Brahma Ji Story : हिंदू धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि इस ब्रह्मांड की रचना ब्रह्मा जी ने की है। ब्रह्मा जी को ब्रह्मांड का रचयिता कहा जाता है। ब्रह्मा जी त्रिदेवों में से एक हैं। इसके बाद भी ब्रह्मा जी की पूजा नहीं की जाती है।
Brahma Ji Story : हिंदू धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि इस ब्रह्मांड की रचना ब्रह्मा जी ने की है। ब्रह्मा जी को ब्रह्मांड का रचयिता कहा जाता है। ब्रह्मा जी त्रिदेवों में से एक हैं। इसके बाद भी ब्रह्मा जी की पूजा नहीं की जाती है। आखिर क्या कारण है कि कलियुग में ब्रह्मा जी की पूजा नहीं की जाती है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
ब्रह्मा जी की पूजा न करने के पीछे ये है कारण
हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार कलियुग में ब्रह्मा जी की पूजा न करने के पीछे भगवान शिव का श्राप है। दरअसल ब्रह्मा जी ने भगवान शिव के सामने झूठ बोला था। इसके बाद ही भगवान शिव ने ब्रह्मा जी को श्राप दिया था। तब से ब्रह्मा जी की पूजा नहीं की जाती है। इतना ही नहीं किसी भी शुभ काम में उनका नाम भी नहीं लिया जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु जी में इस बात को लेकर विवाद हो गया कि उनमें सबसे शक्तिशाली कौन है। दोनों ही खुद को शक्तिशाली बता रहे थे। हालांकि, इस बात का फैसला करने के लिए दोनों ही भगवान शिव के पास गए। इसके बाद भगवान शिव ने ज्योतिर्लिंग के रूप में खुद को प्रकट किया। तब उन्होंने ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु से कहा कि जो भी दस ज्योतिर्लिंगों का आरंभ या अंत सबसे पहले खोज लेगा, उसे ही शक्तिशाली और सर्वश्रेष्ठ माना जाएगा।
भगवान शिव ने ब्रह्मा जी को यह श्राप दिया
इसके बाद भगवान विष्णु ने वराह रूप में और ब्रह्मा जी ने हंस रूप में ज्योतिर्लिंग का आरंभ और अंत खोजना शुरू कर दिया। दोनों ने कई दिनों तक प्रयास किया। तब भगवान विष्णु ने आकर भोलेनाथ से क्षमा मांगी और कहा कि वे ज्योतिर्लिंग का अंत नहीं ढूंढ पाए। ब्रह्मा जी भगवान शिव के सामने आए और कहा कि उन्होंने ज्योतिर्लिंग का अंत ढूंढ लिया है। इस पर जब भगवान शिव ने उनसे कहा कि आप झूठ बोल रहे हैं, तब ब्रह्मा जी ने केतकी के फूल को साक्षी मानकर उससे झूठ बुलवाया। इससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दे दिया।
भगवान शिव ने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि उनकी कहीं भी पूजा नहीं होगी। वे किसी भी यज्ञ या हवन में भाग नहीं लेंगे। साथ ही भगवान शिव ने केतकी के फूल को भी श्राप दिया कि इसे पूजा में नहीं चढ़ाया जाएगा। भगवान शिव के श्राप के कारण कलयुग में ब्रह्मा जी की पूजा नहीं होती। राजस्थान के पुष्कर में ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर है। यह भी पढ़ें- Surya Dev Puja: आखिर सूर्य देव के रथ में क्यों हैं 7 घोड़े, जानें इसके महत्व और नाम
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