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Aashadh Masik Krishna Janmashtami: आषाढ़ मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत का कैसे करें पारण, जानें विधि और नियम

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Aashadh Masik Krishna Janmashtami: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत का पारण अगले दिन नवमी तिथि में किया जाता है। यदि अष्टमी तिथि सूर्योदय तक बनी रहे तो पारण अष्टमी समाप्त होने के बाद ही करना चाहिए।

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Aashadh Masik Krishna Janmashtami Vrat Parana: सनातन धर्म में प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखा जाता है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी का भी विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान से पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और रात्रि में भगवान का स्मरण एवं भजन-कीर्तन करते हैं। व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब उसका पारण शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार किया जाए, इसलिए पारण की सही विधि और समय का विशेष ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है।

पारण कब किया जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत का पारण अगले दिन नवमी तिथि में किया जाता है। यदि अष्टमी तिथि सूर्योदय तक बनी रहे तो पारण अष्टमी समाप्त होने के बाद ही करना चाहिए। वहीं यदि व्रत रोहिणी नक्षत्र को ध्यान में रखकर रखा गया हो तो पारण रोहिणी नक्षत्र समाप्त होने के बाद करना शुभ माना जाता है। पारण का समय निर्धारित करते समय पंचांग का अवश्य पालन करना चाहिए, क्योंकि तिथि और नक्षत्र के अनुसार पारण का समय बदल सकता है।

पारण से पहले क्या करें?

व्रत के अगले दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद उठकर दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्नान करें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान श्रीकृष्ण के पूजन स्थल को साफ करें। यदि व्रत के दौरान स्थापित पूजन सामग्री हो तो उसे व्यवस्थित करें और भगवान को पुनः प्रणाम करें। इसके बाद श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए उनसे व्रत पूर्ण होने की प्रार्थना करें और पूजा में यदि कोई त्रुटि हुई हो तो उसके लिए क्षमा याचना करें।

पारण की संपूर्ण विधि

पारण करने से पहले भगवान श्रीकृष्ण को नैवेद्य अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान को पंचामृत, माखन-मिश्री, फल, दूध, दही या अपनी श्रद्धा के अनुसार सात्विक भोग अर्पित करें। इसके बाद तुलसी दल अर्पित करें और श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करें। पूजा पूर्ण होने पर भगवान की आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें। भगवान से व्रत पूर्ण होने की अनुमति लेकर जल ग्रहण करें। इसके बाद फल या सात्विक भोजन से व्रत का पारण करें। पारण के समय तामसिक भोजन, लहसुन, प्याज और मांसाहार का सेवन नहीं किया जाता।

पारण में किन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए?

  • जल या गंगाजल ग्रहण करके व्रत खोलें।
  • दूध या पंचामृत का सेवन करें।
  • मौसमी फल खाएं।
  • माखन-मिश्री का प्रसाद ग्रहण करें।
  • खीर, साबूदाना, फलाहारी भोजन या साधारण सात्विक भोजन लिया जा सकता है।
  • भोजन से पहले भगवान को भोग अवश्य लगाएं।
  • एक लंबे उपवास के बाद अत्यधिक तला-भुना या भारी भोजन करने से बचना चाहिए।
 

पारण के दौरान किन नियमों का रखें ध्यान?

  • पारण निर्धारित समय के भीतर ही करें।
  • भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाए बिना स्वयं भोजन न करें।
  • तुलसी दल के साथ प्रसाद ग्रहण करना शुभ माना जाता है।
  • क्रोध, विवाद और अपशब्दों से बचें।
  • भोजन सात्विक और शुद्ध होना चाहिए।
  • पारण से पहले यथासंभव गौ, ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, फल अथवा दक्षिणा का दान किया जा सकता है।
  • पूजा के बाद ही व्रत समाप्त करने की प्रक्रिया पूरी करें।
 

क्या पारण से पहले दान करना शुभ माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत पूर्ण होने पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना पुण्यदायी माना जाता है। श्रद्धालु अन्न, फल, वस्त्र, दक्षिणा, दूध, दही, माखन, मिश्री अथवा अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान कर सकते हैं। हालांकि दान पूरी तरह श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार ही करना चाहिए।

श्रीकृष्ण पूजा के दौरान किन मंत्रों का जाप करें?

पारण से पहले या पूजा के समय श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मंत्रों का जाप कर सकते हैं। 

"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"

"कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥"


इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप कर भगवान श्रीकृष्ण से सुख, शांति और कृपा की प्रार्थना की जाती है।

पारण के बाद क्या करें?

व्रत का पारण करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण का पुनः स्मरण करें और प्रसाद परिवार के सदस्यों तथा अन्य श्रद्धालुओं में वितरित करें। यदि घर में बाल गोपाल की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया गया हो तो उनकी नियमित पूजा जारी रखें। दिनभर यथासंभव सात्विक आचरण और सात्विक भोजन का पालन करना शुभ माना जाता है। आषाढ़ मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के पारण में समय, पूजा-विधि और सात्विक नियमों का विशेष महत्व माना गया है। श्रद्धा और विधिपूर्वक पारण करने से व्रत की धार्मिक प्रक्रिया पूर्ण मानी जाती है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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