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Indira Ekadashi: इंदिरा एकादशी पर कैसे करें भगवान विष्णु की पूजा? जानें विधि, नियम और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Indira Ekadashi: इंदिरा एकादशी की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व माना जाता है। भगवान विष्णु को तुलसी प्रिय मानी गई है, इसलिए पूजा के दौरान साफ और साबुत तुलसी दल अर्पित करें। 

Indira Ekadashi:
Indira Ekadashi: पितृ पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साल 2026 में इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर, मंगलवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को देर रात तक रहेगी। ऐसे में इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ व्रत के नियमों का पालन करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन इंदिरा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा किस तरह करनी चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? आइए जानते हैं।

इंदिरा एकादशी पर ऐसे करें पूजा की तैयारी

इंदिरा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थान की सफाई करके वहां भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। पूजा के लिए एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा रखें। पूजा से पहले व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए दीपक जलाएं और पूजा की शुरुआत करें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, चंदन, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।

भगवान विष्णु को तुलसी जरूर चढ़ाएं

इंदिरा एकादशी की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व माना जाता है। भगवान विष्णु को तुलसी प्रिय मानी गई है, इसलिए पूजा के दौरान साफ और साबुत तुलसी दल अर्पित करें। तुलसी चढ़ाते समय भगवान विष्णु का ध्यान करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें। ध्यान रखें कि तुलसी दल पहले से तोड़कर रखने के बजाय पूजा के नियमों के अनुसार ही इस्तेमाल करें। पूजा में भगवान विष्णु को पीले रंग के फूल और वस्त्र अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।

भगवान विष्णु के इन मंत्रों का करें जाप

पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप किया जा सकता है। श्रद्धालु ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके अलावा विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। मंत्र जाप के बाद भगवान विष्णु की आरती करें और उन्हें भोग लगाएं। एकादशी व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या निर्जल व्रत रख सकते हैं। व्रत का प्रकार व्यक्ति की शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार तय करना चाहिए।

इंदिरा एकादशी पर किन नियमों का रखें ध्यान

एकादशी व्रत में अन्न और अनाज का सेवन नहीं किया जाता है। इस दिन चावल, गेहूं और अन्य अनाज से बने भोजन से परहेज किया जाता है। व्रत रखने वाले लोग फल, दूध और एकादशी के अनुकूल फलाहार ग्रहण कर सकते हैं। व्रत के दौरान भगवान विष्णु का स्मरण करना, भजन-कीर्तन करना और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना शुभ माना जाता है। इस दिन सात्विक आहार और संयम का पालन करने की परंपरा है।

इंदिरा एकादशी की रात करें भगवान विष्णु का स्मरण

इंदिरा एकादशी की रात भगवान विष्णु का ध्यान और भजन करना भी पूजा का हिस्सा माना जाता है। श्रद्धालु भगवान विष्णु की कथा सुन सकते हैं और विष्णु मंत्रों का जाप कर सकते हैं। मान्यता है कि एकादशी की रात जागरण और भगवान का स्मरण करने से व्रत का धार्मिक महत्व बढ़ता है। पितृ पक्ष में पड़ने के कारण इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के साथ पितरों का स्मरण भी किया जाता है। श्रद्धालु अपने पितरों के लिए प्रार्थना कर सकते हैं और उनके कल्याण की कामना कर सकते हैं।

इंदिरा एकादशी पर पारण का नियम

इंदिरा एकादशी का व्रत अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर पारण करके पूरा किया जाता है। 2026 में एकादशी व्रत 6 अक्टूबर को है और पारण 7 अक्टूबर को किया जाएगा। पारण का समय स्थान के अनुसार अलग हो सकता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय देखना उचित है। पंचांग के अनुसार 7 अक्टूबर को पारण का समय सुबह 6:17 बजे से 10:11 बजे तक बताया गया है। पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें भोग अर्पित करें। इसके बाद व्रत खोलें। धार्मिक मान्यता के अनुसार द्वादशी के दिन उचित समय पर पारण करना एकादशी व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

इंदिरा एकादशी का धार्मिक महत्व

इंदिरा एकादशी अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में आती है और यह पितृ पक्ष के दौरान पड़ती है। इसी वजह से इसका संबंध भगवान विष्णु की उपासना के साथ पितरों के स्मरण से भी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इंदिरा एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और पितरों की शांति के लिए किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, मंत्र जाप और पितरों का स्मरण किया जाता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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