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Maha Navami 2025: महानवमी पर घर पर कैसे करें हवन? जानिए सामग्री और न करें ये गलतियां

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
निधि
सार

नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा आराधना की जाती है. सिद्धिदात्री देवी का नाम सिद्धि प्रदान करने वाली देवी है. महानवमी के दिन पूरे विधि-विधान से मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है.

Maha Navami 2025
Navratri 2025 Maha Navami Havan Vidhi: इस साल 06 अप्रैल 2025 दिन रविवार को हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माने जाने वाले चैत्र नवरात्रि का आखिरी दिन है. इस दिन नवरात्रि दुर्गा नवमी या महा नवमी होती है. व्रत रखने वाले लोग आज सिद्धिदात्री की पूजा करने के बाद हवन करेंगे. उसके बाद कन्या पूजन कर उन्हें दक्षिणा देकर सम्मान के साथ विदा करेंगे. हवन करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है. साथ ही इस दिन व्रत भी रखा जाता है. आइए जानते हैं हवन करने की सरल विधि और सामग्री सूची.

नवरात्रि दुर्गा नवमी या महा नवमी पर घर पर कैसे करें हवन

दुर्गा नवमी या महा नवमी के दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ कपड़े पहनने चाहिए. अब पूजा स्थल पर जहां हवन कुंड बनाया गया है, वहां सभी हवन सामग्री लेकर बैठ जाएं. शास्त्रों में हवन के दौरान पति-पत्नी का एक साथ बैठना सबसे अच्छा माना गया है. अब मंत्रों से शुद्धि करें. हवन कुंड में आम की लकड़ी और कपूर से अग्नि प्रज्वलित करें। इसके बाद सभी देवी-देवताओं के नाम से हवन कुंड में आहुतियां डालें। शास्त्रों में 108 बार आहुतियां डालना श्रेष्ठ माना गया है। हवन समाप्त होने के बाद मां दुर्गा की आरती करें और भगवान को भोग लगाएं।

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हवन सामग्री

दुर्गा नवमी या महा नवमी के दिन हवन करने के लिए आम की लकड़ी, चंदन, कालीगंज, देवदार की जड़, अंजीर की छाल और पत्ता, बेल, नीम, पलाश का पौधा, पीपल की छाल और तना, बेर, आम का पत्ता, तिल, कपूर, लौंग, चावल, घी, चीनी, जौ, गुग्गल, लोबान, इलायची, गाय के गोबर के उपले, घी, निर्जल, लाल कपड़ा, कलावा, सुपारी, पान, बताशा, पूरी और खीर की जरूरत होती है।

नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा आराधना की जाती है. सिद्धिदात्री देवी का नाम सिद्धि प्रदान करने वाली देवी है. महानवमी के दिन पूरे विधि-विधान से मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. इस दिन हवन और कन्या पूजन के साथ पवित्र नवरात्रि का समापन होता है. मान्यता है कि इस दिन अगर सच्चे मन से मां दुर्गा की पूजा की जाए तो सारे बिगड़े काम बन जाते हैं. मां अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं. वहीं अगर इस दिन कुछ गलतियां की जाती हैं तो माता रानी नाराज भी हो जाती हैं. आइए जानते हैं महानवमी के दिन कौन सी गलतियां करने से बचना चाहिए.

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नवमी के दिन न करें ये गलतियां

महानवमी के दिन देर तक न सोएं. इस दिन सुबह जल्दी स्नान करके माता रानी के मंत्र का जाप करें. अगर आपने व्रत नहीं रखा है तो भी जल्दी स्नान करके पूजा करें.

महानवमी के दिन काले कपड़े न पहनें. इस दिन बैंगनी या वायलेट रंग पहनना शुभ होता है. यह रंग मां सिद्धिदात्री को प्रिय है। इसलिए इस रंग के वस्त्र पहनकर मां की पूजा करें।

मां सिद्धिदात्री की पूजा पूरे तन-मन से करनी चाहिए। पूरी श्रद्धा से दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। इस दौरान मन पूरी तरह एकाग्र होना चाहिए। पूजा के दौरान किसी से बात न करें।

महानवमी के दिन हवन-पूजन करना चाहिए। इसके बिना नवरात्रि की पूजा अधूरी मानी जाती है। हवन के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखें कि हवन सामग्री कुंड के बाहर न गिरे।

नवमी के दिन कोई भी नया काम करना वर्जित होता है। मान्यताओं के अनुसार नवमी रिक्ता तिथि होती है। इसका मतलब है कि इस दिन किए गए काम सफल नहीं होते।

अगर आपने अष्टमी का व्रत रखा है तो महानवमी के दिन कन्याओं का पूजन कर उन्हें विदा करने के बाद ही विधिवत व्रत खोलें। इससे माता रानी की कृपा प्राप्त होती है।

नवमी के दिन भगवान को भोग नहीं लगाना चाहिए। यदि आपने अष्टमी का व्रत रखा है तो आपको महानवमी के दिन केवल हलवा पूरी और चना खाकर व्रत खोलना चाहिए।
 

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