Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के स्नेह और रक्षा के संकल्प से जुड़ा हुआ है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। रक्षाबंधन से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं धर्मग्रंथों और लोक परंपराओं में मिलती हैं। इन्हीं में एक कथा सूर्यदेव के पुत्र यमराज और उनकी बहन यमुना की भी है। इस कथा में यमुना द्वारा अपने भाई यमराज को राखी बांधने और यमराज द्वारा बहन के प्रेम का मान रखने का वर्णन मिलता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यमराज और यमुना भाई-बहन थे। यमुना अपने भाई यमराज से बहुत स्नेह करती थीं और चाहती थीं कि वे उनके घर आकर उनसे मिलें। लेकिन यमराज अपने कार्यों में इतने व्यस्त रहते थे कि लंबे समय तक बहन यमुना के घर नहीं जा सके। यमुना को अपने भाई के आने की प्रतीक्षा रहती थी।
भाई यमराज के घर आने की प्रतीक्षा करती थीं यमुना
पौराणिक कथा के अनुसार, यमुना अपने भाई यमराज से मिलने के लिए हमेशा उत्सुक रहती थीं। वह चाहती थीं कि एक दिन उनके भाई उनके घर आएं और वह उनका विधि-विधान से स्वागत करें। यमुना ने कई बार मन ही मन अपने भाई के आने की कामना की, लेकिन यमराज अपने दायित्वों के कारण उनके घर नहीं पहुंच पाए।
कहा जाता है कि यमराज मृत्यु के देवता हैं और उन्हें प्राणियों के कर्मों का लेखा-जोखा देखने तथा उनके कर्मों के अनुसार न्याय करने का दायित्व प्राप्त है। इसी कारण उनके पास अपने लिए समय निकालना कठिन होता था। यमुना को अपने भाई से मिलने की इच्छा थी, लेकिन वह उनकी व्यस्तता को भी समझती थीं। आखिरकार एक दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे। भाई को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने अपने भाई का प्रेमपूर्वक स्वागत किया और उनके लिए भोजन तैयार किया।
यमुना ने भाई यमराज का किया स्वागत
यमुना ने यमराज के घर आने पर पूरे विधि-विधान से उनका स्वागत किया। उन्होंने अपने भाई के लिए विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए और उन्हें आदरपूर्वक भोजन कराया। इसके बाद यमुना ने यमराज की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। रक्षा सूत्र बांधते समय यमुना ने अपने भाई की मंगलकामना की और उनके सुखी रहने की प्रार्थना की। भाई के प्रति बहन का यह स्नेह देखकर यमराज प्रसन्न हुए। उन्होंने यमुना से कहा कि वह उनसे कोई वर मांग सकती हैं। यमुना ने अपने भाई से ऐसा वर मांगा, जो उनके प्रति उनके स्नेह और सभी भाइयों के लिए मंगलकामना से जुड़ा था। उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि जो भाई अपनी बहन के घर जाकर प्रेमपूर्वक उससे राखी बंधवाए और बहन का सम्मान करे, उसे यमराज का भय न रहे।
यमराज ने दिया यमुना को वरदान
यमराज अपनी बहन यमुना की बात सुनकर प्रसन्न हुए और उन्होंने उन्हें वरदान दिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यमराज ने कहा कि जो भाई रक्षाबंधन के अवसर पर अपनी बहन से राखी बंधवाएगा और उसके घर जाकर उसका आतिथ्य स्वीकार करेगा, उसे उनका भय नहीं रहेगा। इसी कथा के आधार पर रक्षाबंधन के पर्व के साथ यमराज और यमुना का संबंध भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि बहन के हाथों से रक्षा सूत्र बंधवाने और उसके प्रेमपूर्वक सत्कार को स्वीकार करने से भाई को यमराज का भय नहीं रहता। यमराज ने अपनी बहन यमुना के स्नेह से प्रसन्न होकर उन्हें यह वरदान दिया था। इसी वजह से इस कथा में राखी को केवल भाई की कलाई पर बांधे जाने वाले धागे के रूप में नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच धार्मिक और पारिवारिक संबंध के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
यमुना के नाम से जुड़ा है यम द्वितीया का पर्व
यमराज और यमुना से जुड़ी एक अन्य प्रमुख धार्मिक परंपरा यम द्वितीया की है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाने वाला यह पर्व भाई दूज के नाम से प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन यमुना ने अपने भाई यमराज का आतिथ्य किया था। कथा के अनुसार, यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे थे। यमुना ने उनका स्वागत किया, उन्हें भोजन कराया और उनका आदर-सत्कार किया।
यमराज अपनी बहन से प्रसन्न हुए और उन्होंने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर उसके हाथ से भोजन करेगा और बहन का सम्मान करेगा, उसे यम का भय नहीं रहेगा। रक्षाबंधन की कथा में भी यमराज और यमुना के बीच यही भाई-बहन का स्नेह दिखाई देता है।
राखी से क्यों जोड़ी जाती है यमराज और यमुना की कथा