facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  vrat  nag panchami 2026 par nag devta ko dhoodh arpit karne ki parampara kab aur kyon shuru hui janiye mahatva

Nag Panchami 2026: नाग पंचमी पर नाग देवता को दूध अर्पित करने की परंपरा कब और क्यों शुरू हुई? जानें महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Nag Panchami: हिंदू धर्म में नागों को केवल एक जीव के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि कई धार्मिक परंपराओं में उन्हें नाग देवता के रूप में पूजनीय माना गया है। भगवान शिव के गले में नाग का विराजमान होना भी नागों के धार्मिक महत्व को दर्शाता है।

naag panchami
Nag Panchami: सावन मास की नाग पंचमी का पर्व नाग देवता की पूजा और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का विशेष दिन माना जाता है। इस दिन देश के कई हिस्सों में नाग देवता की प्रतिमा या चित्र की पूजा की जाती है और दूध अर्पित किया जाता है। लेकिन जब भी नाग पंचमी आती है, मन में एक सवाल जरूर उठता है कि आखिर नाग देवता को दूध चढ़ाने की परंपरा शुरू कैसे हुई? क्या इसके पीछे कोई पौराणिक कथा है या फिर इसका संबंध किसी प्राचीन धार्मिक मान्यता से है? क्या आपको पता है कि नाग पंचमी के दिन नागों को दूध से स्नान कराने का उल्लेख प्राचीन धार्मिक परंपराओं में मिलता है? आइए जानते हैं इस परंपरा की कहानी और इसका धार्मिक महत्व।

नाग पंचमी और नाग पूजा

हिंदू धर्म में नागों को केवल एक जीव के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि कई धार्मिक परंपराओं में उन्हें नाग देवता के रूप में पूजनीय माना गया है। भगवान शिव के गले में नाग का विराजमान होना भी नागों के धार्मिक महत्व को दर्शाता है। सावन में आने वाली नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा कर उनसे परिवार की रक्षा और सुख-शांति की कामना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन नाग देवता को दूध, जल, फूल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित की जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों में नाग पूजा की विधि भी अलग हो सकती है।

दूध चढ़ाने की कथा

नाग पंचमी पर दूध अर्पित करने की परंपरा से जुड़ी एक प्रमुख पौराणिक कथा नागों की माता कद्रू के श्राप से जुड़ी बताई जाती है। धार्मिक कथा के अनुसार कद्रू के श्राप के कारण नागों को अग्नि में जलने का संकट पैदा हुआ था। इसी दौरान नागों को इस संकट से बचाने और उनकी पीड़ा शांत करने के लिए दूध से स्नान कराने की परंपरा बताई गई है। धार्मिक मान्यता में कहा गया है कि यह घटना पंचमी तिथि से जुड़ी थी। इसी वजह से पंचमी तिथि को नागों के लिए विशेष माना गया और इस दिन दूध से नाग पूजा की परंपरा आगे बढ़ी। धार्मिक ग्रंथों से जुड़ी नाग पंचमी की कथा में भी पंचमी तिथि को नागों के लिए विशेष बताया गया है और नागों को दूध से स्नान कराने का उल्लेख मिलता है। 

नागों को दूध से स्नान क्यों?

नाग पंचमी पर दूध चढ़ाने के पीछे धार्मिक रूप से मुख्य भाव नाग देवता के प्रति सम्मान और उनकी पूजा करना है। मान्यता है कि दूध अर्पित करने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं और परिवार को सर्प भय से सुरक्षा मिलती है। कुछ धार्मिक परंपराओं में यह भी माना जाता है कि नाग देवता की पूजा करने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसी कारण नाग पंचमी के दिन नाग मंदिरों में विशेष पूजा की जाती है और नाग देवता की प्रतिमा पर दूध चढ़ाया जाता है।

महाभारत से भी जुड़ा है पर्व

नाग पंचमी की धार्मिक परंपरा का संबंध महाभारत की एक प्रसिद्ध कथा से भी जोड़ा जाता है। राजा परीक्षित की मृत्यु नागराज तक्षक के डसने से हुई थी। इसके बाद उनके पुत्र जनमेजय ने नागों से बदला लेने के लिए सर्पसत्र यज्ञ कराया। इस यज्ञ में बड़ी संख्या में नाग अग्नि में गिरने लगे। तब आस्तिक मुनि ने हस्तक्षेप कर यज्ञ को रुकवाया और नागों की रक्षा की। नाग पंचमी की परंपरा से जुड़ी कथाओं में इस प्रसंग को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि दूध चढ़ाने की परंपरा की खास कथा नागों के श्राप और उनके कष्ट को शांत करने की मान्यता से जुड़ी बताई जाती है।

कब से शुरू हुई यह परंपरा?

नाग देवता को दूध अर्पित करने की परंपरा के शुरू होने की कोई निश्चित ऐतिहासिक तारीख बताना संभव नहीं है। यह किसी एक समय या एक व्यक्ति द्वारा शुरू की गई परंपरा के रूप में प्रमाणित नहीं है। इसके बजाय नाग पूजा और पंचमी तिथि से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं लंबे समय से चली आ रही हैं। प्राचीन धार्मिक कथाओं में पंचमी तिथि पर नागों की पूजा और दूध से स्नान कराने का उल्लेख मिलता है। समय के साथ यह परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रूपों में प्रचलित होती गई। कहीं नाग देवता की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा की जाती है तो कहीं दीवारों पर नाग का चित्र बनाकर पूजा की जाती है। 

नाग पंचमी पर किसे दूध चढ़ाएं?

धार्मिक परंपरा में दूध अर्पित करने का उद्देश्य नाग देवता की पूजा करना है, इसलिए नाग देवता की प्रतिमा, चित्र या मंदिर में स्थापित नाग स्वरूप पर दूध अर्पित किया जा सकता है। कई जगहों पर नाग देवता के साथ भगवान शिव की भी पूजा की जाती है। यह बात ध्यान रखना जरूरी है कि धार्मिक ग्रंथों में नाग पूजा और नाग देवता को दूध अर्पित करने की परंपरा का उल्लेख होने का अर्थ यह नहीं है कि जीवित सांप को जबरदस्ती दूध पिलाना जरूरी है। सांप प्राकृतिक रूप से दूध पीने वाले जीव नहीं हैं और उन्हें जबरन दूध पिलाना उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है। 

पूजा के पीछे क्या है मान्यता?

नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा के पीछे सर्प भय से मुक्ति और परिवार की रक्षा की धार्मिक मान्यता प्रमुख है। ग्रामीण जीवन में सांपों का सामना अधिक होने के कारण भी नाग पूजा का सामाजिक और धार्मिक महत्व रहा है। नाग देवता की पूजा करके लोग उनसे परिवार और खेत-खलिहान की रक्षा की प्रार्थना करते रहे हैं। इसी श्रद्धा के कारण आज भी सावन की नाग पंचमी पर लोग नाग देवता को दूध, जल और पुष्प अर्पित करते हैं। इस परंपरा में दूध केवल एक पूजा सामग्री नहीं, बल्कि श्रद्धा और सम्मान के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।


यह भी पढ़ें-

Shivling Parikrama: शिवलिंग की परिक्रमा पूरी क्यों नहीं की जाती? जानें धार्मिक मान्यता और इसका कारण 

Shivling Puja: शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है कच्चा दूध? जानिए धार्मिक महत्व 

Sawan 2026: सावन में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का सही नियम क्या है? जानिए धार्मिक मान्यता 


(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel