Bhadrapada Masik Shivratri: भाद्रपद मास की मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और भगवान शिव का अभिषेक कर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि शिवरात्रि पर सच्ची श्रद्धा से भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। लेकिन क्या आपको पता है कि भाद्रपद मासिक शिवरात्रि पर पूजा किस विधि से करनी चाहिए? भगवान शिव को कौन-सी चीजें अर्पित करनी चाहिए और इस व्रत का धार्मिक महत्व क्या है? आइए जानते हैं।
कब मनाई जाती है मासिक शिवरात्रि
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। भाद्रपद मास में पड़ने वाली शिवरात्रि को भाद्रपद मासिक शिवरात्रि कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की परंपरा है। शिवरात्रि की पूजा में रात्रि का समय विशेष महत्व रखता है, इसलिए भक्त शाम के बाद भगवान शिव की पूजा और अभिषेक करते हैं।
सुबह स्नान कर लें
मासिक शिवरात्रि के दिन भक्तों को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। यदि घर में शिवलिंग स्थापित है तो पूजा की जगह को साफ करके वहां दीपक जलाएं। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए पूजा शुरू करें।
ऐसे करें शिवलिंग का अभिषेक
शिवरात्रि की पूजा में शिवलिंग का अभिषेक सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। सबसे पहले साफ जल से शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक किया जा सकता है। अभिषेक के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। अगर घर पर विस्तृत अभिषेक करना संभव न हो तो केवल स्वच्छ जल चढ़ाकर भी श्रद्धा से पूजा की जा सकती है। पूजा में दिखावे से अधिक महत्व भक्ति और श्रद्धा को दिया जाता है।
भगवान शिव को ये चीजें चढ़ाएं
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है। इसके अलावा भगवान शिव को धतूरा, आक के फूल और सफेद फूल अर्पित किए जा सकते हैं। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि बेलपत्र साफ और साबुत हो। भगवान शिव को चंदन, अक्षत और फल भी अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा के दौरान शिवलिंग पर सामग्री अर्पित करते समय भगवान शिव का स्मरण करते रहें।
माता पार्वती की भी करें पूजा
मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने की भी परंपरा है। शिव-पार्वती को पति-पत्नी के सुख, सौभाग्य और पारिवारिक शांति का प्रतीक माना जाता है। इसलिए भक्त इस दिन माता पार्वती को सिंदूर, अक्षत, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर उनकी आराधना करते हैं।
रात में करें विशेष पूजा
मासिक शिवरात्रि पर रात्रि पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त रात में भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। इस दौरान शिवलिंग का जलाभिषेक करें, बेलपत्र और फूल चढ़ाएं और भगवान शिव की आरती करें। इसके बाद शिव मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप सरल तरीके से किया जा सकता है। भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार मंत्र जाप कर सकते हैं।
व्रत में किन बातों का रखें ध्यान
मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने वाले भक्त दिनभर भगवान शिव का ध्यान करते हैं। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कई भक्त फलाहार करके व्रत करते हैं। अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही व्रत रखना चाहिए। व्रत के दौरान सात्विक भोजन ग्रहण करने और मन को शांत रखने की परंपरा है। इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ शिव पुराण या भगवान शिव से जुड़ी धार्मिक कथाओं का पाठ और श्रवण भी किया जाता है।
क्या है धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं। इसी कारण उन्हें भोलेनाथ कहा जाता है। मासिक शिवरात्रि पर शिवलिंग का जलाभिषेक और श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। शिवरात्रि को आत्मचिंतन और भगवान शिव की आराधना का दिन भी माना जाता है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और मंत्र जाप के माध्यम से भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। कई धार्मिक मान्यताओं में मासिक शिवरात्रि के व्रत को मनोकामना पूर्ति और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति से भी जोड़कर देखा गया है।
शिव आरती के साथ करें पूजा पूरी
पूजा और अभिषेक पूरा होने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। इसके बाद भगवान को फल या सात्विक भोग अर्पित करें। अंत में हाथ जोड़कर अपनी मनोकामना भगवान शिव के सामने रखें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें। इस तरह श्रद्धा और नियमपूर्वक भाद्रपद मासिक शिवरात्रि की पूजा पूरी की जा सकती है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)