय मधुमक्खी जैसी ध्वनि निकालें। 5 बार दोहराएं।
 
ये अभ्यास मानसिक तनाव कम करने और सांसों की लय को संतुलित रखने में सहायक माने जाते हैं।

बारिश के मौसम में योग करते समय रखें ये सावधानियां

  • गीली या फिसलन वाली जगह पर योग न करें।
  • हल्के और सूती कपड़े पहनें।
  • खाली पेट या हल्का भोजन करने के 2–3 घंटे बाद योग करें।
  • अगर बुखार, तेज खांसी या गंभीर संक्रमण हो तो डॉक्टर की सलाह लें।
  • शुरुआत में योग प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में अभ्यास करना बेहतर रहता है।

कितनी देर करें अभ्यास?

मानसून में 20–30 मिनट का नियमित अभ्यास पर्याप्त माना जाता है। इसमें 10–15 मिनट योगासन और 5–10 मिनट प्राणायाम शामिल किए जा सकते हैं। नियमितता सबसे महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि कभी-कभार लंबे समय तक अभ्यास करने की तुलना में रोजाना थोड़ी देर योग करना अधिक लाभकारी माना जाता है।


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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

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