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Shani Pradosh Vrat: शनि प्रदोष व्रत पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें इस दिन क्या करें और क्या न करें

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Shani Pradosh Vrat: शनि प्रदोष व्रत के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ और साफ वस्त्र धारण करके ही भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। बिना स्नान किए या अशुद्ध अवस्था में पूजा करना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना गया है।

Shani Pradosh Vrat
Shani Pradosh Vrat: शनि प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। जब प्रदोष तिथि शनिवार के दिन पड़ती है, तब उसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और शनिदेव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि शनि प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और शनिदेव भी प्रसन्न होकर शुभ फल प्रदान करते हैं। हालांकि, इस व्रत के दौरान कुछ ऐसे नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना आवश्यक माना गया है। यदि इन नियमों की अनदेखी की जाए तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। आइए जानते हैं कि शनि प्रदोष व्रत के दिन कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए और इस दिन क्या करना शुभ माना गया है।

शनि प्रदोष व्रत के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां

बिना स्नान किए पूजा न करें - शनि प्रदोष व्रत के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ और साफ वस्त्र धारण करके ही भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। बिना स्नान किए या अशुद्ध अवस्था में पूजा करना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना गया है।

प्रदोष काल की पूजा को नजरअंदाज न करें - इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण समय प्रदोष काल होता है, जो सूर्यास्त के आसपास का समय माना जाता है। भगवान शिव की पूजा, अभिषेक, दीपदान और आरती इसी समय करना सबसे शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो पूजा प्रदोष काल में ही करें।

शिवलिंग पर निषिद्ध सामग्री अर्पित न करें - भगवान शिव की पूजा में कुछ वस्तुएं अर्पित नहीं की जातीं। शनि प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर, केतकी का फूल और तुलसी दल अर्पित नहीं करना चाहिए। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक, भस्म, गंगाजल, कच्चा दूध और शुद्ध जल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

बेलपत्र से जुड़ी गलती न करें - शिव पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व है, लेकिन बेलपत्र अर्पित करते समय ध्यान रखें कि वह फटा हुआ, सूखा या कीड़ों से खराब न हो। तीन पत्तियों वाला साफ और ताजा बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित करना शुभ माना जाता है।

क्रोध और विवाद से दूर रहें - शनि प्रदोष व्रत के दिन क्रोध करना, अपशब्द बोलना, किसी का अपमान करना या घर में कलह करना शुभ नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन मन, वचन और कर्म से संयम रखना चाहिए।

तामसिक भोजन का सेवन न करें - व्रत के दिन मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और अन्य तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रत रखने वाले श्रद्धालु फलाहार करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें।

पूजा में जल्दबाजी न करें - भगवान शिव की पूजा पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करनी चाहिए। पूजा के दौरान मंत्रों का यथासंभव सही उच्चारण करें और जल्दबाजी में पूजा समाप्त न करें।

दान-पुण्य की उपेक्षा न करें - शनि प्रदोष के दिन सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, तिल, काला उड़द, तेल या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। दान करते समय अहंकार नहीं करना चाहिए।

 

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शनि प्रदोष व्रत के दिन क्या करें?

भगवान शिव का रुद्राभिषेक करें - यदि संभव हो तो प्रदोष काल में भगवान शिव का जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के पुष्प आदि अर्पित करें।

शिव मंत्रों का जाप करें - इस दिन "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जप भी किया जा सकता है। श्रद्धानुसार शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र या रुद्राष्टक का पाठ भी किया जाता है।

शनिदेव का पूजन करें - चूंकि यह शनिवार का प्रदोष व्रत होता है, इसलिए भगवान शिव की पूजा के बाद शनिदेव की भी श्रद्धापूर्वक पूजा करें। सरसों के तेल का दीपक जलाना और काले तिल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

नंदी महाराज के दर्शन करें - शिव मंदिर में नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान में अपनी मनोकामना कहना भी धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। इसके बाद भगवान शिव के समक्ष प्रार्थना की जाती है।

दीपदान करें - शाम के समय शिव मंदिर या घर के पूजा स्थल पर घी या तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ माना गया है। इससे पूजा का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

व्रत का पालन श्रद्धा से करें - जो श्रद्धालु व्रत रखते हैं, उन्हें पूरे दिन संयम का पालन करना चाहिए। फलाहार या निर्जल व्रत अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार रखा जा सकता है। व्रत के दौरान भगवान शिव का स्मरण करते रहना शुभ माना जाता है।

 

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शनि प्रदोष व्रत में किन बातों का विशेष ध्यान रखें?

  • पूजा से पहले सभी पूजन सामग्री तैयार रखें।
  • भगवान शिव को ताजे पुष्प और स्वच्छ बेलपत्र ही अर्पित करें।
  • प्रदोष काल में दीप, धूप और आरती अवश्य करें।
  • यदि मंदिर जा सकें तो शिवलिंग के दर्शन और जलाभिषेक करें।
  • घर में शांति और पवित्र वातावरण बनाए रखें।
  • जरूरतमंदों की सहायता करने का प्रयास करें।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत का पारण अगले दिन उचित समय पर करें।

शनि प्रदोष व्रत में किन कार्यों से बचना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किसी का अपमान करना, झूठ बोलना, छल-कपट करना, नशे का सेवन करना, तामसिक भोजन करना, पूजा के समय अशुद्ध वस्त्र पहनना और भगवान शिव को निषिद्ध सामग्री अर्पित करना उचित नहीं माना जाता। इसके साथ ही पूजा के दौरान मन को इधर-उधर भटकाने के बजाय पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए। शनि प्रदोष व्रत का मुख्य आधार भगवान शिव की आराधना, संयम और विधिपूर्वक पूजा है, इसलिए पूरे दिन धार्मिक नियमों का पालन करने का प्रयास करना चाहिए।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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