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Mangala Gauri Vrat: कब रखा जाएगा तीसरा मंगला गौरी व्रत, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Mangala Gauri Vrat: मंगला गौरी की पूजा में माता की प्रतिमा या तस्वीर के साथ चौकी, लाल या पीला कपड़ा, कलश, जल, नारियल, आम के पत्ते, रोली, कुमकुम, अक्षत, लाल फूल, दीपक, धूप, फल, मिठाई और नैवेद्य रखा जाता है। 

Mangala Gauri Vrat
Mangala Gauri Vrat: सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। सावन के हर मंगलवार को रखा जाने वाला मंगला गौरी व्रत भी इसी वजह से विशेष महत्व रखता है। इस व्रत में सुहागिन महिलाएं माता गौरी की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं भी अच्छे वर और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं। ऐसे में अब तीसरे मंगला गौरी व्रत को लेकर महिलाओं में उत्सुकता है। क्या आपको पता है कि 2026 में तीसरा मंगला गौरी व्रत कब रखा जाएगा, पूजा का शुभ समय क्या रहेगा और इस दिन किस विधि से माता गौरी की पूजा करनी चाहिए? आइए जानते हैं।

तीसरा मंगला गौरी व्रत कब है?

साल 2026 में उत्तर भारत के पंचांग के अनुसार तीसरा मंगला गौरी व्रत मंगलवार, 18 अगस्त को रखा जाएगा। इस दिन सावन शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी। इससे पहले पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त और दूसरा व्रत 11 अगस्त को रखा गया था। इसके बाद चौथा और आखिरी मंगला गौरी व्रत 25 अगस्त को होगा। 

पूजा का शुभ समय

मंगला गौरी व्रत में माता गौरी की पूजा के लिए दिन में सुविधानुसार शुभ समय चुना जा सकता है। 18 अगस्त को अबिजित मुहूर्त दोपहर 11:46 बजे से 12:37 बजे तक रहेगा। वहीं विजय मुहूर्त दोपहर 2:18 बजे से 3:08 बजे तक रहेगा।

 

Mangala Gauri Vrat

मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर वहां चौकी रखें और उस पर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाएं। चौकी पर माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद कलश स्थापित करके भगवान गणेश का ध्यान करें और पूजा का संकल्प लें। माता गौरी को लाल फूल, सिंदूर, अक्षत, रोली, कुमकुम, फल और मिठाई अर्पित करें। सुहागिन महिलाएं माता को सोलह श्रृंगार की सामग्री भी अर्पित कर सकती हैं। इसके बाद धूप और दीप जलाकर माता गौरी की पूजा करें। पूजा के दौरान माता गौरी की व्रत कथा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। इसके बाद माता की आरती करें और अपने परिवार के सुख-शांति तथा दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना करें।

किस सामग्री से करें पूजा?

मंगला गौरी की पूजा में माता की प्रतिमा या तस्वीर के साथ चौकी, लाल या पीला कपड़ा, कलश, जल, नारियल, आम के पत्ते, रोली, कुमकुम, अक्षत, लाल फूल, दीपक, धूप, फल, मिठाई और नैवेद्य रखा जाता है। सुहागिन महिलाएं सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी और अन्य सुहाग सामग्री भी माता को अर्पित कर सकती हैं।

 

Mangala Gauri Vrat

मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगला गौरी व्रत माता पार्वती को समर्पित है। माता गौरी को अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख और परिवार की खुशहाली की देवी के रूप में पूजा जाता है। सावन में मंगलवार के दिन माता गौरी की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य की कामना की जाती है। मान्यता है कि सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे वर और अच्छे वैवाहिक जीवन की कामना से मंगला गौरी की आराधना करती हैं। इस व्रत में माता पार्वती के तप और भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने की कथा का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

व्रत में इन बातों का रखें ध्यान

मंगला गौरी व्रत रखने वाली महिलाओं को पूरे दिन सात्विकता और संयम का पालन करना चाहिए। व्रत की परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है, इसलिए उसी के अनुसार व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए। पूजा के दौरान माता गौरी को श्रद्धा से सुहाग सामग्री अर्पित करना और व्रत कथा सुनना या पढ़ना इस पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। तीसरा मंगला गौरी व्रत ऐसे समय में पड़ रहा है जब सावन का शुक्ल पक्ष चल रहा होगा, इसलिए इस दिन माता गौरी के साथ भगवान शिव की पूजा करना भी विशेष माना जाता है। श्रद्धालु शिव-पार्वती का ध्यान कर पूजा पूरी कर सकते हैं।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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