facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  vrat  sawan ke dusre somwar ke vrat ka paran kaise kare janiye niyam aur sampurn vidhi dharmik mahatva

Sawan Second Somwar: सावन के दूसरे सोमवार के व्रत का कैसे करें पारण? जानें नियम, धार्मिक महत्व और संपूर्ण विधि

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Sawan Second Somwar: सावन सोमवार के व्रत का पारण बहुत सरल तरीके से किया जा सकता है। पूजा के बाद सबसे पहले भगवान शिव को अर्पित किया गया प्रसाद ग्रहण करें।

Sawan Second Somwar Vrat Parana: 
Sawan Second Somwar Vrat Parana: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस पूरे महीने में सोमवार के व्रत का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। सावन के सोमवार को श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करते हैं और दिनभर व्रत रखकर शिवजी से सुख-समृद्धि, मनोकामना पूर्ति और परिवार की मंगलकामना करते हैं। दूसरा सावन सोमवार 10 अगस्त 2026 को है। उत्तर भारत में इस दिन व्रत रखा जाएगा। सावन के दूसरे सोमवार का व्रत रखने के बाद मन में सबसे पहला सवाल यही रहता है कि आखिर इस व्रत का पारण कब और किस विधि से करना चाहिए? क्या सोमवार की पूजा के बाद ही व्रत खोला जाता है या अगले दिन पारण किया जाता है? क्या पारण के भी कुछ विशेष नियम होते हैं? आइए जानते हैं सावन के दूसरे सोमवार के व्रत के पारण की सही विधि और धार्मिक महत्व...

10 अगस्त को है दूसरा सावन सोमवार

उत्तर भारत में सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त 2026 को पड़ रहा है। इस दिन भगवान शिव की पूजा और सावन सोमवार का व्रत किया जाएगा। इस बार 10 अगस्त को सोमवार के साथ सोम प्रदोष व्रत भी पड़ रहा है, इसलिए शिव भक्तों के लिए यह दिन विशेष माना जा रहा है। सावन सोमवार का व्रत रखने वाले भक्त दिनभर भगवान शिव का ध्यान करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार फलाहार या निराहार व्रत रखते हैं। व्रत के नियमों के अनुसार ही इसका पारण किया जाता है।

 

Sawan Second Somwar Vrat Parana: 

अगले दिन किया जाता है पारण

सावन सोमवार के व्रत को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि व्रत का पारण सोमवार की पूजा के तुरंत बाद नहीं किया जाता। सोमवार का व्रत रखने वाले श्रद्धालु सामान्य रूप से अगले दिन यानी मंगलवार को पारण करते हैं। सोमवार को व्रत पूरा होने के बाद भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है और इसके बाद अगले दिन प्रातःकाल स्नान आदि करके व्रत का पारण किया जाता है। पारण के लिए मंगलवार को सुबह का समय शुभ माना जाता है। हालांकि, पारण का सटीक समय अपने क्षेत्र की पंचांग गणना और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार देखना उचित माना जाता है।

पारण से पहले करें स्नान

मंगलवार को व्रत के पारण से पहले प्रातःकाल उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ वस्त्र धारण करके भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करें। यदि घर में शिवलिंग स्थापित है तो श्रद्धा के अनुसार भगवान शिव का जल से अभिषेक किया जा सकता है। भगवान शिव को बेलपत्र, पुष्प और फल अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर शिवजी की पूजा करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार शिव मंत्र या ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें। पूजा पूरी करने के बाद व्रत खोलना चाहिए।

ऐसे करें व्रत का पारण

सावन सोमवार के व्रत का पारण बहुत सरल तरीके से किया जा सकता है। पूजा के बाद सबसे पहले भगवान शिव को अर्पित किया गया प्रसाद ग्रहण करें। इसके बाद फल या सात्विक भोजन से व्रत खोल सकते हैं। जो श्रद्धालु सोमवार के व्रत में केवल फलाहार करते हैं, वे पारण के समय फल, दूध या अन्य सात्विक पदार्थ ग्रहण कर सकते हैं। वहीं, जो लोग पूरे दिन निर्जल या निराहार व्रत रखते हैं, उन्हें पारण करते समय अचानक बहुत अधिक भोजन करने से बचना चाहिए। पहले थोड़ा प्रसाद या हल्का भोजन लेकर व्रत खोलना उचित माना जाता है।

 

LORD SHIV

पारण में सात्विक भोजन करें

धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत का पारण सात्विक भोजन से करना चाहिए। पारण के समय ताजा और शुद्ध भोजन ग्रहण किया जाता है। फल, दूध, दही, मखाने या घर में तैयार किया गया सात्विक भोजन लिया जा सकता है। यदि सोमवार के व्रत में अन्न का सेवन नहीं किया गया है तो पारण के बाद अपनी व्रत परंपरा के अनुसार भोजन किया जा सकता है। भोजन से पहले भगवान शिव को भोग लगाना और फिर प्रसाद के रूप में ग्रहण करना शुभ माना जाता है।

शिवजी को भोग लगाएं

पारण के दिन भगवान शिव को अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। फल, दूध, दही, शहद या घर में बना सात्विक प्रसाद भगवान शिव को अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटकर स्वयं ग्रहण करें।

सोमवार व्रत में दान का महत्व

सावन सोमवार के व्रत के बाद दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। पारण के दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र, फल या अन्य उपयोगी सामग्री का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान पुण्यकारी होता है।

व्रत में रखें इन बातों का ध्यान

सावन सोमवार का व्रत श्रद्धा और नियम के साथ रखने की परंपरा है। व्रत के दौरान भगवान शिव का ध्यान करना और शिव मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। पारण के समय भी मन में भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत खोलना चाहिए। व्रत के नियम अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में कुछ भिन्न हो सकते हैं, इसलिए जिस परंपरा के अनुसार आपने व्रत रखा है, पारण भी उसी के अनुसार करना उचित माना जाता है। यदि आपके घर में सोमवार व्रत का पारण किसी विशेष समय या विधि से करने की परंपरा है तो उसका पालन किया जा सकता है।





यह भी पढ़ें-

Shivling Parikrama: शिवलिंग की परिक्रमा पूरी क्यों नहीं की जाती? जानें धार्मिक मान्यता और इसका कारण 

Shivling Puja: शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है कच्चा दूध? जानिए धार्मिक महत्व 

Sawan 2026: सावन में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का सही नियम क्या है? जानिए धार्मिक मान्यता 


(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel