Chaitra Navratri 2025: आज चैत्र नवरात्रि का छठा दिन हैं। छठे दिन मां दुर्गा के कात्याय का स्वरूप की पूजा विधि-विधान से की जाती है। मान्यता है कि जिस प्रकार शैलपुत्री मां पर्वतराज हिमालय के यहां अवतरित हुई थीं, उसी प्रकार ऋषि कात्यायनी ने भी मां दुर्गा की कठोर पूजा की थी
Chaitra Navratri 2025: आज चैत्र नवरात्रि का छठा दिन हैं। छठे दिन मां दुर्गा के कात्याय का स्वरूप की पूजा विधि-विधान से की जाती है। मान्यता है कि जिस प्रकार शैलपुत्री मां पर्वतराज हिमालय के यहां अवतरित हुई थीं, उसी प्रकार ऋषि कात्यायनी ने भी मां दुर्गा की कठोर पूजा की थी और कामना की थी कि वे उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। यदि किसी की कुंडली में विवाह की समस्या हो रही है तो चैत्र नवरात्रि के छठे दिन कुछ ऐसे उपाय हैं जिन्हें करने से विवाह संबंधित सारी परेशानियों से मुक्ति मिल सकती है। तो आइए उन उपायों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
वैवाहिक समस्याओं का होता है समाधान
कात्यायनी ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उन्हें मनोवांछित फल प्रदान किया था। तभी से नवरात्रि के छठे दिन मां भगवती की कात्यायनी स्वरूप में पूजा की जाती है। मान्यता है कि यदि कोई कुंवारी कन्या पूरे विधि-विधान से इनकी पूजा करती है तो उसे मां का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
माता कात्यायनी की पूजा का महत्व
मां कात्यायनी की पूजा करने से विवाह में आ रही समस्याएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं। इनकी पूजा करने से भक्त की कुंडली में बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है। यदि भक्त पूरे विधि-विधान से पूजा करता है तो उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और शत्रुओं का स्वतः ही नाश होता है और देवी की कृपा से भक्त को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी मुक्ति मिलती है।
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शहद और तगर पुष्प का प्रयोग
शास्त्रों में नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा में तगर पुष्प चढ़ाने का उल्लेख है। वैसे तो देवी भगवती को सभी प्रकार के पुष्प प्रिय हैं। देवी को नैवेद्य के रूप में खीर मालपुए का भोग लगाएं। मान्यता है कि मां कात्यायनी को शहद चढ़ाने से भक्त को सुंदर काया की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में भी मां कात्यायनी की पूजा में शहद चढ़ाना बहुत अच्छा माना गया है।