Sawan Third Somvar: हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सावन में भगवान शिव की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। खासतौर पर सोमवार का दिन शिव आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
Sawan Third Somvar: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पूरे महीने शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ रहती है और हर सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा की जाती है। सावन के सोमवार को लेकर भक्तों के बीच खास उत्साह रहता है, क्योंकि इस दिन व्रत और पूजा करने की विशेष धार्मिक मान्यता है। साल 2026 में सावन का तीसरा सोमवार कब पड़ रहा है? इस दिन पूजा का सही तरीका क्या है और भगवान शिव को कौन-कौन सी चीजें अर्पित करनी चाहिए? क्या आपने कभी सोचा है कि सावन सोमवार को शिव पूजा का इतना महत्व क्यों माना जाता है? आइए जानते हैं।
कब है सावन का तीसरा सोमवार?
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में सावन का तीसरा सोमवार 17 अगस्त को पड़ रहा है। सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू हुआ है और इस बार कुल चार सावन सोमवार पड़ रहे हैं। पहला सोमवार 3 अगस्त, दूसरा सोमवार 10 अगस्त, तीसरा सोमवार 17 अगस्त और चौथा सोमवार 24 अगस्त को रहेगा। ऐसे में 17 अगस्त को आने वाला सोमवार सावन का तीसरा सोमवार होगा। इस दिन भगवान शिव की पूजा और सावन सोमवार का व्रत रखा जाएगा।
तीसरे सोमवार का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सावन में भगवान शिव की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। खासतौर पर सोमवार का दिन शिव आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने और श्रद्धा से भगवान शिव का पूजन करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। कई भक्त इस दिन सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली और जीवन में शांति की कामना से भगवान शिव की आराधना करते हैं। तीसरे सोमवार को भी भक्त सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हैं और शिव मंदिर जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
सावन के तीसरे सोमवार पर पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर में शिवलिंग हो तो वहीं पूजा की जा सकती है या फिर पास के शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव के दर्शन किए जा सकते हैं। सबसे पहले शिवलिंग पर साफ जल अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धा के अनुसार दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जा सकता है। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव को चंदन लगाएं और दीपक व धूप जलाएं। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इसके साथ शिव चालीसा या भगवान शिव की आरती भी की जा सकती है।
बेलपत्र चढ़ाने की मान्यता
सावन सोमवार की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। पूजा के दौरान शिवलिंग पर तीन पत्तियों वाला बेलपत्र अर्पित किया जाता है। बेलपत्र चढ़ाते समय यह ध्यान रखा जाता है कि पत्तियां साफ और सही अवस्था में हों। भक्त श्रद्धा के साथ बेलपत्र अर्पित करते हुए भगवान शिव से अपनी मनोकामना की प्रार्थना करते हैं।
जलाभिषेक का है विशेष महत्व
सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है। सोमवार के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने को विशेष फलदायी माना जाता है। भक्त मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं और ‘हर हर महादेव’ का जयकारा लगाते हैं। कई जगहों पर भक्त गंगाजल से भी भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। हालांकि, पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा और नियम का पालन माना जाता है।
सावन सोमवार का व्रत कैसे रखें?
सावन सोमवार को कई भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कई भक्त फलाहार या सात्विक भोजन के साथ व्रत करते हैं। व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही उपवास करना चाहिए। पूरे दिन भगवान शिव का ध्यान, मंत्र जाप और शिव कथा का पाठ किया जा सकता है। शाम के समय भगवान शिव की पूजा और आरती करने के बाद व्रत खोला जाता है।
पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
सावन सोमवार की पूजा के दौरान शिवलिंग पर साफ जल ही अर्पित करें और पूजा सामग्री को भी स्वच्छ रखें। भगवान शिव को बेलपत्र और फूल अर्पित करते समय उनकी स्थिति का ध्यान रखें। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव की पूजा में सच्ची श्रद्धा को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए पूजा करते समय मन को शांत रखते हुए भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए।
इस दिन करें ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप
सावन सोमवार पर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप भगवान शिव की आराधना का सरल तरीका माना जाता है। भक्त पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके अलावा शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र या शिव स्तुति का पाठ भी अपनी श्रद्धा के अनुसार किया जा सकता है। साल 2026 में सावन का तीसरा सोमवार 17 अगस्त को पड़ रहा है। इस दिन भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और विधि-विधान से पूजा करके महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करेंगे।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)