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Raksha Bandhan: द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की उंगली पर क्यों बांधा था कपड़ा? जानें रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथा

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Raksha Bandhan: द्रौपदी द्वारा बांधे गए कपड़े को सामान्य कपड़ा नहीं, बल्कि उनके स्नेह और अपनत्व का प्रतीक माना गया। कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण ने उस समय द्रौपदी से कहा कि वह उनके इस स्नेह का ऋण जरूर चुकाएंगे और हमेशा उनकी रक्षा करेंगे। 

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Raksha Bandhan: रक्षाबंधन का त्योहार आते ही भाई-बहन के रिश्ते की कई कहानियां याद आती हैं। इनमें महाभारत से जुड़ी द्रौपदी और श्रीकृष्ण की कथा भी काफी प्रचलित है। मान्यता है कि एक बार श्रीकृष्ण की उंगली पर चोट लगने से खून निकल आया था। यह देखकर द्रौपदी ने बिना देर किए अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। इसके बाद श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा का वचन दिया था, लेकिन आखिर श्रीकृष्ण की उंगली पर चोट कैसे लगी थी? द्रौपदी ने उस समय अपनी साड़ी का कपड़ा ही क्यों बांधा और इस घटना का रक्षाबंधन से क्या संबंध माना जाता है? क्या आपको पता है कि महाभारत की यह कथा भाई-बहन के स्नेह और रक्षा के भाव से किस तरह जुड़ी हुई है? आइए जानते हैं।

श्रीकृष्ण की उंगली पर लगी थी चोट

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार श्रीकृष्ण की उंगली पर चोट लग गई थी और उससे रक्त निकलने लगा। अलग-अलग धार्मिक कथाओं में इस घटना से जुड़ा प्रसंग कुछ अलग तरीके से बताया गया है। लेकिन द्रौपदी और श्रीकृष्ण से जुड़ी कथा में सबसे अधिक प्रचलित मान्यता यही है कि द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की उंगली से खून निकलता देखकर तुरंत अपनी साड़ी का कपड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। उस समय द्रौपदी ने न तो किसी चीज का इंतजार किया और न ही यह सोचा कि उनके पास पट्टी है या नहीं। उन्होंने जो कपड़ा पास में था, उसी से श्रीकृष्ण की उंगली पर पट्टी बांध दी।

द्रौपदी ने साड़ी का टुकड़ा बांधा

कथा के अनुसार, द्रौपदी के इस छोटे से प्रयास में उनके मन का स्नेह और अपनापन दिखाई देता है। उन्होंने श्रीकृष्ण की चोट को देखकर तत्काल उनकी मदद की। उनके लिए यह मायने नहीं रखता था कि कपड़ा उनकी साड़ी का हिस्सा है। उस समय उनके मन में सिर्फ श्रीकृष्ण की चोट को रोकने का भाव था। मान्यता है कि द्रौपदी के इसी स्नेह से श्रीकृष्ण बेहद प्रभावित हुए थे। उन्होंने द्रौपदी को अपना मानते हुए उनकी रक्षा करने का वचन दिया।

श्रीकृष्ण ने दिया रक्षा का वचन

द्रौपदी द्वारा बांधे गए कपड़े को सामान्य कपड़ा नहीं, बल्कि उनके स्नेह और अपनत्व का प्रतीक माना गया। कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण ने उस समय द्रौपदी से कहा कि वह उनके इस स्नेह का ऋण जरूर चुकाएंगे और हमेशा उनकी रक्षा करेंगे। इसी प्रसंग को आगे चलकर भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और रक्षा के भाव से जोड़कर देखा जाने लगा।

चीरहरण के समय निभाया वचन

महाभारत में द्रौपदी के चीरहरण का प्रसंग सबसे मार्मिक घटनाओं में से एक माना जाता है। जुए में पांडवों के हारने के बाद कौरव सभा में द्रौपदी का अपमान किया गया। जब दुशासन ने उनका चीरहरण करने का प्रयास किया, तब द्रौपदी ने श्रीकृष्ण को पुकारा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रीकृष्ण ने उनकी पुकार सुनी और द्रौपदी की लाज बचाई। कहा जाता है कि दुशासन द्रौपदी की साड़ी खींचता रहा, लेकिन साड़ी समाप्त नहीं हुई। इस तरह श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा की। इसी घटना को कई धार्मिक कथाओं में उस पुराने प्रसंग से जोड़ा जाता है, जब द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की घायल उंगली पर अपने वस्त्र का टुकड़ा बांधा था।

रक्षाबंधन से कैसे जुड़ी कथा

रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा का संकल्प लेता है। द्रौपदी और श्रीकृष्ण की कथा में भी इसी तरह के स्नेह और रक्षा का भाव दिखाई देता है। हालांकि, द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की कलाई पर राखी बांधी थी, ऐसा महाभारत के मूल ग्रंथ में स्पष्ट रूप से नहीं मिलता। प्रचलित कथा में उन्होंने श्रीकृष्ण की उंगली पर कपड़ा बांधा था। इसी घटना को लोकपरंपरा में राखी और भाई-बहन के रिश्ते से जोड़कर बताया जाता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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