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Meditation Tips: ध्यान करते समय आंखों के बीच क्यों महसूस होता है दबाव? जानें इसके पीछे की वजह और महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Meditation Tips: जब कोई व्यक्ति ध्यान करने बैठता है तो वह अपना ध्यान सांस, किसी मंत्र या किसी एक बिंदु पर केंद्रित करने की कोशिश करता है। इस दौरान चेहरे और आंखों के आसपास की मांसपेशियों में हल्का तनाव आ सकता है। 

Meditation Tips
Meditation Tips: ध्यान करते समय कई लोगों को आंखें बंद करने के कुछ देर बाद भौंहों के बीच, यानी दोनों आंखों के ठीक मध्य हिस्से में हल्का दबाव, खिंचाव या भारीपन महसूस होता है। शुरुआत में यह अनुभव थोड़ा अजीब लग सकता है और मन में सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? क्या यह ध्यान का सामान्य अनुभव है या शरीर किसी तरह का संकेत दे रहा है? क्या इसका संबंध एकाग्रता से है? आइए जानते हैं ध्यान के दौरान आंखों के बीच महसूस होने वाले दबाव की संभावित वजह और इसका महत्व...

ध्यान के दौरान बढ़ता है फोकस

जब कोई व्यक्ति ध्यान करने बैठता है तो वह अपना ध्यान सांस, किसी मंत्र या किसी एक बिंदु पर केंद्रित करने की कोशिश करता है। इस दौरान चेहरे और आंखों के आसपास की मांसपेशियों में हल्का तनाव आ सकता है। खासकर जब व्यक्ति बहुत ज्यादा एकाग्र होने की कोशिश करता है तो अनजाने में भौंहों के बीच की मांसपेशियां सिकुड़ सकती हैं। इससे उस हिस्से में दबाव या खिंचाव जैसा महसूस हो सकता है।

आंखों पर ज्यादा जोर भी वजह

ध्यान करते समय आंखें बंद होने के बावजूद कई लोग किसी चीज को देखने या भौंहों के बीच ध्यान लगाने की कोशिश करते हैं। अगर ऐसा करते समय आंखों को ऊपर की ओर या भौंहों के बीच टिकाने की कोशिश की जाए, तो आंखों के आसपास की मांसपेशियों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है। लंबे समय तक ऐसा करने पर भारीपन या हल्का दर्द भी महसूस हो सकता है।

तीसरी आंख से जोड़कर देखते हैं आध्यात्मिक परंपराएं

आध्यात्मिक और योग परंपराओं में भौंहों के बीच के स्थान को आज्ञा चक्र से जोड़ा जाता है। इसे कई परंपराओं में ध्यान, अंतर्दृष्टि और एकाग्रता का केंद्र माना गया है। इसी वजह से ध्यान के दौरान इस स्थान पर होने वाली संवेदनाओं को साधना से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, आध्यात्मिक मान्यताओं और शरीर में होने वाली वास्तविक शारीरिक संवेदनाओं को अलग-अलग समझना जरूरी है। केवल इस स्थान पर दबाव महसूस होना किसी विशेष आध्यात्मिक अवस्था का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

सांस पर ध्यान देते समय भी हो सकता है अनुभव

कई बार ध्यान के दौरान व्यक्ति अपनी सांसों पर बहुत अधिक ध्यान लगाने लगता है। सांस को नियंत्रित करने, बहुत गहरी सांस लेने या उसे रोककर रखने की कोशिश करने से शरीर में अलग तरह की संवेदनाएं पैदा हो सकती हैं। ऐसे में माथे या आंखों के बीच दबाव महसूस होना संभव है।

ध्यान करते समय क्या करें?

अगर ध्यान के दौरान आंखों के बीच हल्का दबाव महसूस हो तो सबसे पहले अपने चेहरे को ढीला छोड़ें। भौंहों को सिकोड़कर न रखें और आंखों को बंद करने के लिए ज्यादा जोर न लगाएं। सांस को सामान्य रखें और उसे जबरदस्ती नियंत्रित करने की कोशिश न करें। ध्यान का मतलब किसी एक बिंदु पर जबरन ध्यान टिकाना नहीं है। अगर आंखों के बीच दबाव बढ़ने लगे तो ध्यान को वापस सांसों की सामान्य गति पर ले जाना बेहतर होता है।

कब सावधान होना चाहिए?

हल्का दबाव या कुछ समय के लिए भारीपन सामान्य रूप से चिंता की बात नहीं होती, लेकिन अगर ध्यान के दौरान तेज दर्द, लगातार सिरदर्द, आंखों में दर्द, धुंधला दिखाई देना, चक्कर या अन्य परेशानी महसूस हो तो इसे केवल ध्यान का प्रभाव मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में ध्यान रोककर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

ध्यान के दौरान आंखों के बीच दबाव महसूस होना कई कारणों से हो सकता है। यह एकाग्रता के दौरान चेहरे की मांसपेशियों में तनाव, आंखों पर पड़ने वाले अनावश्यक जोर या सांस लेने के तरीके से जुड़ा हो सकता है। वहीं आध्यात्मिक परंपराओं में इस स्थान को आज्ञा चक्र से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए इस अनुभव को समझते समय शारीरिक और आध्यात्मिक दोनों पहलुओं को अलग-अलग नजरिए से देखना जरूरी है।





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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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