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Jitiya Vrat 2026: जितिया के दिन व्रत के समय करें इन मंंत्रों का जाप, जानें विधि और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके भगवान विष्णु और व्रत से जुड़े देवी-देवताओं का ध्यान करें। दीपक जलाकर पूजा शुरू करें और भगवान को फल-फूल अर्पित करें।

Jitiya Vrat 2026
Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ और मंत्र जाप करने से व्रत का आध्यात्मिक महत्व बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में जितिया व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा। क्या आपको पता है कि व्रत के दौरान किन मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है और इनका जाप किस तरह करना चाहिए? आइए जानते हैं।

जितिया व्रत पर करें मंत्र जाप

जितिया व्रत के दिन महिलाएं सुबह स्नान करने के बाद पूजा की तैयारी करती हैं। धार्मिक परंपरा में इस दिन भगवान विष्णु के वासुदेव स्वरूप की पूजा का उल्लेख मिलता है। पूजा के दौरान भगवान का ध्यान करते हुए मंत्र जाप किया जा सकता है।

भगवान विष्णु का मंत्र

जितिया व्रत में भगवान विष्णु का स्मरण करने के लिए इस मंत्र का जाप किया जा सकता है- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

इस मंत्र का जाप पूजा के समय श्रद्धा के साथ करें। आप अपनी सुविधा के अनुसार 11, 21, 51 या 108 बार मंत्र का जाप कर सकती हैं।

संतान की मंगलकामना का मंत्र

संतान के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए भगवान का ध्यान कर इस मंत्र का जाप किया जा सकता है-

ॐ देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः॥


इस मंत्र के जाप के दौरान मन में अपनी संतान के स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना करें।

जीमूतवाहन का स्मरण

जितिया व्रत में राजा जीमूतवाहन की कथा का विशेष महत्व माना जाता है। व्रत कथा में राजा जीमूतवाहन, गरुड़ और नाग शंखचूड़ का प्रसंग आता है। इसलिए कथा सुनने या पढ़ने से पहले जीमूतवाहन का स्मरण करना भी व्रत की परंपरा का हिस्सा माना जाता है। जीमूतवाहन के स्मरण के साथ श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करते हुए संतान की रक्षा और दीर्घायु की कामना की जाती है।

मंत्र जाप की विधि

जितिया व्रत के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके भगवान विष्णु और व्रत से जुड़े देवी-देवताओं का ध्यान करें। दीपक जलाकर पूजा शुरू करें और भगवान को फल-फूल अर्पित करें। इसके बाद शांत मन से मंत्र जाप करें। मंत्र जाप के दौरान जल्दबाजी न करें और शब्दों का उच्चारण यथासंभव स्पष्ट रखें। इसके बाद जितिया व्रत की कथा का श्रवण या पाठ करें। धार्मिक परंपरा में भगवान वासुदेव की पूजा के बाद घी और खीर से आहुति देने का भी उल्लेख मिलता है। 

व्रत के दौरान रखें भक्ति भाव

जितिया व्रत में केवल मंत्रों की संख्या से अधिक महत्व श्रद्धा और भाव का माना जाता है। मंत्र जाप करते समय मन को शांत रखें और संतान के लिए मंगलकामना करें। पूजा के दौरान भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए अपनी संतान की सुख-शांति और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।

जितिया व्रत का धार्मिक महत्व

जीवित्पुत्रिका व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इसे विशेष रूप से संतान की लंबी आयु और उनके कल्याण की कामना से किया जाने वाला व्रत माना जाता है। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश सहित कई क्षेत्रों में इस व्रत की विशेष परंपरा है। वर्ष 2026 में जीवित्पुत्रिका व्रत 3 अक्टूबर को है। पंचांग के अनुसार इस दिन अष्टमी तिथि सुबह 7 बजकर 59 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन तक रहेगी। हालांकि पूजा और पारण का स्थानीय समय शहर के अनुसार अलग हो सकता है। 


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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