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Surya Dev Puja: आखिर सूर्य देव के रथ में क्यों हैं 7 घोड़े, जानें इसके महत्व और नाम

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Surya Dev Puja: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को ग्रहों का राजा माना गया है। वही, सनातन धर्म में सूर्य देवको पूजनीय भी माना गया है। इसलिए सूर्य देव को प्रतिदिन अर्घ्य भी दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो जातक रोजाना उगते हुए सूर्य देव की पूजा करते हैं

Surya Dev Puja
Surya Dev Puja: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को ग्रहों का राजा माना गया है। वही, सनातन धर्म में सूर्य देवको पूजनीय भी माना गया है। इसलिए सूर्य देव को प्रतिदिन अर्घ्य भी दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो जातक रोजाना उगते हुए सूर्य देव की पूजा करते हैं साथ ही जल अर्पित करते हैं उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इसके साथ ही घर में खुशहाली आती है। 

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जिस तरह प्रत्येक देवी-देवता का एक विशेष वाहन होता है ठीक उसी प्रकार सूर्य देव का भी एक विशेष प्रकार का वाहन है। आपने देखा होगा सूर्य देव रथ पर सवार होते हैं, जिसमें 7 घोड़े जुड़े होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है आखिर भगवान सूर्य देव के इन 7 घोड़ों का महत्व क्या है। आखिर ये रथ में सात ही घोड़े क्यों लगे हुए हैं। यदि नहीं जानते हैं तो आज इस खबर में सूर्य देव के घोड़ों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

क्या हैं सूर्य देव के सात घोड़े का नाम

धार्मिक और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, सूर्य देव के रथ में लगे सात घोड़े का नाम कुछ इस प्रकार है- गायत्री, जगति, त्रिष्टुप, अनुष्टुप, उष्णिक, वृहति और पंक्ति है। बता दें कि इन घोड़ों का रंग सफेद और देखने में बहुत ही ज्यादा प्यारे और सुंदर होते हैं।

क्या है इन 7 घोड़ों का महत्व 

धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव के सात घोड़ों का संबंध सप्ताह के सात दिनों से माना गया है। इसके साथ ही यह भी माना गया है कि सूर्य देव के रथ में जुड़े सात घोड़े इंद्रधनुष के सात रंगों को भी दर्शाते हैं। साथ ही सूर्य देव की किरणों में 7 तरह की रौशनी भी पाई जाती है, जिन्हें सात घोड़े दर्शाते हैं। 

रथ से जुड़े अन्य रोचक तथ्य

सूर्य देव के सारथी अरुण देव हैं जो भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ के भाई हैं। सूर्य के रथ में एक ही पहिया होता है जिसे संवत्सर कहते हैं। इस पहिये में 12 तीलियाँ होती हैं जो साल के 12 महीनों का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस रथ का एक सिरा मानुषोत्तर पर्वत पर और दूसरा सिरा मेरु पर्वत पर स्थित माना जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि सूर्य देव के रथ की लंबाई नौ हजार योजन है।

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