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Hanuman Ji Story: कलियुग में कहां रहते हैं हनुमान जी? पौराणिक कथा से जानें इसका रहस्य

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Lord Hanuman: रामायण के अनुसार, लंका विजय के पश्चात जब श्रीराम अयोध्या लौटे तो उन्होंने अपने सहयोगियों को सम्मानित किया। हनुमान जी ने श्रीराम से वरदान मांगा कि जहां-जहां रामकथा का गान होगा, वहां वे उपस्थित रहें।

Hanuman Ji:
Hanuman Ji: हनुमान जी भगवान श्रीराम के परम भक्त, शक्ति और भक्ति के प्रतीक हैं। रामायण काल से लेकर आज तक उनकी कथा भक्तों के हृदय में अमर है। चिरंजीवी होने के कारण वे कलियुग में भी सशरीर विद्यमान हैं और भक्तों के संकटों का निवारण करते हैं। शास्त्रों और पुराणों में उनके निवास स्थान का स्पष्ट उल्लेख मिलता है, जो भक्तों को उनकी अनंत कृपा की याद दिलाता है।

हनुमान जी का चिरंजीवी स्वरूप

रामायण के अनुसार, लंका विजय के पश्चात जब श्रीराम अयोध्या लौटे तो उन्होंने अपने सहयोगियों को सम्मानित किया। हनुमान जी ने श्रीराम से वरदान मांगा कि जहां-जहां रामकथा का गान होगा, वहां वे उपस्थित रहें। श्रीराम ने यह वरदान प्रदान किया। हनुमान जी को अमरता का वरदान प्राप्त है, जिससे वे चारों युगों में विद्यमान रहते हैं।

हनुमान चालीसा में गोस्वामी तुलसीदास जी लिखते हैं- “चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा।” यह दर्शाता है कि सत्ययुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग में भी उनके पराक्रम और उपस्थिति जगत को प्रकाशित करती है। कलियुग में वे संकटमोचन के रूप में भक्तों की रक्षा करते हैं।

 

Hanuman Ji:

कलियुग में गंधमादन पर्वत पर निवास

श्रीमद् भागवत पुराण के अनुसार, द्वापर युग के समाप्त होने और कलियुग के आरंभ होते ही हनुमान जी ने गंधमादन पर्वत को अपना निवास स्थान चुना। यह पर्वत कैलाश पर्वत के उत्तर दिशा में स्थित है और सुमेरु पर्वत के निकट माना जाता है। वर्तमान में यह क्षेत्र तिब्बत में स्थित है, जहां हिमालय की पवित्र श्रृंखलाएं फैली हुई हैं।

गंधमादन पर्वत दिव्य सुगंधों से युक्त है, जिसके कारण इसका नाम पड़ा। यहां हनुमान जी श्रीराम की भक्ति में लीन रहते हैं और समय-समय पर भक्तों के कष्ट हरने के लिए प्रकट होते हैं। पुराणों में वर्णन है कि वे इस पर्वत पर तपस्या और राम नाम का जप करते हुए कलियुग के अंत तक रहेंगे।

महाभारत में गंधमादन पर्वत का उल्लेख

महाभारत काल में पांडवों के अज्ञातवास के दौरान भीम ने गंधमादन पर्वत की यात्रा की थी। सहस्त्रदल कमल लाने के लिए वे वहां पहुंचे। वहां हनुमान जी ने उनका मार्ग रोका। भीम ने अपने बल का प्रदर्शन किया, लेकिन हनुमान जी ने अपनी पूंछ बढ़ाकर रास्ता अवरुद्ध कर दिया। भीम अपनी पूरी शक्ति लगाने के बावजूद पूंछ हिला नहीं सकेतगैसतब हनुमान जी ने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट किया और भीम को समझाया कि वे श्रीराम के सेवक हैं। 

 

Hanuman Jayanti: The Birth of Lord Hanuman

हनुमान जी के दर्शन

हालांकि गंधमादन पर्वत को हनुमान जी का प्रमुख निवास स्थान माना जाता है, लेकिन शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि हनुमान जी अपने भक्तों के हृदय में वास करते हैं। उनकी साक्षात उपस्थिति का अनुभव भक्ति और श्रद्धा से ही संभव है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, तुलसीदास, समर्थ रामदास और नीम करोली बाबा जैसे संतों को हनुमान जी के दर्शन प्राप्त हुए थे। ये दर्शन सामान्यतः गहन साधना, भक्ति और शुद्ध हृदय के माध्यम से ही संभव हुए।

आधुनिक समय में गंधमादन पर्वत की दुर्गमता के कारण वहां पहुंचना आसान नहीं है। फिर भी, भक्त हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और अन्य भक्ति भजनों के माध्यम से हनुमान जी की कृपा प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से हनुमान जी का स्मरण करता है, उसे उनके आशीर्वाद और सुरक्षा अवश्य प्राप्त होती है।

रामायण काल के बाद हनुमान जी की यात्रा

रामायण समाप्त होने के पश्चात हनुमान जी ने विभिन्न स्थानों की यात्रा की। उन्होंने किष्किंधा और अंजनी पर्वत पर भी समय बिताया, जहां उनकी माता अंजना का संबंध था। कुछ मान्यताओं के अनुसार वे इन स्थानों पर भी दर्शन देते हैं, लेकिन उनका मुख्य निवास गंधमादन पर्वत ही है। हनुमान जी ने कलियुग में भक्तों की सहायता के लिए कई बार प्रकट होकर दर्शन दिए। उनकी उपस्थिति रामकथा के गान स्थानों पर भी मानी जाती है, जहां वे गुप्त रूप से विराजमान रहते हैं।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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