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Ashadh Kalashtami 2026: कब रखा जाएगा आषाढ़ कालाष्टमी का व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Ashadh Kalashtami 2026: आषाढ़ कालाष्टमी के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थान को शुद्ध कर भगवान शिव तथा भगवान काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। 

कालाष्टमी
Ashadh Kalashtami 2026 Date: सनातन धर्म में प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है। यह दिन भगवान काल भैरव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि काल भैरव भगवान शिव के रौद्र स्वरूप हैं और अपने भक्तों की रक्षा करने वाले देवता हैं। आषाढ़ माह में पड़ने वाली कालाष्टमी का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से व्रत रखकर भगवान काल भैरव की पूजा करते हैं तथा उनकी कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं। आइए जानते हैं वर्ष 2026 में आषाढ़ कालाष्टमी व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व।

आषाढ़ कालाष्टमी 2026 की तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 7 जुलाई 2026 को रात्रि 10 बजकर 32 मिनट पर होगा। वहीं अष्टमी तिथि का समापन 9 जुलाई 2026 को रात्रि 12 बजकर 10 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार आषाढ़ कालाष्टमी का व्रत 8 जुलाई 2026, बुधवार को रखा जाएगा।

शुभ मुहूर्त

अष्टमी तिथि प्रारंभ – 7 जुलाई 2026, रात्रि 10:32 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त – 9 जुलाई 2026, रात्रि 12:10 बजे
कालाष्टमी व्रत – 8 जुलाई 2026, बुधवार
निशीथ काल पूजा – 8 जुलाई 2026 की मध्यरात्रि में

भगवान काल भैरव की पूजा रात्रि के समय विशेष रूप से शुभ मानी जाती है, इसलिए अधिकांश श्रद्धालु निशीथ काल में विशेष पूजन और आरती करते हैं।

आषाढ़ कालाष्टमी का धार्मिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान काल भैरव को काशी का कोतवाल तथा भगवान शिव का उग्र और रक्षक स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की आराधना करने से भक्तों को उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। आषाढ़ कालाष्टमी के अवसर पर भगवान काल भैरव को प्रसन्न करने के लिए व्रत, पूजन, मंत्र जाप और भैरव स्तोत्र का पाठ किया जाता है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन भी होता है। अनेक स्थानों पर भक्त रात्रि जागरण कर भगवान काल भैरव का स्मरण करते हैं।

कालाष्टमी व्रत की पूजा विधि

आषाढ़ कालाष्टमी के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थान को शुद्ध कर भगवान शिव तथा भगवान काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजन के दौरान भगवान को जल, गंगाजल, अक्षत, चंदन, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। काल भैरव को सरसों का तेल, काले तिल, उड़द, नारियल तथा पुष्प अर्पित करने की भी परंपरा है। इसके बाद काल भैरव अष्टक, भैरव चालीसा या भैरव मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें। रात्रि में दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान काल भैरव की आरती करें और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।

कालाष्टमी व्रत के दौरान किन बातों का रखें ध्यान

कालाष्टमी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है। पूजा के समय मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखने का विशेष महत्व बताया गया है। व्रती को तामसिक भोजन, मांस, मदिरा तथा नशे से दूर रहना चाहिए। दिनभर भगवान काल भैरव का स्मरण करते हुए यथासंभव उपवास रखना चाहिए। पूजा के दौरान क्रोध, विवाद और अपशब्दों से भी बचना चाहिए।

भगवान काल भैरव की पूजा में क्या अर्पित किया जाता है?

काल भैरव की पूजा में सरसों का तेल, काले तिल, काले वस्त्र, उड़द, नारियल, धतूरा, बेलपत्र, पुष्प, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। कई स्थानों पर भक्त भगवान को मीठा भोग भी लगाते हैं। पूजा के अंत में आरती कर प्रसाद का वितरण किया जाता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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