Pithori Amavasya 2026: पिठोरी अमावस्या हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखने वाली अमावस्या मानी जाती है। इस दिन माताएं संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से पिठोरी व्रत रखती हैं। इस दिन देवी पिठोरी के साथ 64 योगिनियों और सप्त मातृकाओं की पूजा करने की परंपरा है। वहीं अमावस्या होने के कारण स्नान, दान और पितरों से जुड़े कर्मों का भी विशेष महत्व माना जाता है।
साल 2026 में पिठोरी अमावस्या 10 सितंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि 10 सितंबर को सुबह 10 बजकर 33 मिनट से शुरू होकर 11 सितंबर को सुबह 8 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। पिठोरी व्रत और पूजा के लिए 10 सितंबर को प्रदोष काल को प्रमुख माना गया है। ऐसे में क्या आपको पता है कि पिठोरी अमावस्या के दिन कुछ कामों को करने से बचने की सलाह क्यों दी जाती है? पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और क्या करना शुभ माना जाता है? आइए जानते हैं।
पिठोरी अमावस्या पर क्या करें
सुबह स्नान से करें दिन की शुरुआत
पिठोरी अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और स्वच्छ कपड़े पहनने की परंपरा है। अगर संभव हो तो किसी पवित्र नदी या जलाशय में स्नान किया जा सकता है। घर पर स्नान करने के बाद पूजा स्थान की साफ-सफाई करनी चाहिए। अमावस्या के दिन शुद्धता और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
श्रद्धा से करें देवी की पूजा
पिठोरी अमावस्या पर देवी पिठोरी, 64 योगिनियों और सप्त मातृकाओं की पूजा की जाती है। परंपरा के अनुसार आटा या गेहूं के आटे से छोटी-छोटी आकृतियां बनाकर उनकी पूजा की जाती है। पूजा में हल्दी, रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा की विधि अलग भी हो सकती है।
संतान की मंगलकामना करें
पिठोरी व्रत मुख्य रूप से माताओं द्वारा संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से किया जाता है, इसलिए पूजा के दौरान संतान के लिए प्रार्थना करना इस व्रत की प्रमुख परंपराओं में शामिल है।
पितरों का स्मरण करें
पिठोरी अमावस्या के दिन पितरों का स्मरण और उनके निमित्त तर्पण या दान करने की भी परंपरा है। इस दिन जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है। पिठोरी अमावस्या को कुशाग्रहणी अमावस्या भी कहा जाता है और इस दिन कुश एकत्र करने की परंपरा भी बताई गई है।
पिठोरी अमावस्या पर क्या न करें
घर में कलह करने से बचें
इस दिन घर में बेवजह झगड़ा, विवाद और अशांति का माहौल बनाने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार अमावस्या के दिन शांत मन से पूजा-पाठ और पितरों का स्मरण करना शुभ माना जाता है, इसलिए परिवार के सदस्यों के साथ कटु शब्दों का इस्तेमाल करने और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए।
किसी का अपमान न करें
पिठोरी अमावस्या पर पूजा और व्रत के साथ व्यवहार की शुद्धता पर भी जोर दिया जाता है। इसलिए किसी गरीब, जरूरतमंद, बुजुर्ग या घर आए अतिथि का अपमान नहीं करना चाहिए। दान करते समय भी दिखावे के बजाय श्रद्धा और अपनी सामर्थ्य का ध्यान रखना चाहिए।
पूजा में जल्दबाजी न करें
पिठोरी व्रत की पूजा शाम के प्रदोष काल में करने की परंपरा है। इसलिए पूजा को जल्दबाजी में पूरा करने के बजाय शांत मन से विधि के अनुसार करना चाहिए। 2026 में पिठोरी व्रत के लिए प्रदोष काल 10 सितंबर की शाम रहेगा, हालांकि स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
व्रत में नियमों की अनदेखी न करें
जो महिलाएं पिठोरी व्रत रखती हैं, उन्हें अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए। पारंपरिक विधि में पूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम को देवी की पूजा की जाती है और पूजा के बाद व्रत पूरा किया जाता है। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर कठोर उपवास करने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखना उचित माना जाता है।
नशे और मांसाहार से बचें
पिठोरी अमावस्या धार्मिक व्रत और पूजा से जुड़ा दिन है। इसलिए इस दिन मांसाहार और नशीले पदार्थों से दूर रहने की परंपरा है। पूजा-पाठ करने वाले लोग इस दिन सात्त्विक भोजन ग्रहण करते हैं और मन को शांत रखने का प्रयास करते हैं।
दान का भी है महत्व
पिठोरी अमावस्या पर दान-पुण्य को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े, अनाज या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान की जा सकती हैं। अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त किया गया दान और तर्पण भी धार्मिक परंपराओं में विशेष माना गया है। इस दिन सबसे जरूरी बात यह है कि पूजा और दान श्रद्धा से किया जाए। केवल दिखावे के लिए किए गए धार्मिक कर्मों के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार सच्चे मन से पूजा करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
यह भी पढ़ें-
(
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)