Chaitra Navratri 4 Day Maa Kushmanda devi Temple History: चैत्र नवरात्रि का समय चल रहा है और नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। मां कुष्मांडा देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप हैं। इन्हें ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी के नाम से भी जाना जाता है।
Chaitra Navratri 4 Day Maa Kushmanda devi Temple History: चैत्र नवरात्रि का समय चल रहा है और नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। मां कुष्मांडा देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप हैं। इन्हें ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी के नाम से भी जाना जाता है। बता दें कि मां कुष्मांडा की पूजा करते समय विधि-विधान का बहुत ज्यादा ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी दुर्गा के 9 स्वरूपों की अलग-अलग कथाएं हैं। तो आज इस खबर में मां कुष्मांडा के अनोखे मंदिर के बारे में जानेंगे, जहां मूर्ति से जल हर समय रिसता रहता है। जल कहां से रिसता है इसका पता आज तक नहीं लग पाया है। तो आइए इस खबर में मां कुष्मांडा के चमत्कारी मंदिर के इतिहास के बारे में विस्तार से जानते हैं।
यूपी के कानपुर में हैं मां कुष्मांडा का चमत्कारी मंदिर
मां कुष्मांडा को ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी कहा जाता है। इसी वजह से इन्हें आदि शक्ति और आदि स्वरूपा भी कहा जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों में भी कहा गया है कि मां कुष्मांडा की विधि-विधान से पूजा करने से कई तरह के रोग दूर हो जाते हैं, लेकिन यूपी के कानपुर जिले के घाटमपुर कस्बे में स्थित मां कुष्मांडा देवी की पिंडी से रिसने वाले जल से आंखों से संबंधित सभी विकार दूर हो जाते हैं। लोगों का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति 6 महीने तक मां का जल अपनी आंखों में लगाए तो उसकी खोई हुई रोशनी वापस आ सकती है। यह भी पढ़ें- Trimbakeshwar Jyotirlinga: त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के पीछे क्या है कहानी और इतिहास, कैसे पहुंचें
यहां स्थित मां कुष्मांडा देवी दो मुखों वाली पिंडी के रूप में विराजमान हैं, जिनका आदि और अंत आज तक कोई नहीं जान पाया है। इस वजह से वह लेटी हुई प्रतीत होती हैं। उनकी पिंडी से सालभर जल रिसता रहता है, यह कहां से आता है यह कोई नहीं जानता, लेकिन इस जल की उपयोगिता क्या है यह सभी जानते हैं।
मान्यता है कि मां कुष्मांडा की मूर्ति से टपकने वाले जल को अगर आंखों में लगाया जाए तो बड़े से बड़ा नेत्र विकार भी जल्द ही ठीक हो जाता है, इसी वजह से यहां हमेशा सैकड़ों भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है, जो मां की पूजा-अर्चना कर अपने अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
मां कुष्मांडा मंदिर का इतिहास क्या है?
इतिहासकार के अनुसार, यहां दो मुंह वाली कुष्मांडा देवी की मूर्ति शैली मराठा काल की लगती है, जो दूसरी से पांचवीं शताब्दी के बीच की है। इनकी खोज कोहरा नाम के एक चरवाहे ने की थी, उस समय घाटमपुर के राजा यहां आया करते थे। उन्होंने वर्ष 1330 में इस स्थान पर मां के मंदिर का निर्माण कराया, जिसके बाद वर्ष 1890 में एक व्यापारी ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। यह भी पढ़ें- Punjab Famous Temple: स्वर्ण मंदिर ही नहीं, पंजाब के ये मंदिर भी हैं दुनियाभर में मशहूर
स्थानीय बुजुर्ग की मानें तो उनके पूर्वजों ने बताया था कि वर्षों पहले इस स्थान पर जंगल हुआ करता था। लोग अपने पालतू जानवरों को चराने के लिए इस क्षेत्र में आया करते थे। इस स्थान पर एक गाय प्रतिदिन आती थी और अपना दूध गिराती थी। इस गाय के मालिक को चिंता हुई कि उसकी गाय का दूध प्रतिदिन कहां गायब हो जाता है और उसने अपनी गाय का पीछा किया और देखा कि गाय इसी स्थान पर दूध गिरा रही है।
जब उसने इस स्थान को खोदा तो उसे माता की यह मूर्ति मिली और उसने इस मूर्ति को निकालने का प्रयास किया, लेकिन वह खोदता रहा लेकिन मूर्ति का अंत नहीं मिला, जिसके बाद राजा घाटमपुर दर्शन ने यहां एक छोटा सा मंदिर बनवाया, जिसकी लोग पूजा करने लगे। यह भी कहा जाता है कि अंग्रेजों के शासन के दौरान इस स्थान से सड़क बनाने का प्रयास किया गया था, लेकिन उन्हें भी कोई सफलता नहीं मिली, क्योंकि जिस दिन मूर्ति की खुदाई की गई थी, अगले दिन भी उसी स्थान से खुदाई करनी थी।
यहां माली करता है पूजा
देश के मंदिरों में आपको साधु-संत और बाबा मंदिरों में भगवान की पूजा करते दिख जाएंगे, लेकिन यहां पूजा माली (घर-घर जाकर फूल बांटने वाला) करता है, वही मां कुष्मांडा देवी का श्रृंगार करता है, उन्हें वस्त्र पहनाता है और भोग लगाता है, यहां सैकड़ों सालों से ये परंपरा चली आ रही है, मंदिर की माली कमला देवी के मुताबिक यहां रोजाना सैकड़ों लोग दर्शन के लिए आते हैं, जो अपनी श्रद्धा के अनुसार मां की सेवा करते हैं. यहां मां की पिंडी से निकलने वाले जल से कई लोगों की आंखों को राहत मिली है. आंखों में मैल और मोतियाबिंद से पहले दिन से ही राहत मिलनी शुरू हो जाती है। यह भी पढ़ें- Most Famous Temples in Delhi: दिल्ली में रहते हैं तो जरूर करें इन प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन
दुनिया में चतुष्टय कुष्मांडा देवी का एकमात्र मंदिर