विज्ञापन
Home  mythology  bali aur ravana ka yudh this monkey had punished lanka king ravana for 6 months read story of ravana and bali

Bali Aur Ravana Ka Yudh : लंका नरेश रावण को इस वानर ने दी थी 6 महीने तक सजा, पढ़ें रावण और बाली की कहानी

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Bali Aur Ravana Ka Yudh : पौराणिक महाकाव्य रामायण में बाली का उल्लेख मिलता है। वानरराज बाली किष्किंधा के राजा और सुग्रीव के बड़े भाई थे। रामायण के एक महत्वपूर्ण पात्र बाली को वरदान था कि जो भी उससे युद्ध करेगा, उसे उसकी आधी शक्ति प्राप्त हो जाएगी।

Bali Aur Ravana Ka Yudh
Bali Aur Ravana Ka Yudh : पौराणिक महाकाव्य रामायण में बाली का उल्लेख मिलता है। वानरराज बाली किष्किंधा के राजा और सुग्रीव के बड़े भाई थे। रामायण के एक महत्वपूर्ण पात्र बाली को वरदान था कि जो भी उससे युद्ध करेगा, उसे उसकी आधी शक्ति प्राप्त हो जाएगी। इसी वरदान के कारण ही उसने लंका के राजा रावण को हराया था और कई बड़े राक्षसों को यमलोक भी भेजा था। पौराणिक कथाओं के अनुसार बाली ने महाबली रावण को 6 महीने तक अपनी बांह के नीचे दबाकर रखा था। आइए जानते हैं बाली कौन था और उसने रावण को अपनी बांह के नीचे क्यों दबाकर रखा था, इसके पीछे की पौराणिक कथा के बारे में।

बाली कौन था?

बाली रामायण के महत्वपूर्ण पात्रों में से एक था, जो किष्किंधा का वानर राजा था। जब रावण माता सीता का अपहरण करके लंका ले गया, तब श्री राम माता सीता की खोज में इधर-उधर भटक रहे थे। इसी दौरान रामजी की मुलाकात हनुमान जी से हुई। हनुमानजी ने ही श्री राम और सुग्रीव की मित्रता कराई थी। बाली सुग्रीव का छोटा भाई था। अपनी अपार शक्ति के कारण ही उसे महाबली बाली कहा जाता है। अपनी अपार शक्ति से बाली ने अपने भाई सुग्रीव का राज्य और उसकी पत्नी छीन ली थी। इसके कारण स्वयं भगवान श्री राम ने बाली का वध कर दिया था।

रावण को बाली ने हराया था

रावण का वध श्री राम ने किया था। लेकिन बाली रामायण का ऐसा पात्र था, जिसने श्री राम से पहले ही रावण को बुरी तरह पराजित कर दिया था। बाली के सामने सर्वशक्तिमान, पराक्रमी और लंकापति रावण को क्षमा मांगने पर मजबूर होना पड़ा।

बाली और रावण के बीच युद्ध

बाली को ब्रह्मदेव से वरदान मिला था कि जो भी उससे युद्ध करने आएगा, उसकी आधी शक्ति बाली में समा जाएगी। ऐसे में अपने प्रतिद्वंद्वियों की आधी शक्ति पाकर बाली और अधिक शक्तिशाली हो गया।

रावण को अहंकार क्यों हुआ?

रावण लंका का राजा था और उसने अपनी शक्ति और पराक्रम से कई राज्यों और राजाओं को पराजित किया था। रावण को वरदान था कि वह किसी भी देवता, दानव, राक्षस, किन्नर, गंधर्व, नाग या गरुड़ के हाथों नहीं मरेगा। इस वरदान के कारण रावण अहंकारी हो गया था। बाली की अपार शक्तियों के बारे में पता चलते ही रावण बाली से ईर्ष्या करने लगा, जिसके बाद उसने बाली को युद्ध के लिए ललकारा। इसके बाद रावण और बाली के बीच युद्ध हुआ। वरदान के कारण रावण की आधी शक्ति बाली में समा गई, जिससे वह और भी शक्तिशाली हो गया और रावण की हार निश्चित हो गई। बाली ने रावण को कैद कर लिया और हर दिन उसका अपमान करने लगा।

रावण को 6 महीने तक अपनी कांख में दबाकर रखा

बाली ने रावण को मारा नहीं बल्कि हर दिन उसे शर्मिंदा करता था। हर दिन बाली रावण को अपनी कांख में दबाकर चारों दिशाओं में घुमाता और सबके सामने उसे अपमानित करता। बाली ने ऐसा करीब 6 महीने तक किया।

बाली और रावण मित्र बन गए

बाली से हर रोज शर्मिंदा होने के बाद रावण ने उससे माफी मांगी और अपनी हार स्वीकार कर ली, जिसके बाद बाली ने रावण को माफ कर दिया। इसके बाद रावण ने बाली के सामने मित्रता का प्रस्ताव रखा, जिसे बाली ने स्वीकार कर लिया। इस तरह युद्ध के बाद बाली और रावण मित्र बन गए।

यह भी पढ़ें- Ram Navami 2025: रामजी के जन्म से पहले मां कौशल्या ने खाया था पुत्रेष्टि यज्ञ का प्रसाद, जानें खीर का महत्व

यह भी पढ़ें- Panchmukhi Shiv Ka Rahasya: आखिर क्या है भगवान शिव के पंचमुखी स्वरूप का रहस्य? जानें हर एक मुख का महत्व

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel