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Yoga Benefits: डायबिटीज मरीजों के लिए योग क्यों है फायदेमंद? जानें क्या है सही तरीका

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Diabetes Control: डायबिटीज मरीजों के लिए योग एक प्राकृतिक और सुरक्षित तरीका है, जो शरीर को सक्रिय रखने के साथ-साथ तनाव कम करने और जीवनशैली सुधारने में मदद करता है।
 

Yoga Benefits
Stress Management: डायबिटीज यानी मधुमेह आज के समय में एक आम स्वास्थ्य समस्या बन गई है। यह बीमारी तब होती है जब शरीर में इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो पाता या शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता है। इसके कारण रक्त में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है। डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए दवाइयों के साथ-साथ सही खानपान, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली बहुत जरूरी होती है। इन्हीं उपायों में योग एक प्रभावी तरीका माना जाता है। नियमित रूप से योग करने से शरीर और मन दोनों को फायदा मिलता है और डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

योग शरीर की अंदरूनी कार्यप्रणाली को भी बेहतर बनाने में मदद करता है। योग करने से शरीर में रक्त का संचार बेहतर होता है और मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं। इससे शरीर ग्लूकोज यानी शुगर का उपयोग बेहतर तरीके से कर पाता है। नियमित योग अभ्यास इंसुलिन की संवेदनशीलता को बढ़ाने में सहायक हो सकता है, जिससे रक्त शुगर का स्तर नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

डायबिटीज से पीड़ित लोगों में तनाव भी एक बड़ी समस्या हो सकती है। तनाव के कारण शरीर में ऐसे हार्मोन बनते हैं जो ब्लड शुगर बढ़ा सकते हैं। योग और प्राणायाम तनाव को कम करने में मदद करते हैं, जिससे मानसिक शांति मिलती है और शरीर का संतुलन बेहतर बना रहता है।

कौन से योगासन हैं फायदेमंद?

डायबिटीज के मरीजों के लिए कुछ आसान योगासन लाभदायक माने जाते हैं। इनमें मंडूकासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन, वक्रासन और पश्चिमोत्तानासन जैसे योग शामिल हैं। इन आसनों से पेट के आसपास के अंगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और शरीर की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है। मंडूकासन को डायबिटीज के लिए उपयोगी योगासन माना जाता है क्योंकि यह पेट के हिस्से पर दबाव डालता है और पाचन तंत्र को सक्रिय करने में मदद करता है। 

भुजंगासन शरीर को मजबूत बनाने के साथ-साथ रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाए रखने में सहायक होता है। वहीं वक्रासन शरीर में खिंचाव पैदा करता है और मांसपेशियों को सक्रिय करता है। इसके अलावा प्राणायाम जैसे अनुलोम-विलोम और भ्रामरी भी डायबिटीज मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। ये मन को शांत करने और तनाव कम करने में मदद करते हैं, जिसका सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ता है।

योग करने का सही तरीका 

डायबिटीज मरीजों को योग करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। योग हमेशा किसी विशेषज्ञ की सलाह या प्रशिक्षित योग शिक्षक के मार्गदर्शन में शुरू करना बेहतर होता है, खासकर अगर व्यक्ति लंबे समय से डायबिटीज से पीड़ित है या उसे कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या भी है। योग करने का सबसे अच्छा समय सुबह का माना जाता है। इसे खाली पेट या हल्का भोजन करने के कुछ समय बाद किया जा सकता है। शुरुआत में आसान योगासन करें और धीरे-धीरे अभ्यास का समय बढ़ाएं। शरीर पर ज्यादा दबाव डालने से बचना चाहिए। योग करते समय सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया पर ध्यान देना जरूरी है।

डायबिटीज मरीजों को नियमितता बनाए रखना बहुत जरूरी है। कभी-कभी योग करने से ज्यादा फायदा नहीं मिलता, इसलिए इसे रोजाना अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। लगभग 30 से 45 मिनट का नियमित योग अभ्यास स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

जीवनशैली में बदलाव भी जरूरी

सिर्फ योग करने से ही डायबिटीज पूरी तरह खत्म नहीं होती, लेकिन यह इसे नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। योग के साथ संतुलित आहार लेना, समय पर दवाइयां लेना, पर्याप्त नींद लेना और नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करना भी जरूरी है। डायबिटीज मरीजों को अपने भोजन में हरी सब्जियां, फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ और पौष्टिक चीजों को शामिल करना चाहिए। ज्यादा मीठे और तले हुए भोजन से बचना चाहिए। इसके अलावा रोजाना थोड़ी देर पैदल चलना भी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।

नियमित योग अभ्यास से अच्छी रहेगी सेहत

डायबिटीज मरीजों के लिए योग एक प्राकृतिक और सुरक्षित तरीका है, जो शरीर को सक्रिय रखने के साथ-साथ तनाव कम करने और जीवनशैली सुधारने में मदद करता है। नियमित योग अभ्यास से ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में सहायता मिल सकती है और व्यक्ति खुद को अधिक स्वस्थ महसूस कर सकता है। हालांकि, योग को दवाइयों का विकल्प नहीं समझना चाहिए। सही खानपान, डॉक्टर की सलाह और नियमित योग अभ्यास को अपनाकर डायबिटीज को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

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