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Varada Chaturthi 2026: कब रखा जाएगा वरदा चतुर्थी का व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Varada Chaturthi 2026: वरदा चतुर्थी का नाम संस्कृत शब्द 'वरद' से लिया गया है, जिसका अर्थ है वर देने वाला। इस दिन भगवान गणेश वरद गणपति रूप में पूजे जाते हैं, जो भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

Varada Chaturthi 2026:
Varada Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि के दाता और सिद्धि-बुद्धि के स्वामी के रूप में पूजा जाता है। हर महीने की चतुर्थी तिथि उनके लिए विशेष मानी जाती है, लेकिन ज्येष्ठ मास के अधिकमास में पड़ने वाली वरदा चतुर्थी का महत्व अत्यंत बढ़ जाता है। इस व्रत को वरदा विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत अधिकमास की पवित्रता के साथ मनाया जाएगा।

वरदा चतुर्थी 2026 की तिथि और समय

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास में वरदा चतुर्थी 20 मई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। अधिकमास 17 मई 2026 से शुरू हो रहा है, जिससे इस चतुर्थी की पवित्रता और बढ़ गई है।

चतुर्थी तिथि की शुरुआत 19 मई 2026 को दोपहर 2 बजकर 18 मिनट पर होगी और यह 20 मई 2026 को सुबह 11 बजकर 06 या 11 बजकर 07 मिनट तक रहेगी। इसलिए व्रत और पूजा मुख्य रूप से 20 मई को की जाएगी।
 
Varada Chaturthi 2026:

मुख्य शुभ मुहूर्त

चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 10:56 से 11:06 तक।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:05 से 4:46 तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:34 से 3:39 तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:06 से 7:27 तक।
चंद्र दर्शन से बचने का समय भी ध्यान रखें, जो सुबह 8:43 से रात 11:08 तक हो सकता है। इन मुहूर्तों में पूजा करने से फल की प्राप्ति अधिक होती है।

वरदा चतुर्थी का धार्मिक महत्व

वरदा चतुर्थी का नाम संस्कृत शब्द 'वरद' से लिया गया है, जिसका अर्थ है वर (बोआन) देने वाला। इस दिन भगवान गणेश वरद गणपति रूप में पूजे जाते हैं, जो भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

मुद्गल पुराण और गणेश पुराण में चतुर्थी तिथि को गणेश जी से जोड़ा गया है। अधिकमास में यह व्रत करने से सामान्य 12 महीनों की चतुर्थी व्रत के पुण्य से भी अधिक लाभ मिलता है। भविष्य पुराण के अनुसार, इस व्रत से भक्त समस्त विघ्नों से मुक्त होकर धन, संतान, यश और दीर्घायु प्राप्त करता है।

यह व्रत पूर्व जन्म के दोषों और वर्तमान जीवन की समस्याओं को दूर करता है। घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। पितरों और देवताओं की तृप्ति भी होती है। अधिकमास को अतिशय पुण्यप्रद मास माना जाता है, इसलिए इसमें किया गया गणेश व्रत सहस्र गुणा फलदायी होता है।

 

Varada Chaturthi 2026:

वरदा चतुर्थी व्रत के नियम और महत्व

यह व्रत सूर्योदय से चंद्र दर्शन तक रखा जाता है। व्रती को पूरे दिन फलाहार या निर्जल रहना चाहिए, लेकिन स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या साबूदाना का सेवन किया जा सकता है। तामसिक भोजन से बचें। किसी से विवाद न करें और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। गणेश जी को तुलसी पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए। दान-पुण्य अवश्य करें, खासकर ब्राह्मण या जरूरतमंदों को भोजन कराएं। इस व्रत से बाधाएं दूर होती हैं, नई शुरुआत सफल होती है और बुद्धि में वृद्धि होती है।

वरदा चतुर्थी पूजा विधि

वरदा चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को साफ करें और लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। गणेश जी को सिंदूर का तिलक लगाएं। ॐ गं गणपतये नमः मंत्र बोलते हुए 21 दूर्वा दल अर्पित करें। मोदक, फल या मिठाई का भोग लगाएं। घी का दीपक और धूप जलाएं। गणेश चालीसा, आरती और मंत्रों का जाप करें। अंत में आरती उतारें और प्रार्थना करें।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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