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Yoga for Joint Pain: मानसून में बढ़ने वाले जोड़ों के दर्द में राहत देंगे ये योगासन, जानें सही तरीका और लाभ

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Yoga Tips: मानसून में बहुत अधिक जोर लगाने वाले व्यायाम की बजाय ऐसे योगासन बेहतर माने जाते हैं जो जोड़ों पर दबाव कम डालें और धीरे-धीरे उनकी गतिशीलता बढ़ाएं।

Yoga
Yoga Tips: बारिश का मौसम आते ही कई लोगों को घुटनों, टखनों, कंधों और उंगलियों के जोड़ों में दर्द बढ़ने की शिकायत होने लगती है। खासकर जिन लोगों को पहले से गठिया, जॉइंट स्टिफनेस या उम्र से जुड़ी जोड़ों की समस्या है, उनके लिए मानसून का समय कुछ ज्यादा मुश्किल हो सकता है। मौसम में नमी बढ़ने से जोड़ों में अकड़न महसूस होती है और सुबह उठते समय चलने-फिरने में भी परेशानी हो सकती है। ऐसे में हल्के और सही तरीके से किए गए योगासन शरीर को सक्रिय रखने, जोड़ों की जकड़न कम करने और रक्त संचार बेहतर करने में मदद कर सकते हैं।
 
मानसून में बहुत अधिक जोर लगाने वाले व्यायाम की बजाय ऐसे योगासन बेहतर माने जाते हैं जो जोड़ों पर दबाव कम डालें और धीरे-धीरे उनकी गतिशीलता बढ़ाएं। नीचे कुछ ऐसे योगासन बताए जा रहे हैं जो जोड़ों के दर्द में राहत दिलाने में सहायक हो सकते हैं।
 

ताड़ासन

ताड़ासन को योग का आधारभूत आसन माना जाता है। यह शरीर की मुद्रा को सुधारने और पैरों व घुटनों के जोड़ों को सक्रिय करने में मदद करता है।
 
कैसे करें
  • सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें।
  • हाथों को शरीर के पास रखें।
  • धीरे-धीरे दोनों हाथों को ऊपर उठाएं और पंजों के बल खड़े होने की कोशिश करें।
  • कुछ सेकंड तक संतुलन बनाए रखें और सामान्य सांस लेते रहें।
  • फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट आएं।

फायदा- घुटनों में हल्की जकड़न, टखनों की कमजोरी और लंबे समय तक बैठने के कारण होने वाली अकड़न में यह आसन उपयोगी माना जाता है।

वृक्षासन

वृक्षासन संतुलन बढ़ाने के साथ-साथ पैरों के जोड़ों को स्थिरता देने में मदद करता है।
 
कैसे करें
  • सीधे खड़े हो जाएं।
  • दाएं पैर को मोड़कर बाईं जांघ पर रखें।
  • दोनों हाथों को नमस्कार मुद्रा में जोड़ लें।
  • 20 से 30 सेकंड तक संतुलन बनाए रखें।
  • फिर दूसरी तरफ से दोहराएं।
  • यदि संतुलन बनाने में परेशानी हो तो दीवार का सहारा लिया जा सकता है।

भुजंगासन

मानसून में कमर और पीठ के जोड़ों में भी अकड़न बढ़ जाती है। भुजंगासन रीढ़ की लचक बढ़ाने में मदद करता है।
 
कैसे करें
  • पेट के बल लेट जाएं।
  • हथेलियों को कंधों के पास रखें।
  • सांस लेते हुए धीरे-धीरे सिर और छाती को ऊपर उठाएं।
  • कंधों को ढीला रखें और गर्दन पर जोर न डालें।
  • 15 से 20 सेकंड रुककर वापस नीचे आ जाएं।

फायदा-  पीठ, कंधों और रीढ़ के आसपास होने वाली जकड़न में यह आसन राहत दे सकता है।

मार्जरी-बितिलासन

इसे कैट-काउ पोज भी कहा जाता है। यह रीढ़ की हड्डी और कंधों के जोड़ों को धीरे-धीरे सक्रिय करता है।
 
कैसे करें
  • घुटनों और हथेलियों के बल आ जाएं।
  • सांस लेते हुए कमर को नीचे की ओर झुकाएं और सिर ऊपर उठाएं।
  • सांस छोड़ते हुए पीठ को गोल करें और सिर नीचे करें।
  • इस क्रिया को 8 से 10 बार दोहराएं।
फायदा- कंधों, गर्दन और रीढ़ की अकड़न कम करने में यह आसन सहायक हो सकता है।

सेतु बंधासन

यह आसन कमर, कूल्हों और घुटनों के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करता है।
 
कैसे करें
  • पीठ के बल लेट जाएं।
  • घुटनों को मोड़ लें और पैरों को जमीन पर रखें।
  • सांस लेते हुए कूल्हों को ऊपर उठाएं।
  • कंधों और पैरों पर शरीर का भार संतुलित रखें।
  • 20 सेकंड रुकें और फिर धीरे-धीरे नीचे आएं।
फायदा- घुटनों की हल्की कमजोरी और कमर के दर्द में यह आसन उपयोगी माना जाता है।

पवनमुक्तासन

पवनमुक्तासन को जोड़ों की गतिशीलता बढ़ाने वाले योगासनों में शामिल किया जाता है।
 
कैसे करें
  • पीठ के बल लेट जाएं।
  • एक घुटने को मोड़कर छाती की ओर लाएं।
  • दोनों हाथों से घुटने को पकड़ लें।
  • कुछ सेकंड रुकें और फिर दूसरी तरफ से करें।
  •  
फायदा- कूल्हों और घुटनों के जोड़ों की जकड़न कम करने में मदद मिल सकती है।
 

मानसून में योग करते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • योग करने से पहले शरीर को हल्का वार्मअप जरूर दें।
  • ठंडी या गीली जगह पर योग न करें।
  • यदि जोड़ों में सूजन या तेज दर्द हो तो कठिन आसन करने से बचें।
  • सांस को रोककर योग न करें, सामान्य गति से सांस लेते रहें।
  • सुबह या शाम का समय योग के लिए बेहतर माना जाता है।
  • योग मैट सूखा और फिसलन रहित होना चाहिए।
 
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

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