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Panchmukhi Shiv Ka Rahasya: आखिर क्या है भगवान शिव के पंचमुखी स्वरूप का रहस्य? जानें हर एक मुख का महत्व

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Panchmukhi Shiv Ka Rahasya: भगवान शिव को कई नामों और स्वरूपों से जाना जाता है। भगवान शिव के सभी स्वरूपों का किस न किसी गहरे अर्थ का प्रतीक भी हैं। भगवान शिव का एक स्वरूप पंचमुखी स्वरूप भी है, जो बेहद ही कम जगहों पर देखने को मिलता है।

Panchmukhi Shiv Ka Rahasya
Panchmukhi Shiv Ka Rahasya: भगवान शिव को कई नामों और स्वरूपों से जाना जाता है। भगवान शिव के सभी स्वरूपों का किस न किसी गहरे अर्थ का प्रतीक भी हैं। भगवान शिव का एक स्वरूप पंचमुखी स्वरूप भी है, जो बेहद ही कम जगहों पर देखने को मिलता है। इस रूप के बारे में बहुत कम ही लोगों को पता है। आखिर शिवजी ने ये पंचमुख धारण कैसे किया इसके संबंधित एक कथा भी है। तो आज इस खबर में भगवान शिव के पंचमुख स्वरूप के बारे में विस्तार से जानेंगे।

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु ने मनमोहक रूप धारण किया। भगवान विष्णु के मनमोहक रूप को देखने के लिे सभी देवता गण उपस्थित हुए। तभी भगवान भोलेनाथ के मन में विचार आया कि अगर वो पंच मुख धारण करते हैं तो शायद वो भी बेहद आकर्षक लगेंगे। ऐसे में उनके सोचते ही वो पांच मुख वाले हो गए, जिसमें हर मुख की तीन आंखें थी। भगवान शिव के इस स्वरूप को पंचानन कहा गया। भगवान शिव के हर एक मुख का अपना एक विशेष महत्व है। भगवान शिव के पंचमुखी स्वरूप का वर्णन वेदों और पुराणों में भी मिलता है। तो आइए भगवान शिव के पंचमुखी स्वरूप के बारे में विस्तार से जानते हैं।

पंचमुखी शिव का रहस्य

भगवान शिव के पांच मुख पांच दिशाओं और पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन पांच मुखों के नाम हैं: सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष और ईशान।

सद्योजात

सद्योजात मुख पश्चिम दिशा का प्रतिनिधित्व करता है और पृथ्वी तत्व का अधिपति है। यह मुख ब्रह्मांड के निर्माण का प्रतीक है। भगवान शिव ने सद्योजात मुख से ब्रह्मांड की रचना की।

वामदेव

वामदेव मुख उत्तर दिशा का प्रतिनिधित्व करता है और जल तत्व का अधिपति है। यह मुख पालन-पोषण का प्रतीक है। भगवान शिव ने वामदेव मुख से ब्रह्मांड का पालन-पोषण किया।

अघोर

अघोर मुख दक्षिण दिशा का प्रतिनिधित्व करता है और अग्नि तत्व का अधिपति है। यह मुख विनाश का प्रतीक है। भगवान शिव ने अघोर मुख से ब्रह्मांड का विनाश किया।

तत्पुरुष

तत्पुरुष मुख पूर्व दिशा का प्रतिनिधित्व करता है और वायु तत्व का अधिपति है। यह मुख लुप्त होने का प्रतीक है। तत्पुरुष मुख के माध्यम से भगवान भोलेनाथ ने आत्माओं को एक शरीर से दूसरे शरीर में स्थानांतरित कर दिया।

ईशान

ईशान मुख ऊपर की दिशा का प्रतिनिधित्व करता है और आकाश तत्व का अधिपति है। यह मुख कृपा का प्रतीक है। ईशान मुख के माध्यम से भगवान शिव ने जीवों को आशीर्वाद दिया और उन्हें मोक्ष का मार्ग दिखाया।

पंचमुखी शिव का महत्व

पंचमुखी शिव का स्वरूप दर्शाता है कि भगवान शिव निर्माता, रक्षक, संहारक, लुप्त होने वाले और कृपा प्रदान करने वाले हैं। ये पांच मुख पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनसे यह ब्रह्मांड बना है।

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