facebook pixel
विज्ञापन
Home  mythology  ramayana mythological story maa sita se pahli bar kaha mile the shri ram swayamvar se pahle kb hui mulakat

Lord Ram-Maa Sita: मां सीता से पहली बार कहां मिले थे श्रीराम? पढ़ें स्वयंवर से पहले हुई भेंट की पौराणिक कथा

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
साक्षी साह
सार

Ramayana: विश्वामित्र ने श्रीराम और लक्ष्मण को मिथिला नगरी ले जाने का निर्णय लिया। मिथिला जनकपुर के नाम से प्रसिद्ध थी, जहां राजा जनक शासन करते थे। जनक एक विद्वान और धर्मात्मा राजा थे। 

Ramayana
Ramayana: हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं में रामायण एक ऐसा महाकाव्य है, जो न केवल भक्ति और धर्म का प्रतीक है, बल्कि प्रेम, त्याग और आदर्श जीवन का भी दर्पण है। श्रीराम और मां सीता की जोड़ी को मर्यादा पुरुषोत्तम और आदर्श नारी का प्रतीक माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्रीराम और सीता की पहली मुलाकात स्वयंवर से बहुत पहले हुई थी? जी हां, यह मुलाकात जनकपुर की पुष्प वाटिका में हुई, जहां विश्वामित्र ऋषि के साथ मिथिला आए श्रीराम और लक्ष्मण ने सीता को पहली बार देखा। यह कथा वाल्मीकि रामायण के बालकांड में वर्णित है। आइए, इस पौराणिक कथा को शुरू से समझते हैं और जानते हैं कि कैसे यह सब आरंभ हुआ...

राजा दशरथ के चारों पुत्र की शिक्षा

कथा की शुरुआत त्रेता युग से होती है, जब पृथ्वी पर राक्षसों का आतंक बढ़ता जा रहा था। राजा दशरथ अयोध्या के शासक थे, जिनके चार पुत्र थे- राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न। राम और लक्ष्मण सबसे बड़े और जुड़वां थे, लेकिन राम का जन्म सबसे पहले हुआ था। इनकी शिक्षा गुरु वशिष्ठ से हो रही थी, लेकिन एक दिन महर्षि विश्वामित्र अयोध्या पहुंचे। विश्वामित्र एक महान तपस्वी थे, जो यज्ञ करते समय राक्षसों से पीड़ित थे। उन्होंने राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने की प्रार्थना की, ताकि वे यज्ञ की रक्षा कर सकें। दशरथ पहले तो घबराए, क्योंकि राम और लक्ष्मण अभी बालक थे, लेकिन गुरु वशिष्ठ के समझाने पर उन्होंने सहमति दे दी।
राम की शिक्षाएँ और उपदेश

ताड़का वध और यज्ञ रक्षा

विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को लेकर वन की ओर प्रस्थान करते हैं। रास्ते में वे ताड़का वन पहुंचते हैं, जहां ताड़का नामक राक्षसी का आतंक था। विश्वामित्र राम को धनुष-बाण चलाना सिखाते हैं और विभिन्न दिव्य अस्त्रों का ज्ञान देते हैं। राम ने ताड़का का वध किया, जिससे क्षेत्र शांत हुआ। इसके बाद वे सिद्धाश्रम पहुंचे, जहां विश्वामित्र का यज्ञ चल रहा था। यहां सुबाहु और मारीच जैसे राक्षसों ने हमला किया, लेकिन राम और लक्ष्मण ने उन्हें परास्त कर दिया। राम ने मारीच को इतनी दूर फेंका कि वह लंका तक पहुंच गया। यज्ञ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

सीता स्वयंवर का आयोजन

यज्ञ के बाद विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण को मिथिला नगरी ले जाने का निर्णय लिया। मिथिला जनकपुर के नाम से प्रसिद्ध थी, जहां राजा जनक शासन करते थे। जनक एक विद्वान और धर्मात्मा राजा थे। विश्वामित्र का उद्देश्य था कि राम शिव धनुष को देखें, जो जनक के पास था। यह धनुष भगवान शिव का था, जो परशुराम को मिला और फिर जनक को मिला। जनक ने घोषणा की थी कि जो भी इस धनुष को उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वही उनकी पुत्री सीता से विवाह करेगा। सीता कोई साधारण कन्या नहीं थीं। वे धरती की पुत्री थीं, जो राजा जनक को खेत जोतते समय एक स्वर्णिम संदूक में मिली थीं, इसलिए उन्हें सीता कहा गया। जनक ने उन्हें अपनी पुत्री मानकर पाला और उनका स्वयंवर रखा।

मिथिला में श्रीराम का आगमन

विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को लेकर जनकपुर पहुंचे। शहर की शोभा देखते ही बनती थी। चारों ओर उत्सव का माहौल था, क्योंकि स्वयंवर नजदीक था। विभिन्न राज्यों के राजकुमार आए हुए थे, जो धनुष तोड़ने की उम्मीद रखते थे। विश्वामित्र को राजा जनक ने आदरपूर्वक आमंत्रित किया और उन्हें आश्रम में ठहराया। राम और लक्ष्मण भी उनके साथ थे। अगले दिन सुबह, विश्वामित्र ने राम और मिथिला राज्य घुमाने का निर्णय लिया। वे पुष्प वाटिका की ओर गए, जो जनकपुर की सबसे सुंदर जगह थी। यह वाटिका फूलों से भरी हुई थी- कमल, गुलाब, चंपा, जूही और अन्य सुगंधित पुष्प। पक्षी चहचहा रहे थे और हवा में मधुर सुगंध फैली हुई थी।
Ramayana

श्रीराम और मां सीता की पहली मुलाकात

इसी वाटिका में सीता अपनी सखियों के साथ घूम रही थीं। सीता उस समय किशोरी थीं, लेकिन उनकी सुंदरता अलौकिक थी। वे सफेद वस्त्रों में थीं और उनके बाल खुले हुए थे। सखियां फूल तोड़ रही थीं और सीता मां पार्वती के मंदिर की ओर जा रही थीं। मंदिर वाटिका के बीच में था। उधर, रामजी और लक्ष्मण विश्वामित्र के साथ वाटिका में प्रवेश करते हैं। राम जी की दृष्टि सीता पर पड़ती है। राम, जो अब तक वन में राक्षसों से लड़ते आए थे, पहली बार किसी कन्या को इतने ध्यान से देखते हैं। सीता मां भी राम को देखती हैं। दोनों की नजरें मिलती हैं और पल भर में दोनों के हृदय में प्रेम का बीज अंकुरित हो जाता है।

यह पहली मुलाकात थी। राम जी, मां सीता की सुंदरता, शालीनता और दिव्य तेज से प्रभावित होते हैं। वहीं मां सीता, भगवान राम की वीरता, सौम्यता और दिव्य रूप पर मोहित हो जाती हैं, लेकिन दोनों कुछ बोल नहीं पाते। इसके बाद मां सीता सखियों के साथ मंदिर पहुंचती हैं। वहां वे मां पार्वती की पूजा करती हैं और प्रार्थना करती हैं। मां सीता ने मन ही मन राम को अपना पति मान लिया था। साथ ही उन्होंने मां पार्वती की पूजा कर श्रीराम को अपने पति के रूप में पाने की कामना की।

श्रीराम ने तोड़ा शिव धनुष

मां पार्वती सीता की भक्ति से प्रसन्न होती हैं और आशीर्वाद देती हैं कि उनका मनोरथ पूर्ण होगा। सीता की सखियां यह सब देखती हैं और उत्साहित होती हैं। अगले दिन स्वयंवर का आयोजन होता है। जनकपुर का राजमहल सजा हुआ था। विभिन्न राजकुमार और राजा आए। सभी धनुष देखने जाते हैं। कई राजकुमार धनुष को हिलाने का प्रयास करते हैं, लेकिन असफल रहते हैं। कुछ तो चोटिल हो जाते हैं। अंत में जनक उदास होकर कहते हैं कि क्या पृथ्वी पर कोई वीर नहीं बचा जो यह धनुष तोड़ सके। विश्वामित्र रामजी को इशारा करते हैं। रामजी उठते हैं और धनुष की ओर जाते हैं। श्रीराम धनुष को आसानी से उठाते हैं, प्रत्यंचा चढ़ाते हैं और खींचते ही धनुष टूट जाता है। ध्वनि इतनी तेज होती है कि पूरा जनकपूर कांप उठता है।

परशुराम का आगमन

जनक प्रसन्न होते हैं और राम को विजेता घोषित करते हैं, लेकिन परशुराम क्रोधित होकर आते हैं, क्योंकि धनुष उनका था। वे राम से युद्ध की चुनौती देते हैं। राम शांतिपूर्वक उनका सम्मान करते हैं और अपने धनुष से उन्हें शांत कर देते हैं। परशुराम समझ जाते हैं कि राम विष्णु अवतार हैं और आशीर्वाद देकर चले जाते हैं। अब विवाह की तैयारी शुरू होती है। दशरथ अयोध्या से आते हैं। चार भाइयों का विवाह होता है- राम जी का सीता मां के साथ, लक्ष्मण का उर्मिला से, भरत से मांडवी का और शत्रुघ्न के साथ श्रुतकीर्ति का विवाह होता है। विवाह उत्सव कई दिनों तक चलता है।

यह भी पढ़ें:-

Rishyasringa Story: कौन थे ऋष्यशृंग? जिनके पुत्रकामेष्टि यज्ञ से राजा दशरथ को हुई संतान प्राप्ति? 

Ramayana Story: कैसे और कब हुआ था श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म? जानें पौराणिक कथा 


(इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel