Ganesh Chaturthi 2026: सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें और पूजा का संकल्प लें। इसके बाद गणपति जी को जल अर्पित करें। यदि संभव हो तो पंचामृत से स्नान कराएं और फिर स्वच्छ जल से अभिषेक करें।
Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा पूरे विधि-विधान से करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन विधिवत पूजा-अर्चना करने से भगवान गणपति प्रसन्न होते हैं और भक्तों के जीवन से विघ्न-बाधाएं दूर करते हैं। गणेश चतुर्थी पर घर में गणपति की स्थापना से लेकर पूजा और आरती तक हर चरण का अपना धार्मिक महत्व माना गया है। लेकिन क्या आपको पता है कि गणेश चतुर्थी पर गणपति की पूजा किस तरह करनी चाहिए और पूजा के दौरान किन नियमों का ध्यान रखना जरूरी है? आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी की संपूर्ण पूजा विधि, जरूरी नियम और इसका धार्मिक महत्व...
गणेश चतुर्थी पर ऐसे करें गणपति की स्थापना
गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके वहां चौकी रखें और उस पर स्वच्छ लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा स्थापित करने से पहले पूजा स्थान पर थोड़े अक्षत रखें। इसके ऊपर गणपति की प्रतिमा को विराजमान करें। गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करते समय इस बात का ध्यान रखें कि उनकी सूंड बाईं ओर हो तो इसे सामान्य गृहस्थ पूजा के लिए शुभ माना जाता है। प्रतिमा के साथ भगवान गणेश के सामने उनका वाहन मूषक भी रखा जा सकता है।
पूजा की शुरुआत करें
सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें और पूजा का संकल्प लें। इसके बाद गणपति जी को जल अर्पित करें। यदि संभव हो तो पंचामृत से स्नान कराएं और फिर स्वच्छ जल से अभिषेक करें। इसके बाद भगवान गणेश को साफ वस्त्र या वस्त्र के रूप में मौली अर्पित करें। गणेश जी को चंदन, सिंदूर और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद पुष्प और दूर्वा चढ़ाएं। धार्मिक मान्यता में दूर्वा को गणपति की पूजा में विशेष महत्व दिया गया है। गणेश जी को दूर्वा अर्पित करते समय श्रद्धा और भक्ति का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
गणेश जी को चढ़ाएं ये चीजें
गणेश चतुर्थी की पूजा में भगवान गणेश को मोदक और लड्डू का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा फल और अन्य सात्विक प्रसाद भी अर्पित किए जा सकते हैं। गणपति जी को लाल फूल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा की माला या दूर्वा का गुच्छा अर्पित करने की परंपरा है। इसके साथ ही धूप और दीप जलाकर गणपति जी की आराधना करें।
गणेश मंत्र का करें जाप
पूजा के दौरान भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। भक्त गणपति जी के सरल मंत्र ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का जाप कर सकते हैं। इसके बाद गणेश जी की आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों के साथ भगवान गणेश का आशीर्वाद लें। गणेश चतुर्थी के दिन गणपति अथर्वशीर्ष, गणेश स्तुति या गणेश जी से संबंधित अन्य धार्मिक पाठ का भी पाठ किया जा सकता है।
पूजा में इन नियमों का रखें ध्यान
गणेश चतुर्थी की पूजा करते समय पूजा स्थल और आसपास की जगह को साफ-सुथरा रखना चाहिए। भगवान गणेश की प्रतिमा को हमेशा स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें और प्रतिमा को जमीन पर सीधे रखने के बजाय चौकी या किसी ऊंचे स्थान पर विराजमान करें। गणपति जी को दूर्वा और मोदक अर्पित करना पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पूजा में श्रद्धा के साथ सात्विक सामग्री का ही प्रयोग करना उचित माना जाता है। गणेश जी की पूजा में तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को तुलसी अर्पित नहीं की जाती।
गणेश पूजा का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य या पूजा की शुरुआत गणेश जी की आराधना से करने की परंपरा है। मान्यता है कि भगवान गणेश विघ्नों को दूर करने वाले और बुद्धि, विवेक तथा शुभता प्रदान करने वाले देवता हैं। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना और पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त इस दिन गणपति जी का आह्वान कर उनकी पूजा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की कामना करते हैं।
आरती के बाद करें प्रसाद वितरण
पूजा और आरती पूरी होने के बाद भगवान गणेश को लगाए गए भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों और अन्य श्रद्धालुओं में बांटें। गणेश चतुर्थी के दौरान श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार गणपति की प्रतिदिन पूजा कर सकते हैं। इसके बाद परंपरा के अनुसार शुभ मुहूर्त में गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)