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Bhadrapada Amavasya 2026: कब है भाद्रपद अमावस्या? जानें तिथि, स्नान-दान और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Bhadrapada Amavasya 2026: भाद्रपद अमावस्या के दिन धार्मिक कार्यों के साथ मन की शांति और संयम पर भी ध्यान दिया जाता है। इस दिन किसी के प्रति कटु व्यवहार करने से बचना चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद की सहायता करनी चाहिए।

Bhadrapada Amavasya 2026
Bhadrapada Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस दिन स्नान, दान, पूजा-पाठ और पितरों के निमित्त किए जाने वाले धार्मिक कर्मों को महत्वपूर्ण बताया गया है। भाद्रपद महीने में आने वाली अमावस्या भी इसी वजह से खास मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु पवित्र नदी या तीर्थ में स्नान करने के साथ जरूरतमंदों को दान करते हैं और पितरों का स्मरण करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि साल 2026 में भाद्रपद अमावस्या किस दिन पड़ रही है? इस दिन स्नान-दान का क्या महत्व है और किन धार्मिक कार्यों को करना शुभ माना जाता है? आइए जानते हैं।

कब है भाद्रपद अमावस्या 2026

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 10 सितंबर, गुरुवार को सुबह 10 बजकर 33 मिनट से शुरू होगी और 11 सितंबर, शुक्रवार को सुबह 8 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार भाद्रपद अमावस्या 11 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। 

स्नान का क्या है महत्व

भाद्रपद अमावस्या के दिन स्नान को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी, सरोवर या तीर्थ में स्नान करने से मन और शरीर की शुद्धि होती है। जो लोग तीर्थ स्थान पर जाकर स्नान नहीं कर सकते, वे घर पर ही स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान का स्मरण करना और अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा-पाठ करना शुभ माना जाता है। अमावस्या के दिन सुबह के समय स्नान और धार्मिक कार्य करना विशेष रूप से फलदायी माना गया है।

पितरों के लिए खास माना जाता है यह दिन

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में अमावस्या को पितरों के स्मरण और उनके निमित्त किए जाने वाले कर्मों के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। भाद्रपद अमावस्या पर लोग अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं और उनकी शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध या अन्य धार्मिक कर्म करते हैं। मान्यता है कि अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त जल अर्पित करने और श्रद्धापूर्वक उनका स्मरण करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जिन परिवारों में पितरों के लिए नियमित रूप से तर्पण किया जाता है, वे इस दिन भी अपनी परंपरा के अनुसार धार्मिक कर्म कर सकते हैं।

भाद्रपद अमावस्या पर क्या करें दान

अमावस्या के दिन दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र, फल या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दान हमेशा श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए। इस दिन किसी जरूरतमंद को भोजन कराना भी पुण्यकारी माना जाता है। पितरों के निमित्त किए जाने वाले कर्मों के बाद ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराने और दक्षिणा देने की भी परंपरा कई परिवारों में रही है।

कैसे करें पूजा-पाठ

भाद्रपद अमावस्या के दिन सुबह स्नान करने के बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करें। इसके बाद भगवान का ध्यान करके दीपक जलाएं और अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा करें। भगवान विष्णु, भगवान शिव या अपने इष्ट देव की पूजा की जा सकती है। पितरों के निमित्त जल अर्पित करने की परंपरा हो तो दक्षिण दिशा की ओर मुख करके श्रद्धापूर्वक तर्पण किया जाता है। तर्पण की विधि परिवार की परंपरा और धार्मिक आचार्य के निर्देश के अनुसार करना उचित माना जाता है।

अमावस्या पर किन बातों का रखें ध्यान

भाद्रपद अमावस्या के दिन धार्मिक कार्यों के साथ मन की शांति और संयम पर भी ध्यान दिया जाता है। इस दिन किसी के प्रति कटु व्यवहार करने से बचना चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद की सहायता करनी चाहिए। पितरों के लिए तर्पण या श्राद्ध करते समय विधि और परंपरा का ध्यान रखना जरूरी है। यदि परिवार में पहले से कोई निश्चित श्राद्ध या तर्पण विधि चली आ रही है, तो उसी के अनुसार कर्म करना उचित माना जाता है।

भाद्रपद अमावस्या का धार्मिक महत्व

भाद्रपद अमावस्या को स्नान, दान, पितृ स्मरण और धार्मिक साधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। अमावस्या की तिथि पर चंद्रमा दिखाई नहीं देता और हिंदू धार्मिक परंपरा में इस दिन को आत्मचिंतन, पूजा और पितरों के स्मरण से जोड़ा गया है। खास तौर पर भाद्रपद अमावस्या पर किए जाने वाले स्नान, दान और पितृ कर्म को श्रद्धा से करने की परंपरा है। यही वजह है कि इस दिन सुबह से ही श्रद्धालु स्नान, पूजा और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य करते हैं।

 
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।) 

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