Meditation Tips: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बहुत से लोग मानसिक शांति और तनाव से राहत पाने के लिए ध्यान यानी मेडिटेशन का सहारा लेते हैं। लेकिन जैसे ही आंखें बंद करके ध्यान लगाने बैठते हैं, मन कभी पुराने किस्सों में पहुंच जाता है तो कभी आने वाले कामों की चिंता करने लगता है। कई बार तो कुछ मिनट भी शांत बैठना मुश्किल लगता है। ऐसे में मन के भटकने की वजह क्या है? क्या ध्यान लगाते समय विचारों का आना गलत है और मन को धीरे-धीरे एकाग्र कैसे किया जा सकता है? आइए जानते हैं ध्यान के दौरान मन के भटकने की वजह और उसे एकाग्र करने का आसान तरीका।
मन क्यों भटकता है?
ध्यान के दौरान मन का भटकना एक सामान्य बात है। हमारा दिमाग लगातार किसी न किसी चीज के बारे में सोचने का आदी होता है। दिनभर काम, बातचीत, मोबाइल, सोशल मीडिया और दूसरी जिम्मेदारियों के बीच दिमाग में कई तरह की बातें चलती रहती हैं। जब हम अचानक शांत बैठते हैं तो वही विचार सामने आने लगते हैं। यही वजह है कि ध्यान शुरू करते ही कभी किसी पुराने व्यक्ति की याद आती है, कभी ऑफिस का काम याद आता है तो कभी आने वाले दिनों की चिंता होने लगती है। इसका मतलब यह नहीं है कि आप ध्यान करने में असफल हो रहे हैं।
विचारों को रोकना जरूरी नहीं
ध्यान करते समय सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग मन में आने वाले हर विचार को जबरदस्ती रोकने की कोशिश करते हैं। इससे मन और ज्यादा सक्रिय हो सकता है। ध्यान का उद्देश्य विचारों को पूरी तरह खत्म करना नहीं, बल्कि उनके बीच खुद को शांत रखना सीखना है। जब कोई विचार आए तो उसे पहचानें और बिना उस पर ज्यादा ध्यान दिए वापस अपने ध्यान के केंद्र पर लौट आएं।
सांस पर ध्यान लगाएं
शुरुआत करने वालों के लिए सांस पर ध्यान लगाना आसान तरीका माना जाता है। आराम से बैठकर अपनी सामान्य सांसों पर ध्यान दें। सांस अंदर जा रही है और बाहर आ रही है, बस इस प्रक्रिया को महसूस करें। अगर ध्यान किसी दूसरी बात पर चला जाए तो परेशान न हों। जैसे ही आपको इसका एहसास हो, धीरे से अपना ध्यान वापस सांसों पर ले आएं। बार-बार ऐसा करना ही एकाग्रता का अभ्यास है।
शुरुआत कम समय से करें
कई लोग पहली बार ध्यान शुरू करते ही 20-30 मिनट तक बैठने की कोशिश करते हैं। इससे बेचैनी बढ़ सकती है और ध्यान के प्रति रुचि कम होने लगती है। शुरुआत में 5 से 10 मिनट का समय पर्याप्त रखा जा सकता है। जब मन धीरे-धीरे इस अभ्यास का आदी होने लगे तो समय बढ़ाया जा सकता है। ध्यान में लंबे समय तक बैठने से ज्यादा जरूरी नियमित रूप से अभ्यास करना है।
एक शांत जगह चुनें
ध्यान के लिए ऐसी जगह चुनें जहां बार-बार शोर या किसी तरह की रुकावट न हो। कमरे का कोई शांत कोना इसके लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। ध्यान के समय मोबाइल को साइलेंट या दूर रखना भी मददगार हो सकता है। बार-बार नोटिफिकेशन देखने की आदत मन को एकाग्र होने से रोक सकती है।
एक समय तय करें
अगर आप रोज अलग-अलग समय पर ध्यान करेंगे तो इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है। इसलिए कोशिश करें कि रोज लगभग एक ही समय पर ध्यान करें। सुबह का शांत समय कई लोगों को सुविधाजनक लगता है, जबकि कुछ लोग रात में सोने से पहले ध्यान करना पसंद करते हैं। अपने लिए ऐसा समय चुनें जब आप बिना जल्दबाजी के कुछ मिनट शांत बैठ सकें।
मन भटके तो खुद को न कोसें
ध्यान के दौरान मन भटकने पर कई लोग खुद से नाराज होने लगते हैं। उन्हें लगता है कि उनका मन बहुत चंचल है और वे ध्यान नहीं कर सकते। जबकि मन का भटकना ध्यान की प्रक्रिया का ही हिस्सा है। जब भी ध्यान टूटे, बस यह समझें कि अब मन किसी दूसरी चीज पर चला गया है। इसके बाद धीरे से अपना ध्यान वापस सांस, मंत्र या जिस चीज पर ध्यान लगा रहे हैं, उस पर ले आएं।
एकाग्रता के लिए मंत्र का सहारा
अगर सांस पर ध्यान लगाना मुश्किल लगता है तो किसी सरल मंत्र या शब्द को ध्यान का केंद्र बनाया जा सकता है। मंत्र का धीरे-धीरे मानसिक जाप करते हुए उसके उच्चारण और अर्थ पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। इससे मन को एक निश्चित आधार मिलता है और बार-बार भटकने के बाद उसे वापस लाना आसान हो सकता है।
ध्यान में जल्दबाजी न करें
ध्यान कोई ऐसी प्रक्रिया नहीं है जिसका परिणाम एक-दो दिन में दिखाई देने लगे। शुरुआत में मन का बार-बार भटकना बिल्कुल सामान्य है। नियमित अभ्यास के साथ व्यक्ति अपने विचारों को पहचानना और उनसे तुरंत प्रभावित हुए बिना वापस ध्यान केंद्रित करना सीख सकता है, इसलिए ध्यान करते समय लक्ष्य यह नहीं होना चाहिए कि दिमाग में एक भी विचार न आए। असली अभ्यास यह है कि जब मन भटके तो उसे पहचानकर शांत तरीके से वापस वर्तमान क्षण में लाया जाए।
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।)