Raksha Bandhan Mythological Story: रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के स्नेह और रक्षा के संकल्प से जुड़ा हुआ है, लेकिन हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं में रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा से जुड़ी एक प्राचीन कथा देवराज इंद्र और उनकी पत्नी इंद्राणी से भी मिलती है। इस कथा का संबंध देवताओं और असुरों के बीच हुए एक भयंकर युद्ध से बताया जाता है। जब युद्ध में देवताओं की स्थिति कमजोर पड़ने लगी और देवराज इंद्र स्वयं संकट में घिर गए, तब इंद्राणी ने उनकी कलाई पर एक पवित्र रक्षा सूत्र बांधा था। मान्यता है कि इस रक्षा सूत्र के बाद इंद्र को युद्ध में विजय प्राप्त हुई।
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित इस प्रसंग को रक्षाबंधन से जुड़ी प्राचीन कथाओं में महत्वपूर्ण माना जाता है। आखिर वह कौन-सा युद्ध था, जिसमें इंद्र संकट में पड़ गए थे और इंद्राणी ने उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र क्यों बांधा? आइए जानते हैं इस पूरी पौराणिक कथा को...
देवताओं और असुरों के बीच हुआ भयंकर युद्ध
पौराणिक कथा के अनुसार एक समय देवताओं और असुरों के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया था। इस युद्ध में देवराज इंद्र देवताओं की सेना का नेतृत्व कर रहे थे। असुरों की शक्ति बहुत अधिक थी और युद्ध लगातार लंबा होता जा रहा था। दोनों पक्षों के बीच कई दिनों तक घमासान युद्ध हुआ। युद्ध के दौरान असुरों का पलड़ा भारी पड़ने लगा। देवताओं की सेना लगातार कमजोर होती जा रही थी और देवराज इंद्र के सामने भी बड़ा संकट खड़ा हो गया था। इंद्र अपने अस्त्र-शस्त्र और पूरी शक्ति के साथ युद्ध कर रहे थे, लेकिन असुरों के प्रबल प्रतिरोध के कारण देवताओं के लिए विजय प्राप्त करना कठिन होता जा रहा था।
कथा के अनुसार जब इंद्र को लगा कि युद्ध की स्थिति उनके पक्ष में नहीं है, तब उन्होंने देवगुरु बृहस्पति से इस संकट का समाधान पूछा। उस समय देवताओं के बीच भी चिंता का वातावरण था और सभी इंद्र की विजय के लिए प्रार्थना कर रहे थे। देवगुरु बृहस्पति ने रक्षा सूत्र का उपाय बताया। देवगुरु बृहस्पति ने इंद्र के लिए रक्षा सूत्र से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान में भूमिका निभाई। धार्मिक मान्यता के अनुसार मंत्रोच्चार और पूजा के बाद रक्षा सूत्र को पवित्र किया गया।
इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर बांधा रक्षा सूत्र
पौराणिक कथा के अनुसार, इंद्र की पत्नी इंद्राणी को जब अपने पति के संकट में होने का पता चला तो उन्होंने उनकी रक्षा के लिए विशेष अनुष्ठान किया। इंद्राणी ने विधि-विधान से पूजा की और मंत्रों से अभिमंत्रित एक पवित्र रक्षा सूत्र तैयार किया। इसके बाद इंद्राणी ने वह रक्षा सूत्र देवराज इंद्र की कलाई पर बांधा। उन्होंने भगवान से इंद्र की रक्षा और युद्ध में उनकी विजय की प्रार्थना की। यह रक्षा सूत्र केवल एक धागा नहीं था, बल्कि धार्मिक विधि और मंत्रों से पवित्र किया गया सूत्र माना गया। कथा के अनुसार इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते समय उनकी मंगलकामना की और देवताओं की विजय के लिए प्रार्थना की। इसके बाद इंद्र पुनः युद्धभूमि में गए।
रक्षा सूत्र बांधने के बाद युद्ध में बदली स्थिति
पौराणिक मान्यता के अनुसार इंद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधे जाने के बाद युद्ध की स्थिति बदलने लगी। देवताओं ने अपनी शक्ति के साथ असुरों का सामना किया और अंततः देवराज इंद्र को विजय प्राप्त हुई। कहा जाता है कि इंद्राणी द्वारा बांधा गया वह रक्षा सूत्र इंद्र के लिए मंगल और सुरक्षा का प्रतीक बना। युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद देवताओं के बीच इस रक्षा सूत्र की धार्मिक महत्ता और भी बढ़ गई।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)