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Ram Setu Ka Rahasya: 3 किलोमीटर चौड़े और 30 किलोमीट लंबे रामसेतु का क्या है रहस्य, जानें पौराणिक कथा

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Ram Setu Ka Rahasya: पानी की सतह पर पत्थर बिछाकर बनाया गया राम सेतु हमेशा से ही विज्ञान के लिए अजूबा रहा है। 3 किलोमीटर चौड़े और 30 किलोमीटर लंबे इस पुल की सच्चाई पर समय-समय पर बहस होती रही है और भूगर्भशास्त्रियों द्वारा इस पर शोध जारी है।

Ram Setu Ka Rahasya
Ram Setu Ka Rahasya: पानी की सतह पर पत्थर बिछाकर बनाया गया राम सेतु हमेशा से ही विज्ञान के लिए अजूबा रहा है। 3 किलोमीटर चौड़े और 30 किलोमीटर लंबे इस पुल की सच्चाई पर समय-समय पर बहस होती रही है और भूगर्भशास्त्रियों द्वारा इस पर शोध जारी है। हाल ही में एक फिल्म 'राम सेतु' भी बनी थी जिसमें यह साबित करने की कोशिश की गई थी कि यह पुल प्राकृतिक नहीं बल्कि बनाया गया था।

7 हजार साल पुराना है यह पुल

हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीलंका को समुद्र के रास्ते भारत से जोड़ने वाला यह पुल रामायण काल में बना था। कई इतिहासकारों के अनुसार यह समुद्र के खारे पानी में चूना पत्थर के जमा होने से बना है जिसने प्राकृतिक रूप से पुल का आकार ले लिया, जबकि कुछ पुरातत्वविदों के अनुसार यह 7000 साल पुराना है जो इस बात की पुष्टि करता है कि इसका निर्माण रामायण काल में हुआ था।

10 लाख वानरों की मदद से किया गया था पुल का निर्माण

इस पुल से हिंदुओं की धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। रामायण की कथा के अनुसार जब राम को रावण से युद्ध करने के लिए समुद्र पार करने की जरूरत पड़ी तो नल और नील ने 10 लाख वानरों की मदद से इसका निर्माण किया था। विश्वकर्मा को सृष्टिकर्ता कहा जाता है, मान्यता के अनुसार विश्वकर्मा ने नल को यह वरदान दिया था कि वह पत्थरों को छूकर उन्हें इतना हल्का कर सकता है कि पत्थर पानी पर तैर सकें।

नल के छूने से तैरने लगे थे पत्थर

इसलिए जब श्री राम को अपने लाखों वानर सैनिकों के साथ समुद्र पार करने की आवश्यकता हुई, तो नल ने समुद्र के पानी में पत्थर डालकर पुल का निर्माण शुरू किया। पत्थर डालने के बाद वे नल को छूकर पानी पर तैरने लगे, इस प्रकार पुल का निर्माण हुआ। लेकिन आधुनिक युग में इसके निर्माण और अस्तित्व की सच्चाई पर हमेशा से ही बहस होती रही है।

साल 2003 में जब नासा द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि इसका निर्माण समुद्र में चूना पत्थर के जमा होने के कारण हुआ है, तो इस पर काफी विवाद हुआ था। यह पुल भारत के रामेश्वरम को श्रीलंका के मरीना द्वीप से जोड़ता है। कुछ समय पहले राम सेतु का मुद्दा फिर से खबरों के केंद्र में था क्योंकि डिस्कवरी चैनल पर प्रसारित एक कार्यक्रम के अनुसार इसे हस्तनिर्मित बताया गया था।

Ancient Land Bridge नाम के इस कार्यक्रम में पुल के 'मानव निर्मित' होने के पीछे के वैज्ञानिक आधार के बारे में भी बताया गया, जिसमें कई पुरातत्वविदों के शोध का भी ज़िक्र किया गया है। इसके अनुसार, अगर एक बार के लिए यह मान भी लिया जाए कि यह पुल चूना पत्थर के जमा होने से बना है, तो इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इसके ऊपर मौजूद पत्थर समुद्र ने खुद नहीं बनाए, बल्कि वे पहाड़ी चट्टानें हैं।

यह बात उनके डेटा को देखकर कही जा सकती है, जिसके अनुसार नासा भी मानता है कि इन चूना पत्थरों की उम्र 4000 साल है, यानी ये चूना पत्थर 4000 साल पुराने हैं। जबकि अगर इनके ऊपर रखे पत्थरों की बात करें, तो वे 7000 साल पुराने हैं। रामायण काल भी लगभग उतना ही पुराना माना जाता है। इसलिए इसके उसी समय बने होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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