Chaitra Navratri 2025: नवरात्रि का पर्व साल में चार बार मनाया जाता है। जिसमें दो गुप्त नवरात्रि और एक चैत्र नवरात्रि दूसरा शारदीय नवरात्रि। इस समय चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है। चैत्र नवरात्रि भी 9 दिनों का होता है।
Chaitra Navratri 2025: नवरात्रि का पर्व साल में चार बार मनाया जाता है। जिसमें दो गुप्त नवरात्रि और एक चैत्र नवरात्रि दूसरा शारदीय नवरात्रि। इस समय चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है। चैत्र नवरात्रि भी 9 दिनों का होता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मां दुर्गा का अवतार पृथ्वी पर से राक्षसों के वध के लिए हुआ था।
लेकिन आज इस खबर में महिषासुर राक्षस के बारे में बताने वाले हैं, जिसका वध शारदीय नवरात्रि में हुआ था। महिषासुर दैत्य का वध मां दुर्गा ने ही किया था। देवी भागवत कथा के अनुसार, मां दुर्गा ने महिषासुर का वध शिव प्रदत्त त्रिशूल से किया था। इसी कारण से मां दुर्गा को महिषासुर मर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है। तो आज इस खबर में जानेंगे कि मां दुर्गा ने महिषासुर को मारने के लिए क्यों अवतार लिया था। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
कौन था महिषासुर
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिषासुर दैत्यराज रंभ का पुत्र था। रंभ दैत्य को एक भैंसे से प्रेम हो गया। यह भैंस हमेशा जल में रहती थी। रंभ और भैंसे के योग से ही असुर राज महिषासुर का जन्म हुआ था। इसी कारण से महिषासुर हमेशा अपनी इच्छानुसार कभी इंसान तो कभी भैंस का रूप बदल लेता था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिषासुर ने कठोर तपस्या कर के सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त कर लिया था। ब्रह्मा जी ने वरदान दिया था कि उस पर न तो कोई देवता और न ही दानव विजय प्राप्त कर सकेगा।
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आखिर क्यों हुआ मां दुर्गा का अवतार
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मदेव से वरदान मिलने के बाद महिषासुर स्वर्ग लोग में उधम मचाने लगा। इतना ही नहीं एक दिन तो महिषासुर ने स्वर्ग लोक पर ही आक्रमण कर दिया। महिषासुर ने इंद्र देव को परास्त कर दिया और स्वर्ग लोक पर अधिकार जमा लिया। स्वर्ग लोक पर कब्जा करने के बाद महिषासुर ने सारे देवताओं को वहां से बाहर निकाल दिया। स्वर्ग लोक से बाहर निकाले जाने के बाद शबी देवगण परेशान हो गए हैं त्रिदेव ( ब्रह्मा, विष्णु और महेश ) के पास गए। वहां पहुंचने के बाद देवगण ने अपनी सारी समस्या बताई। लेकिन ब्रह्मा जी के वरदान के कारण स्वयं ब्रह्म, विष्णु और महेश भी महिषासुर को हरा नहीं सकते थे। ऐसे में दैत्य राज महिषासुर को मारने के लिए सभी देवताओं ने मिलकर मां दुर्गा का सृजन किया।