Yoga for Acidity: एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या आजकल अनियमित खानपान, देर रात भोजन करने, तली-भुनी चीजों के अधिक सेवन और तनाव के कारण काफी आम हो गई है। जब पेट में अतिरिक्त अम्ल बनता है तो सीने में जलन, खट्टी डकार, पेट में भारीपन और बेचैनी महसूस हो सकती है। ऐसे में कुछ योगासन पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और पेट में बनने वाले अतिरिक्त गैस व अम्ल के प्रभाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं। योग विशेषज्ञों के अनुसार सही तरीके से किए गए कुछ आसन पेट और डायफ्राम की मांसपेशियों को सक्रिय करते हैं, जिससे पाचन तंत्र को आराम मिल सकता है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि योगासन भोजन करने के तुरंत बाद नहीं करने चाहिए। एसिडिटी की समस्या में हल्का भोजन करने के कम से कम 3 से 4 घंटे बाद योगाभ्यास करना अधिक उपयुक्त माना जाता है।
वज्रासन
एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या में वज्रासन को सबसे उपयोगी आसनों में गिना जाता है। यह एकमात्र ऐसा योगासन माना जाता है जिसे हल्के भोजन के कुछ समय बाद भी किया जा सकता है।
सही तरीका
- घुटनों को मोड़कर एड़ियों पर बैठ जाएं।
- दोनों पैरों के अंगूठे आपस में मिलाएं।
- रीढ़ की हड्डी सीधी रखें।
- हाथों को घुटनों पर रखें और सामान्य सांस लें।
- 5 से 10 मिनट तक करें।
वज्रासन पाचन प्रक्रिया को सक्रिय करने में मदद करता है और भोजन के पाचन को सुचारु बनाने में सहायक माना जाता है। इससे पेट में गैस और भारीपन कम हो सकता है, जो सीने में जलन के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
पवनमुक्तासन
यह आसन पेट में फंसी गैस को बाहर निकालने और पेट के अंदर बनने वाले दबाव को कम करने में मदद कर सकता है।
सही तरीका
- पीठ के बल सीधे लेट जाएं।
- दोनों घुटनों को मोड़कर छाती की ओर लाएं।
- हाथों से घुटनों को पकड़ लें।
- सांस छोड़ते हुए घुटनों को पेट से लगाएं।
- कुछ सेकंड रुकें और फिर सामान्य स्थिति में लौट आएं।
- 3 से 5 बार ये योगासन करें।
यह आसन गैस और पेट फूलने की समस्या में राहत देने में सहायक माना जाता है। जब पेट में दबाव कम होता है तो एसिड ऊपर की ओर आने की संभावना भी कम हो सकती है।
मार्जरी-व्याघ्रासन
कैट-काउ स्ट्रेच के नाम से प्रसिद्ध यह योगासन पेट और रीढ़ के लिए लाभकारी माना जाता है।
सही तरीका
- घुटनों और हथेलियों के बल आ जाएं।
- सांस लेते हुए कमर को नीचे की ओर झुकाएं और सिर ऊपर उठाएं।
- सांस छोड़ते हुए पीठ को गोल करें और ठुड्डी को छाती की ओर लाएं।
- धीरे-धीरे इस क्रिया को दोहराएं।
8 से 10 चक्र करें। यह अभ्यास पेट के आसपास रक्त संचार बढ़ाने और पाचन अंगों को सक्रिय करने में मदद कर सकता है।
बालासन
सीने में जलन के साथ बेचैनी या तनाव महसूस हो तो बालासन उपयोगी माना जाता है।
सही तरीका
- घुटनों के बल बैठ जाएं।
- एड़ियों पर बैठते हुए शरीर को आगे की ओर झुकाएं।
- हाथों को सामने फैलाएं।
- माथे को जमीन पर टिकाएं।
- धीरे-धीरे सांस लेते रहें।
1 से 3 मिनट तक करें। यह आसन पेट और डायफ्राम पर हल्का दबाव बनाकर शरीर को आराम देने में मदद कर सकता है।
अर्धमत्स्येन्द्रासन
यह बैठकर किया जाने वाला मरोड़ वाला आसन है, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है।
सही तरीका
- दोनों पैर सामने फैलाकर बैठें।
- दाएं पैर को मोड़कर बाएं घुटने के बाहर रखें।
- बाएं हाथ को दाएं घुटने पर टिकाएं।
- शरीर को धीरे-धीरे दाईं ओर मोड़ें।
- कुछ सेकंड रुककर दूसरी तरफ दोहराएं।
प्रत्येक ओर 20 से 30 सेकंड। मरोड़ वाले आसन पेट के अंगों को हल्का संकुचन और खिंचाव देते हैं, जिससे पाचन तंत्र सक्रिय हो सकता है।
यह भी पढ़ें:-
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।