Bhadrapada Masik Shivratri: भाद्रपद मास की मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं और रात्रि में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए जितना जरूरी व्रत के नियमों का पालन करना है, उतना ही जरूरी सही समय पर व्रत का पारण करना भी माना जाता है। आखिर शिवरात्रि का व्रत कब खोला जाता है? पारण की सही विधि क्या है और व्रत खोलते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? आइए जानते हैं।
कब है भाद्रपद मासिक शिवरात्रि
पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी तिथि 9 सितंबर को दोपहर 12:30 बजे से शुरू होगी और 10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे समाप्त होगी। इसी कारण मासिक शिवरात्रि का व्रत 9 सितंबर को रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव की रात्रिकालीन पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। शिवरात्रि की पूजा मुख्य रूप से रात में की जाती है। श्रद्धालु अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार रात्रि में भगवान शिव का अभिषेक करते हैं और बेलपत्र, धतूरा, पुष्प, फल आदि अर्पित करते हैं।
कब करें व्रत का पारण
मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने वाले भक्त सामान्य तौर पर अगले दिन चतुर्दशी तिथि समाप्त होने के बाद पारण करते हैं। भाद्रपद मासिक शिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि 10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे समाप्त हो रही है। ऐसे में व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी स्थानीय पंचांग परंपरा के अनुसार तिथि समाप्त होने के बाद स्नान और भगवान शिव की पूजा करके व्रत खोल सकते हैं।
ऐसे करें पारण
पारण से पहले सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा स्थल पर दीपक जलाएं। यदि संभव हो तो शिवलिंग पर जल अर्पित करें और भगवान शिव को बेलपत्र तथा पुष्प चढ़ाएं। इसके बाद भगवान शिव से व्रत के दौरान हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें। पूजा पूरी करने के बाद ही व्रत खोलना चाहिए। व्रत खोलते समय सबसे पहले जल या फल का सेवन किया जा सकता है। इसके बाद अपनी क्षमता और व्रत के नियमों के अनुसार हल्का सात्विक भोजन ग्रहण करें।
पारण में रखें इन बातों का ध्यान
शिवरात्रि व्रत का पारण अचानक भारी या तला-भुना भोजन करके नहीं करना चाहिए। लंबे समय तक उपवास के बाद हल्का भोजन करना बेहतर माना जाता है। पारण के समय सात्विक भोजन ग्रहण करने की धार्मिक परंपरा है। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू या अन्य व्रत में मान्य भोजन से पारण किया जा सकता है। हालांकि, जिन लोगों ने निर्जला या किसी विशेष संकल्प के साथ व्रत रखा है, उन्हें अपनी परंपरा के अनुसार ही पारण करना चाहिए।
पूजा के बाद खोलें व्रत
धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत केवल भोजन न करने का नाम नहीं है। व्रत के दौरान भगवान शिव का ध्यान, मंत्र जाप और पूजा भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसलिए पारण से पहले शिव पूजा करने की परंपरा कई परिवारों में निभाई जाती है। सुबह भगवान शिव को जल अर्पित कर 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें। इसके बाद शिवजी को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करें और फिर व्रत खोलें।
भाद्रपद शिवरात्रि का धार्मिक महत्व
मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है और भगवान शिव को समर्पित मानी जाती है। भाद्रपद मास की शिवरात्रि भी इसी परंपरा का हिस्सा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से मन को शांति मिलती है और भक्त भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं। शिवरात्रि की रात भगवान शिव का अभिषेक करने और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करने की विशेष धार्मिक परंपरा है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार रात्रि जागरण भी करते हैं।
व्रत में क्यों जरूरी है नियम
मासिक शिवरात्रि का व्रत श्रद्धा और संकल्प से जुड़ा माना जाता है। इसलिए व्रत रखने वाले व्यक्ति को पूरे दिन सात्विक विचार और आचरण रखने की कोशिश करनी चाहिए। पूजा के दौरान भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। व्रत का पारण भी जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए। पहले भगवान शिव का स्मरण और पूजा करें, फिर तिथि और स्थानीय पंचांग के अनुसार उचित समय पर व्रत खोलें। यही शिवरात्रि व्रत की धार्मिक परंपरा में पारण का मुख्य भाव माना जाता है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)